रोहिणी में डीडीए के खुले नाले में गिरकर श्रमिक की मौत, नशे में धुत दोस्त को नहीं लगी भनक, लापरवाही पर सवाल
नशे में धुत दोस्त को नहीं लगी भनक, 5 घंटे बाद मिला शव; डीडीए ने हादसे के बाद आनन-फानन में नाला ढंका, प्रशासनिक सुस्ती पर सवाल
Delhi News: दिल्ली के रोहिणी इलाके में एक और दर्दनाक हादसा सामने आया है जो प्रशासनिक लापरवाही और असुरक्षित बुनियादी ढांचे की गंभीर समस्या को उजागर करता है। रोहिणी सेक्टर 32 में सड़क के किनारे बने दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी डीडीए के खुले पड़े नाले में गिरने से एक युवा श्रमिक की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान 23 वर्षीय बिरजू कुमार के रूप में हुई है जो बिहार के समस्तीपुर जिले के सादीपुर बदनाहा गांव का मूल निवासी था। बिरजू रोहिणी सेक्टर 32 में स्थित एक निर्माणाधीन इमारत में श्रमिक के रूप में काम करता था और कंस्ट्रक्शन साइट पर ही अन्य मजदूरों के साथ रहता था।
घटना सोमवार रात करीब आठ बजे की है जब बिरजू अपने साथी मजदूर और दोस्त सूरज के साथ पैदल ही रोहिणी की ओर से अपनी कंस्ट्रक्शन साइट पर वापस लौट रहा था। दोनों ने शाम को शराब पी थी और नशे की हालत में वापस आ रहे थे। रास्ते में बिरजू सड़क के किनारे बने खुले नाले में गिर गया। चौंकाने वाली बात यह है कि नशे में धुत सूरज को अपने दोस्त के नाले में गिरने की जानकारी ही नहीं हुई। वह अकेला ही साइट पर पहुंच गया। मंगलवार को जब अन्य लोगों ने बिरजू के बारे में पूछा तब कहीं जाकर मामला सामने आया। सूरज ने पहले बिरजू के अपहरण की बात कही लेकिन बाद में उसे शक हुआ कि शायद बिरजू नाले में गिर गया हो। पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी गई। लगभग पांच घंटे चले बचाव अभियान के बाद मंगलवार रात नौ बजे बिरजू का शव नाले से बरामद किया गया। बेगमपुर थाना पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।
घटना का पूरा क्रम और सूरज का बयान
सोमवार रात लगभग आठ बजे बिरजू कुमार और सूरज दोनों अपनी कंस्ट्रक्शन साइट पर वापस लौट रहे थे। दोनों ने शाम को साथ में शराब पी थी और नशे की हालत में थे। सूरज आगे चल रहा था और बिरजू उसके पीछे आ रहा था। अंधेरे में और नशे की हालत में बिरजू को सड़क के किनारे बने खुले नाले का पता नहीं चला और वह उसमें गिर गया। नाला करीब छह फुट गहरा था और उसमें पानी भरा हुआ था। सूरज इतना नशे में था कि उसे अपने साथी के गिरने की आवाज तक सुनाई नहीं दी। वह अकेला ही कंस्ट्रक्शन साइट पर पहुंच गया और सो गया।
मंगलवार सुबह जब ठेकेदार और अन्य मजदूरों ने बिरजू के बारे में पूछा तो सूरज ने शुरुआत में कहा कि शायद किसी ने बिरजू का अपहरण कर लिया हो। लेकिन जब लोगों ने उससे विस्तार से पूछताछ की तो उसे धीरे धीरे रात की घटनाओं की याद आने लगी। उसने बताया कि संभव है कि बिरजू रास्ते में नाले में गिर गया हो। इसके बाद सभी लोग उस रास्ते पर गए जहां से वे आए थे। नाले के पास पहुंचकर देखा लेकिन अंदर कुछ दिखाई नहीं दिया। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।
Delhi News: पांच घंटे चला बचाव अभियान
