दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शुरू होगा शिक्षा का नया युग, AI क्लासरूम से लेकर विदेशी भाषाओं तक, 75 सीएम श्री स्कूलों का हुआ उद्घाटन

केंद्रीय शिक्षा मंत्री और CM रेखा गुप्ता ने किया सरोजिनी नगर में पहले स्कूल का शुभारंभ, 7000 स्मार्ट क्लासरूम और 175 ICT लैब की होगी स्थापना, JEE-NEET की भी मिलेगी तैयारी

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Delhi News: दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए एक नए युग की शुरुआत हो गई है। अब सरकारी स्कूल के विद्यार्थी भी निजी स्कूलों की तरह आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित शिक्षा और विदेशी भाषाओं का ज्ञान प्राप्त कर सकेंगे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सरोजिनी नगर में बने पहले ‘सीएम श्री स्कूल’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर पूरे दिल्ली में 75 ऐसे विशेष स्कूलों की परियोजना की शुरुआत की घोषणा भी की गई।

ये स्कूल ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित किए जाएंगे जहां स्मार्ट AI क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी, स्किल लैब, लैंग्वेज लैब और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। आइए विस्तार से जानते हैं इस महत्वाकांक्षी शिक्षा परियोजना के बारे में।

Delhi News: क्या है ‘सीएम श्री स्कूल’ परियोजना?

‘सीएम श्री स्कूल’ दिल्ली सरकार की एक महत्वाकांक्षी शिक्षा परियोजना है जिसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को विश्वस्तरीय शिक्षा प्रदान करना है।

नाम का अर्थ: ‘सीएम श्री’ का पूरा नाम ‘Chief Minister’s School of Eminence’ है। ‘श्री’ शब्द का अर्थ है उत्कृष्टता और महानता। इन स्कूलों को उत्कृष्ट शिक्षण संस्थानों के रूप में विकसित किया जाएगा।

लक्ष्य संख्या: पूरे दिल्ली में कुल 75 ऐसे स्कूल स्थापित किए जाएंगे। पहले स्कूल का उद्घाटन सरोजिनी नगर में हो चुका है और अन्य स्कूलों का काम तेजी से चल रहा है।

मुख्य उद्देश्य: इन स्कूलों का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों के बच्चों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के बच्चे जो महंगी निजी शिक्षा का खर्च नहीं उठा सकते, उन्हें भी उच्च गुणवत्ता की आधुनिक शिक्षा मिल सके।

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इन स्कूलों को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया है। यानी ये स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता के केंद्र बनेंगे।

समयबद्ध योजना: यह परियोजना एक साल के भीतर शुरू की जा रही है, जो सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। 31 मार्च 2026 तक सभी 7,000 स्मार्ट क्लासरूम तैयार हो जाएंगे।

स्मार्ट AI क्लासरूम – भविष्य की शिक्षा

सीएम श्री स्कूलों की सबसे बड़ी विशेषता होगी स्मार्ट AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) क्लासरूम। ये पारंपरिक कक्षाओं से बिल्कुल अलग होंगी। इन कक्षाओं में पढ़ाई का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। अब बच्चे सिर्फ किताबों से नहीं बल्कि एडवांस तकनीक की मदद से सीखेंगे। यह उन्हें 21वीं सदी के लिए तैयार करेगा।

इंटरैक्टिव पैनल: हर कक्षा में बड़े इंटरैक्टिव डिजिटल पैनल लगाए जाएंगे। यह एक स्मार्ट बोर्ड की तरह काम करेगा जहां शिक्षक टच स्क्रीन पर पढ़ा सकेंगे। बच्चे विज्ञान के प्रयोग, इतिहास की घटनाएं, भूगोल के नक्शे – सब कुछ 3D और एनिमेशन में देख सकेंगे।

डिजिटल पढ़ाई सामग्री: किताबों के साथ-साथ डिजिटल पढ़ाई सामग्री भी उपलब्ध होगी। वीडियो लेक्चर, एनिमेटेड कहानियां, इंटरैक्टिव क्विज – ये सब बच्चों को पढ़ाई में रुचि बढ़ाएंगे।

AI आधारित लर्निंग टूल्स: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से हर बच्चे की सीखने की गति और शैली को समझा जाएगा। जिस बच्चे को किसी विषय में कठिनाई हो, उसके लिए विशेष सामग्री और अभ्यास उपलब्ध कराए जाएंगे।

