Delhi: रेखा गुप्ता सरकार का बड़ा ऐलान, ‘लखपति बिटिया योजना’ से बेटियों को मिलेगा 1 लाख रुपये
स्नातक पूरा करने पर मिलेगी पूरी राशि, पुरानी लाडली योजना होगी बंद, 1 अप्रैल से शुरू होगी नई स्कीम
Delhi: दिल्ली में रेखा गुप्ता सरकार ने अपनी पहली वर्षगांठ के अवसर पर राजधानी की बेटियों के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ‘लखपति बिटिया योजना’ का ऐलान करते हुए बताया कि इस योजना के तहत पात्र परिवारों की बेटियों को शिक्षा पूरी होने के बाद मैच्योरिटी पर 1 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। यह नई योजना 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी और इसके साथ ही पुरानी लाडली योजना को बंद कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना न केवल बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देगी बल्कि उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव भी रखेगी। सरकार इस योजना पर कुल 160 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इस घोषणा के साथ ही दिल्ली सरकार ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को एक नया आयाम देने की कोशिश की है। आइए विस्तार से समझते हैं इस योजना की खासियतें और इसके नियम-कानून।
Delhi: योजना की मुख्य विशेषताएं
‘लखपति बिटिया योजना’ के तहत दिल्ली की बेटियों को जन्म से लेकर स्नातक की पढ़ाई पूरी करने तक विभिन्न चरणों में कुल 56 हजार रुपये दिए जाएंगे। यह राशि अलग-अलग समय पर किस्तों में प्रदान की जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब बेटी की शिक्षा पूरी होकर योजना मैच्योर होगी, तो उसे 1 लाख रुपये की राशि एकमुश्त मिलेगी। यह राशि बेटी के भविष्य को सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
यह योजना सिर्फ वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना और परिवारों पर शिक्षा का आर्थिक बोझ कम करना है। योजना की रूपरेखा इस तरह बनाई गई है कि बेटियां अपनी शिक्षा बीच में न छोड़ें और स्नातक तक की पढ़ाई अवश्य पूरी करें।
पात्रता के नियम और शर्तें
इस योजना का लाभ सभी को नहीं मिलेगा। सरकार ने कुछ स्पष्ट पात्रता मानदंड निर्धारित किए हैं। सबसे पहली और महत्वपूर्ण शर्त यह है कि एक परिवार की अधिकतम दो बेटियों को ही इस योजना का लाभ मिलेगा। आर्थिक पात्रता के संबंध में, केवल उन परिवारों की बेटियां इस योजना के लिए पात्र होंगी जिनकी सालाना आय 1 लाख 20 हजार रुपये से कम या बराबर है। यह प्रावधान यह सुनिश्चित करने के लिए है कि योजना का लाभ वास्तव में जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे।
सबसे कड़ी शर्त यह है कि यदि बेटी स्नातक पूरा करने से पहले शादी कर लेती है, तो उसे योजना का एक भी पैसा नहीं मिलेगा। यह प्रावधान बाल विवाह को हतोत्साहित करने और बेटियों को शिक्षा पूरी करने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से रखा गया है। बेटी का जन्म दिल्ली में होना चाहिए और परिवार का दिल्ली में निवास प्रमाण होना आवश्यक है।
Delhi: पुरानी लाडली योजना क्यों बंद हो रही है?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पुरानी लाडली योजना को बंद करने के पीछे के कारणों को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि यदि लाडली योजना ठीक से लागू की गई होती तो यह बहुत अच्छी योजना साबित होती।