मंगलवार दोपहर 2 बजकर 36 मिनट पर रोहिणी पुलिस स्टेशन में पीसीआर कॉल आई जिसमें रोहिणी सेक्टर 32 में डीडीए के नाले में एक युवक के गिरने की सूचना दी गई। कॉलर आमिर हुसैन ने पुलिस को पूरी घटना के बारे में बताया। सूचना मिलते ही बेगमपुर थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। साथ ही दिल्ली दमकल विभाग और अन्य बचाव एजेंसियों को भी सूचित किया गया। पुलिस ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया। पहले सुपर सकर मशीन से नाले का पानी निकालने का काम शुरू किया गया। दमकल विभाग की टीम भी तुरंत मौके पर पहुंच गई।
गोताखोरों ने नाले में उतरकर तलाश शुरू की। करीब पांच घंटे तक चले संयुक्त बचाव अभियान के बाद आखिरकार मंगलवार रात नौ बजे बिरजू का शव नाले से बरामद कर लिया गया। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त रोहिणी जिला राजीव रंजन ने पुष्टि की कि बिरजू कुमार राय का शव नाले से निकाला गया है। पुलिस मृतक के दोस्त सूरज से विस्तृत पूछताछ कर रही है और आगे की कार्रवाई कर रही है। घटना की पूरी जांच की जा रही है।
डीडीए की घोर लापरवाही सामने आई
इस हादसे ने दिल्ली विकास प्राधिकरण की घोर लापरवाही को उजागर कर दिया है। मृतक के साथी मजदूरों ने बताया कि कुछ महीने पहले ही डीडीए ने इस नाले का निर्माण कार्य पूरा कराया था। यह नाला लगभग छह फुट गहरा है। चौंकाने वाली बात यह है कि नाले के कई हिस्सों पर सीमेंट के स्लैब तो लगाए गए थे लेकिन कई जगहों पर स्लैब बिल्कुल नहीं लगाए गए थे। नाला पूरी तरह खुला छोड़ दिया गया था। रात में अंधेरे में यह किसी के लिए भी मौत का जाल बन सकता था।
मजदूरों का कहना है कि यदि नाले पर ठीक से स्लैब लगाए गए होते तो शायद बिरजू की जान बच जाती। और भी चौंकाने वाली बात यह है कि हादसे की जानकारी मिलते ही डीडीए के कर्मचारी आनन फानन में स्लैब लेकर घटनास्थल पर पहुंच गए। फिर उन्होंने तुरंत खुले नालों को ढकने का काम शुरू कर दिया। लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अगर यह काम पहले ही कर दिया गया होता तो बिरजू की जान नहीं जाती। यह स्पष्ट रूप से जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही है। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगभग 300 मीटर के दायरे को बैरिकेड्स लगाकर बंद कर दिया है।
Delhi News: दिल्ली में खुले गड्ढों से बार बार हादसे
यह घटना दिल्ली में खुले गड्ढों और नालों से होने वाले हादसों की एक लंबी श्रृंखला में ताजा कड़ी है। हाल ही में जनकपुरी में दिल्ली जल बोर्ड द्वारा बनाए गए गहरे गड्ढे में गिरने से 25 वर्षीय युवक कमल ध्यानी की मौत हो गई थी। यह मामला पूरी दिल्ली में चर्चा का विषय बना था। इसी क्रम में मंगलवार को ही पूर्वी दिल्ली के वेस्ट विनोद नगर में दिल्ली जल बोर्ड की लापरवाही से 70 वर्षीय महिला बबली खुले गड्ढे में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गईं।
नोएडा में युवराज मेहता की मौत के बाद भी प्रशासन के लापरवाह अधिकारी चेतने को तैयार नहीं हो रहे हैं। यह बार बार होने वाली घटनाएं प्रशासनिक जवाबदेही और नागरिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि निर्माण कार्यों को पूरा करते समय सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। जनता की सुरक्षा की अनदेखी की जा रही है।
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