पर्सनलाइज्ड लर्निंग: AI तकनीक से हर बच्चे के लिए अलग सीखने का तरीका बनाया जा सकेगा। किसी को धीरे समझाना हो तो धीरे, किसी को तेजी से आगे बढ़ना हो तो तेजी से। यह हर बच्चे की व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करेगा।

31 मार्च तक का लक्ष्य: दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि 31 मार्च 2026 से पहले सभी 7,000 स्मार्ट क्लासरूम तैयार हो जाएंगे। यह एक बहुत बड़ा और महत्वाकांक्षी लक्ष्य है जो दिखाता है कि सरकार इस परियोजना को कितनी गंभीरता से ले रही है।

Delhi News: 175 ICT लैब – कंप्यूटर और कोडिंग की शिक्षा

आधुनिक युग में कंप्यूटर और तकनीकी ज्ञान अनिवार्य है। बिना इसके आज के समय में आगे बढ़ना मुश्किल है। इसी को ध्यान में रखते हुए 175 नई ICT (Information and Communication Technology) लैब स्थापित की जा रही हैं। ये लैब्स बच्चों को डिजिटल युग के लिए तैयार करेंगी। वे यहां न सिर्फ कंप्यूटर चलाना सीखेंगे बल्कि प्रोग्रामिंग, कोडिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे महत्वपूर्ण कौशल भी हासिल करेंगे।

7,000 कंप्यूटर: ये ICT लैब्स कुल 7,000 आधुनिक कंप्यूटरों से सुसज्जित होंगी। यानी बड़ी संख्या में बच्चे एक साथ कंप्यूटर पर काम कर सकेंगे। यह सुनिश्चित करेगा कि हर बच्चे को पर्याप्त समय और अभ्यास मिले।

कोडिंग शिक्षा: इन लैब्स में बच्चों को कोडिंग सिखाई जाएगी। Python, Java, C++ जैसी प्रोग्रामिंग भाषाएं सिखाई जाएंगी। कोडिंग आज के युग का एक महत्वपूर्ण कौशल है। बड़ी-बड़ी टेक कंपनियां कोडर्स को अच्छी सैलरी देती हैं।

कंप्यूटर साक्षरता: बुनियादी कंप्यूटर ज्ञान से लेकर उन्नत सॉफ्टवेयर तक – सब कुछ सिखाया जाएगा। MS Office, डिजिटल प्रेजेंटेशन, डेटा एनालिसिस जैसे महत्वपूर्ण कौशल विकसित किए जाएंगे। ये कौशल किसी भी करियर में काम आएंगे।

इंटरनेट एक्सेस: बच्चों को इंटरनेट की दुनिया से परिचित कराया जाएगा। डिजिटल सुरक्षा, ऑनलाइन शिक्षा संसाधनों का उपयोग, और जिम्मेदार इंटरनेट उपयोग सिखाया जाएगा। इंटरनेट एक शक्तिशाली उपकरण है अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए।

भविष्य के लिए तैयारी: आज लगभग हर क्षेत्र में कंप्यूटर और तकनीक की जरूरत है। चाहे मेडिकल हो, इंजीनियरिंग हो, व्यापार हो या कला – हर जगह डिजिटल ज्ञान जरूरी है। ये ICT लैब्स बच्चों को 21वीं सदी के करियर के लिए तैयार करेंगी।

JEE, NEET, CUET की तैयारी – प्रतियोगी परीक्षाओं का विशेष पोर्टल

सीएम श्री स्कूलों की एक बहुत महत्वपूर्ण विशेषता होगी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष व्यवस्था। यह गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों के लिए एक वरदान साबित होगा।

अभी तक ये बच्चे महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा पाते थे और इसलिए प्रतियोगिता में पिछड़ जाते थे। अब स्कूल में ही उन्हें मुफ्त में गुणवत्तापूर्ण तैयारी मिलेगी।

विशेष पोर्टल: एक डिजिटल पोर्टल बनाया जा रहा है जहां JEE (Joint Entrance Examination), NEET (National Eligibility cum Entrance Test), CUET (Common University Entrance Test) जैसी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी। यह पोर्टल 24×7 उपलब्ध रहेगा।

JEE की तैयारी: इंजीनियरिंग में प्रवेश के लिए JEE भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है। IIT, NIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश के लिए यह जरूरी है। सरकारी स्कूल के बच्चों को भी अब इसकी गुणवत्तापूर्ण तैयारी मिलेगी।