रेखा गुप्ता ने बताया कि लाडली योजना के तहत बच्चियों को अलग-अलग समय पर 36 हजार रुपये दिए जाते थे, जो मैच्योर होने के बाद दिया जाना था। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह रही कि कुल 1 लाख 86 हजार रुपये तक का पैसा लाडलियों तक पहुंच ही नहीं पाया।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पिछले एक साल में उनकी सरकार ने 30 हजार बच्चियों को ढूंढकर 90 करोड़ रुपये पहुंचाए हैं। अब 41 हजार और बच्चियों को 100 करोड़ रुपये देने जा रहे हैं। रेखा गुप्ता ने कहा कि अपनी सरकार के एक साल पूरा होने पर वे 41 हजार लाडलियों को पैसे देने वाली हैं। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजना ‘मेरी पूंजी मेरा अधिकार’ से उन्हें इस काम की प्रेरणा मिली थी।
योजना का क्रियान्वयन और समयसीमा
पुरानी लाडली योजना 31 मार्च 2026 को आधिकारिक रूप से बंद हो जाएगी। इसके ठीक अगले दिन, यानी 1 अप्रैल 2026 से नई ‘लखपति बिटिया योजना’ शुरू हो जाएगी।
नई योजना में घर की दो बेटियों को पढ़ाई पूरी करने तक अलग-अलग समय पर कुल 56-56 हजार रुपये दिए जाएंगे। यह राशि विभिन्न शैक्षणिक मील के पत्थरों पर किस्तों में दी जाएगी।
स्नातक की डिग्री पूरी करने के बाद जब योजना मैच्योर होगी, तब बेटियों को 1 लाख रुपये की राशि एकमुश्त प्रदान की जाएगी। यह राशि उनके करियर की शुरुआत या आगे की पढ़ाई के लिए बहुत उपयोगी साबित होगी। सरकार ने इस योजना के क्रियान्वयन के लिए 160 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। यह राशि दर्शाती है कि सरकार इस योजना को लेकर कितनी गंभीर है।
Delhi: योजना के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
यह योजना केवल वित्तीय सहायता योजना नहीं है, बल्कि इसके व्यापक सामाजिक और आर्थिक प्रभाव हैं। सबसे पहले, यह बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता देती है और परिवारों को बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए प्रोत्साहित करती है। शादी से पहले शिक्षा पूरी करने की अनिवार्य शर्त बाल विवाह को हतोत्साहित करेगी। यह एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुधार है जो समाज में लड़कियों की स्थिति को मजबूत करेगा।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह योजना बड़ी राहत होगी। शिक्षा का खर्च उठाना कई परिवारों के लिए बोझ बन जाता है, यह योजना उस बोझ को कम करेगी। 1 लाख रुपये की मैच्योरिटी राशि बेटियों को आत्मनिर्भर बनने में मदद करेगी। वे इस राशि का उपयोग अपने करियर की शुरुआत, उच्च शिक्षा या कौशल विकास के लिए कर सकती हैं।
चुनौतियां और समाधान
किसी भी सरकारी योजना के सफल क्रियान्वयन में चुनौतियां आती हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना होगी कि योजना का लाभ वास्तव में पात्र लाभार्थियों तक पहुंचे।
पुरानी लाडली योजना की विफलता से सीख लेते हुए, सरकार को पारदर्शी और प्रभावी वितरण तंत्र बनाना होगा। डिजिटल प्रणाली का उपयोग करके सीधे बेटियों के खातों में राशि ट्रांसफर करना बेहतर होगा। आय प्रमाण पत्र की सत्यता जांचना एक और चुनौती होगी। इसके लिए सख्त सत्यापन प्रक्रिया आवश्यक होगी।
शिक्षा पूरी होने की निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी। स्कूलों और कॉलेजों के साथ समन्वय स्थापित करना होगा।
Delhi: निष्कर्ष
दिल्ली सरकार की ‘लखपति बिटिया योजना’ बेटियों के सशक्तिकरण की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। 1 लाख रुपये की राशि और शिक्षा पर जोर इस योजना को अन्य योजनाओं से अलग बनाता है। हालांकि, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे कितनी ईमानदारी और पारदर्शिता से लागू किया जाता है। पुरानी लाडली योजना की गलतियों से सबक लेते हुए यदि इस योजना को ठीक से क्रियान्वित किया गया, तो यह दिल्ली की बेटियों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला सकती है। अब देखना यह है कि 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली यह योजना जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती है।
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