Delhi Liquor Case: हाई कोर्ट में CBI की तीखी दलीलें “यह राष्ट्रीय शर्म है”, केजरीवाल-सिसोदिया को आरोपमुक्त करने के आदेश को दी चुनौती, 170 फोन नष्ट करने का भी आरोप

CBI ने ट्रायल कोर्ट के केजरीवाल-सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को डिस्चार्ज आदेश को चुनौती दी; SG तुषार मेहता बोले “देश की राजधानी का सबसे बड़ा घोटाला, राष्ट्रीय शर्म”

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Delhi Liquor Case: दिल्ली आबकारी नीति घोटाले यानी शराब घोटाले में आज दिल्ली हाई कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। ट्रायल कोर्ट द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को आरोपमुक्त यानी डिस्चार्ज करने के आदेश को CBI ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले में CBI की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में बेहद तीखी दलीलें पेश कीं। उन्होंने इस घोटाले को देश की राजधानी के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला बताया और कहा कि इसे वे “राष्ट्रीय शर्म” कहेंगे।

Delhi Liquor Case: क्या है पूरा मामला?

दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 को लेकर यह विवाद तब शुरू हुआ जब आरोप लगे कि इस नीति को जानबूझकर कुछ खास शराब कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के लिए तैयार किया गया। CBI और ED दोनों एजेंसियों ने इस मामले में जांच की। ट्रायल कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया यानी उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया। इसी आदेश को CBI ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है और आज उस अपील पर सुनवाई हुई।

SG तुषार मेहता की तीखी दलीलें

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दिल्ली हाई कोर्ट में पेश होते हुए सबसे पहले मामले की गंभीरता रेखांकित की। उन्होंने कहा कि यह मामला दिल्ली के इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में से एक है और इसे वे राष्ट्रीय शर्म कहेंगे। मेहता ने कहा कि दिल्ली आबकारी नीति को जानबूझकर इस प्रकार तैयार किया गया था कि चुनिंदा व्यापारियों को फायदा पहुंचाया जा सके। नीति को मैनिपुलेट करके बनाया गया और हवाला के जरिए पैसे का लेन-देन हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में आरोपी पक्ष अक्सर राजनीतिक बदले की भावना का आरोप लगाता है लेकिन इससे जांच के तथ्यों की गंभीरता कम नहीं हो जाती।

Delhi Liquor Case: ठोस सबूतों का दावा

CBI ने अदालत के सामने दावा किया कि इस मामले में जांच बेहद वैज्ञानिक और बारीकी से की गई है। मेहता ने कहा कि उनके पास ईमेल हैं, व्हाट्सएप चैट्स हैं, फोरेंसिक सबूत हैं और कई गवाहों के बयान हैं। यह कोई मनगढ़ंत आरोप नहीं है। उन्होंने कहा कि मैंने किसी भी एजेंसी को इतनी बारीकी से सबूत इकट्ठा करते नहीं देखा।

मेहता ने बताया कि मामले में धारा 164 के तहत कई गवाहों के बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज किए गए हैं। इन बयानों में कथित साजिश, पैसे के लेन-देन और रिश्वत के भुगतान के बारे में विस्तार से बताया गया है। धारा 164 के तहत दर्ज बयानों को विशेष महत्व दिया जाता है क्योंकि गवाह मजिस्ट्रेट के सामने पेश होता है और उससे यह पूछा जाता है कि वह किसी दबाव में तो नहीं है।

रिश्वत का पूरा हिसाब

CBI के अनुसार इस घोटाले में लोगों को दिए गए फायदों के बदले 19 करोड़ से लेकर 100 करोड़ रुपये तक की रिश्वत दी गई। इसमें से 44.50 करोड़ रुपये हवाला के माध्यम से ट्रांसफर किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि यह पैसा AAP के गोवा विधानसभा चुनाव फंड के लिए भेजा गया था। CBI ने विजय नायर का नाम भी लिया जो उस राजनीतिक दल के कम्युनिकेशन इंचार्ज बताए गए हैं।

Delhi Liquor Case: 170 मोबाइल फोन नष्ट करने का गंभीर आरोप

CBI की दलीलों में सबसे गंभीर आरोप यह रहा कि इस मामले में सबूत नष्ट करने के कई उदाहरण दर्ज किए गए हैं। मेहता ने अदालत को बताया कि इस मामले में 170 मोबाइल फोन नष्ट किए गए थे। इसके अलावा आरोपियों के मोबाइल फोन में कई महत्वपूर्ण नोट्स मिले थे लेकिन निचली अदालत ने इस संबंध में कोई आदेश नहीं सुनाया।

ट्रायल कोर्ट के आदेश पर सवाल

सॉलिसिटर जनरल ने निचली अदालत के डिस्चार्ज आदेश पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि निचली अदालत का यह आदेश आपराधिक कानून को पूरी तरह उलट रहा है। मेहता ने कहा कि 10 दिनों तक बहस होने के बाद महज कुछ दिनों में 600 पेज का फैसला आ गया। उन्होंने कहा कि त्वरित न्याय एक लक्ष्य है लेकिन इसका परिणाम अन्याय नहीं होना चाहिए।

मेहता ने यह भी स्पष्ट किया कि डिस्चार्ज का चरण पुष्टि प्राप्त करने का चरण नहीं होता। इस चरण में केवल यह देखा जाता है कि क्या ट्रायल चलाने के लिए पर्याप्त सामग्री है। उन्होंने कहा कि निचली अदालत के फैसले में बार-बार पुष्टि के अभाव का हवाला दिया गया है जबकि पुष्टि मौजूद थी और उसे नजरअंदाज कर दिया गया।

Delhi Liquor Case: हाई कोर्ट का सवाल

सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने मेहता से पूछा कि इस मामले में स्वतंत्र गवाह कौन हैं। इस पर मेहता ने गवाह संख्या 20 और होटल रिकॉर्ड्स का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी कहा कि दिनेश अरोड़ा के बयान की पुष्टि अशोक कौशिक के बयान से होती है जो रिश्वत देने वाले का PA बताया गया है।

यह मामला अभी भी दिल्ली हाई कोर्ट में विचाराधीन है और सुनवाई जारी है। अगली सुनवाई में आरोपी पक्ष अपना पक्ष रखेगा।

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