NEET की कोचिंग: मेडिकल में प्रवेश के लिए NEET अनिवार्य है। MBBS, BDS जैसे कोर्स करने के लिए NEET क्रैक करना जरूरी है। महंगी कोचिंग का खर्च न उठा सकने वाले बच्चों को स्कूल में ही मुफ्त तैयारी मिलेगी।

CUET और अन्य परीक्षाएं: विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए CUET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की भी तैयारी कराई जाएगी। Delhi University, JNU जैसे संस्थानों में प्रवेश के लिए यह महत्वपूर्ण है।

अनुभवी शिक्षक: इन परीक्षाओं की तैयारी के लिए विषय विशेषज्ञ और अनुभवी शिक्षक तैनात किए जाएंगे। वे बच्चों को परीक्षा की रणनीति, समय प्रबंधन और सवाल हल करने की तकनीक भी सिखाएंगे।

समान अवसर: यह पहल गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को समान अवसर देगी। अब उन्हें भी IIT, AIIMS जैसे संस्थानों में प्रवेश का सपना देखने का हक मिलेगा। यह सामाजिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम है।

Delhi News: मल्टी-सेक्टोरियल स्किल लैब्स – आधुनिक कौशल शिक्षा

सीएम श्री स्कूलों में मल्टी-सेक्टोरियल स्किल लैब्स स्थापित की जाएंगी जहां आधुनिक और भविष्य के कौशल सिखाए जाएंगे। ये लैब्स बच्चों को केवल सिद्धांत नहीं बल्कि व्यावहारिक ज्ञान देंगी। 21वीं सदी में नौकरी के लिए केवल किताबी ज्ञान काफी नहीं है। व्यावहारिक कौशल और नई तकनीकों की समझ बेहद जरूरी है। इन लैब्स में बच्चे हाथों से काम करके सीखेंगे।

रोबोटिक्स: बच्चे रोबोट बनाना और प्रोग्राम करना सीखेंगे। यह न केवल रोमांचक है बल्कि भविष्य का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र भी है। ऑटोमेशन और रोबोटिक्स में करियर की अपार संभावनाएं हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): AI की बुनियादी समझ से लेकर मशीन लर्निंग तक – बच्चों को इस क्रांतिकारी तकनीक से परिचित कराया जाएगा। AI भविष्य की तकनीक है और इसे समझना बेहद जरूरी है।

डिजाइन और क्रिएटिविटी: ग्राफिक डिजाइन, 3D मॉडलिंग, एनिमेशन जैसे रचनात्मक कौशल सिखाए जाएंगे। डिजिटल युग में ये कौशल बहुत मांग में हैं। विज्ञापन, मीडिया, फिल्म – हर जगह डिजाइनरों की जरूरत है।

मेकाट्रॉनिक्स: यह मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर का मिश्रण है। यह एक उभरता हुआ क्षेत्र है जिसमें करियर की अपार संभावनाएं हैं। ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस, मैन्युफैक्चरिंग – हर जगह मेकाट्रॉनिक्स का उपयोग हो रहा है।

हैंड्स-ऑन लर्निंग: ये लैब्स केवल सिद्धांत नहीं बल्कि व्यावहारिक शिक्षा पर केंद्रित होंगी। बच्चे खुद प्रोजेक्ट बनाएंगे और प्रयोग करेंगे। यह उनके आत्मविश्वास और समस्या समाधान क्षमता को बढ़ाएगा।

175 लैंग्वेज लैब्स – बहुभाषी शिक्षा और विदेशी भाषाएं

वैश्विक युग में भाषाओं का ज्ञान बेहद महत्वपूर्ण है। एक से अधिक भाषाएं जानने वाले लोगों के लिए करियर के अधिक अवसर होते हैं। इसके लिए 175 से अधिक लैंग्वेज लैब्स स्थापित की जा रही हैं।

ये लैब्स बच्चों को न सिर्फ भाषाएं सिखाएंगी बल्कि विभिन्न संस्कृतियों से भी परिचित कराएंगी। भाषा सीखना एक नई दुनिया के दरवाजे खोलता है।

विदेशी भाषाएं: बच्चों को अंग्रेजी के अलावा अन्य विदेशी भाषाएं जैसे फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश, जापानी, चीनी आदि सिखाई जाएंगी। ये भाषाएं अंतरराष्ट्रीय करियर के लिए बहुत उपयोगी हैं।

बहुभाषी शिक्षा: राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार बहुभाषी शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है। हिंदी, अंग्रेजी के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओं का भी ज्ञान दिया जाएगा। यह राष्ट्रीय एकता को भी मजबूत करेगा।

आधुनिक उपकरण: लैंग्वेज लैब्स में आधुनिक ऑडियो-वीडियो उपकरण होंगे। बच्चे हेडफोन पहनकर सही उच्चारण सीखेंगे। वे नेटिव स्पीकर्स की रिकॉर्डिंग सुनेंगे और अपने उच्चारण को सुधारेंगे।

इंटरैक्टिव सॉफ्टवेयर: भाषा सीखने के लिए विशेष सॉफ्टवेयर और ऐप्स का उपयोग किया जाएगा जो सीखने को मजेदार बनाते हैं। गेम, क्विज, वर्चुअल कन्वर्सेशन – ये सब भाषा सीखने को आसान और रोचक बनाएंगे।

वैश्विक अवसर: विदेशी भाषाओं का ज्ञान बच्चों के लिए वैश्विक करियर के दरवाजे खोलेगा। वे विदेशों में अध्ययन और काम के लिए बेहतर तैयार होंगे। अनुवाद, पर्यटन, अंतरराष्ट्रीय व्यापार – कई क्षेत्रों में भाषा ज्ञान का महत्व है।

Delhi News: 100+ डिजिटल लाइब्रेरी – ज्ञान का असीमित खजाना

पारंपरिक पुस्तकालयों के साथ-साथ 100 से अधिक डिजिटल लाइब्रेरी भी स्थापित की जाएंगी। यह 21वीं सदी की शिक्षा की जरूरत है। डिजिटल लाइब्रेरी का मतलब है कि हजारों किताबें और संसाधन एक क्लिक पर उपलब्ध होंगे। बच्चों को भारी किताबें ढोने की जरूरत नहीं होगी।

ई-बुक्स: हजारों ई-बुक्स बच्चों के लिए उपलब्ध होंगी। पाठ्यपुस्तकों से लेकर कहानियों, विज्ञान की किताबों से लेकर इतिहास तक – सब कुछ। बच्चे अपनी रुचि के अनुसार कुछ भी पढ़ सकेंगे।

ऑनलाइन संसाधन: शैक्षिक वेबसाइट, ऑनलाइन पत्रिकाएं, शोध पत्र – सब कुछ डिजिटल लाइब्रेरी के माध्यम से सुलभ होगा। यह शोध और परियोजना कार्य में बहुत मददगार होगा।

वीडियो और ऑडियो सामग्री: शैक्षिक वीडियो, डॉक्यूमेंट्री, पॉडकास्ट आदि भी उपलब्ध होंगे। कुछ बच्चे पढ़कर नहीं बल्कि देखकर या सुनकर बेहतर सीखते हैं। डिजिटल लाइब्रेरी सभी तरह के शिक्षार्थियों की जरूरतें पूरी करेगी।

सर्च और एक्सेस: बच्चे आसानी से किसी भी विषय को सर्च कर सकेंगे और तुरंत जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। समय की बचत होगी और शोध आसान हो जाएगा।

पढ़ने की आदत: डिजिटल लाइब्रेरी बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने में मदद करेगी। जब इतने सारे विकल्प उपलब्ध होंगे तो बच्चे खुद पढ़ने के लिए प्रेरित होंगे।

‘साइंस ऑफ लिविंग’ – समग्र व्यक्तित्व विकास

सीएम श्री स्कूलों में केवल अकादमिक शिक्षा ही नहीं बल्कि व्यक्तित्व विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह समग्र शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

एक सफल और खुशहाल जीवन के लिए केवल अच्छे अंक काफी नहीं हैं। मानसिक स्वास्थ्य, नैतिक मूल्य, और जीवन कौशल भी उतने ही जरूरी हैं।

मानसिक स्वास्थ्य: ‘साइंस ऑफ लिविंग’ स्पेस के जरिए बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखा जाएगा। तनाव प्रबंधन, भावनात्मक संतुलन, और सकारात्मक सोच विकसित की जाएगी। आजकल बच्चों में तनाव और चिंता बढ़ रही है, इसलिए यह बहुत जरूरी है।

नैतिक शिक्षा: मूल्य-आधारित शिक्षा दी जाएगी। ईमानदारी, जिम्मेदारी, सहानुभूति, और नैतिकता जैसे मूल्य विकसित किए जाएंगे। ये मूल्य बच्चों को अच्छा इंसान बनाएंगे।

व्यक्तित्व विकास: आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, संचार कौशल, टीमवर्क – इन सभी पर काम किया जाएगा। ये कौशल करियर और जीवन में सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

योग और ध्यान: शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग और ध्यान की शिक्षा दी जाएगी। योग न सिर्फ शरीर को स्वस्थ रखता है बल्कि मन को भी शांत करता है।

जीवन कौशल: निर्णय लेना, समस्या समाधान, समय प्रबंधन जैसे जीवन कौशल सिखाए जाएंगे। ये कौशल हर क्षेत्र में काम आते हैं और सफलता की नींव हैं।

Delhi News: केंद्रीय शिक्षा मंत्री और CM की प्रतिक्रिया

उद्घाटन समारोह में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस परियोजना की भूरि-भूरि प्रशंसा की। दोनों नेताओं ने इसे शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम बताया।

यह परियोजना केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। दोनों स्तरों पर समन्वय से ही ऐसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं सफल हो सकती हैं।

धर्मेंद्र प्रधान की बात: केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने दिल्ली सरकार को बधाई देते हुए कहा कि एक साल के अंदर शिक्षा से जुड़े अपने वादों को पूरा करने की दिशा में यह कार्य सराहनीय है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को निजी स्कूलों जैसी आधुनिक और उन्नत शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है, यह स्वागत योग्य कदम है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह परियोजना पूरे देश के लिए एक मॉडल बनेगी।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का संकल्प: मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम श्री स्कूल बच्चों के भविष्य को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का संकल्प है। उन्होंने कहा कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार है, चाहे वह किसी भी आर्थिक पृष्ठभूमि से हो। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गरीबी किसी बच्चे के सपनों में बाधा नहीं बननी चाहिए।

शिक्षा मंत्री आशीष सूद की घोषणा: दिल्ली के शिक्षा मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में यह महत्वाकांक्षी परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है और समयबद्ध तरीके से पूरी होगी। उन्होंने कहा कि सभी 7,000 स्मार्ट क्लासरूम, 175 ICT लैब्स, और 175 लैंग्वेज लैब्स 31 मार्च से पहले तैयार हो जाएंगे।

यह परियोजना क्यों महत्वपूर्ण है?

सीएम श्री स्कूल परियोजना केवल एक शैक्षिक पहल नहीं बल्कि सामाजिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह समझना जरूरी है कि यह परियोजना क्यों इतनी महत्वपूर्ण है।

शिक्षा में समानता: अब तक सरकारी और निजी स्कूलों में बहुत बड़ा अंतर था। अमीर परिवारों के बच्चे महंगे निजी स्कूलों में पढ़ते थे जबकि गरीब बच्चे संसाधनों की कमी वाले सरकारी स्कूलों में। यह परियोजना इस अंतर को कम करेगी।

प्रतिभा का सही उपयोग: कई प्रतिभाशाली बच्चे केवल गरीबी के कारण अपनी क्षमता नहीं दिखा पाते। अब उन्हें भी वही सुविधाएं मिलेंगी जो अमीर बच्चों को मिलती हैं।

राष्ट्रीय विकास: जब सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी तो देश में कुशल मानव संसाधन बढ़ेगा। यह राष्ट्रीय विकास में योगदान देगा।

तकनीकी प्रगति: AI, रोबोटिक्स, कोडिंग जैसे आधुनिक विषय सिखाकर हम अगली पीढ़ी को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं।

Delhi News: निष्कर्ष

दिल्ली में ‘सीएम श्री स्कूल’ परियोजना की शुरुआत सरकारी शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम है। 75 स्कूलों में 7,000 स्मार्ट AI क्लासरूम, 175 ICT लैब्स, 175 लैंग्वेज लैब्स, 100 डिजिटल लाइब्रेरी, स्किल लैब्स और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी – यह सब मिलकर सरकारी स्कूलों के बच्चों को विश्वस्तरीय शिक्षा प्रदान करेगा।

यह पहल न केवल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारेगी बल्कि समाज में समानता भी लाएगी। अब गरीब परिवार का बच्चा भी IIT, AIIMS जैसे संस्थानों में प्रवेश का सपना देख सकेगा। रोबोटिक्स, AI, कोडिंग, विदेशी भाषाएं – ये सब अब केवल अमीरों के बच्चों के लिए नहीं रहेंगे।

31 मार्च 2026 तक सभी सुविधाएं तैयार होने का लक्ष्य दिल्ली सरकार की गंभीरता को दर्शाता है। यह परियोजना निश्चित रूप से दिल्ली के सरकारी स्कूली बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाएगी और पूरे देश के लिए एक मॉडल स्थापित करेगी।

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