ऑयल मार्केट में हड़कंप, ब्रेंट क्रूड $103 के पार, ईरान के बातचीत से इनकार ने मचा दिया हाहाकार, भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने का खतरा

ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ा, कच्चे तेल में उछाल, भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होने का खतरा बढ़ा

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Crude Oil Price: वैश्विक तेल बाजार में एक बार फिर तूफान आ गया है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत $103 प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी $91.54 के स्तर पर पहुंच गया। महज 24 घंटे पहले शांति की उम्मीदें जग रही थीं, लेकिन ईरान के एक बड़े फैसले ने पूरी तस्वीर बदल दी। ईरान ने अमेरिका के साथ सीधी बातचीत से साफ इनकार कर दिया है, जिससे बाजार में हड़कंप मच गया है।

इस उछाल से निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ गई है। मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने की जो उम्मीदें जगी थीं, उन पर पानी फिर गया। अब सवाल यह है कि आगे तेल की कीमतें और बढ़ेंगी या नहीं और इसका भारत जैसे आयातक देशों पर क्या असर पड़ेगा।

ब्रेंट क्रूड $103.46 पर पहुंचा, 1% से ज्यादा की तेजी

26 मार्च को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 1 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड $103.46 प्रति बैरल तक चढ़ गया, जबकि पिछले कुछ दिनों में कीमतें गिरावट के साथ बंद हुई थीं। WTI क्रूड भी $91.54 के आसपास पहुंच गया।

यह उछाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले हफ्ते कीमतें $100 के नीचे आ गई थीं और शांति वार्ता की उम्मीद से बाजार थोड़ा स्थिर नजर आ रहा था। लेकिन गुरुवार को सब कुछ बदल गया।

ईरान का सीधी बातचीत से इनकार और पुराने अनुभवों का हवाला

तेल की कीमतों में इस अचानक उछाल की सबसे बड़ी वजह ईरान का अमेरिका के साथ सीधी बातचीत से इनकार है। ईरान के विदेश मंत्री ने स्पष्ट कहा कि दोनों देशों के बीच भले ही कुछ देशों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा हो, लेकिन इसे सीधी बातचीत नहीं माना जा सकता।

उन्होंने पुराने अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले भी बातचीत के दौरान हमले हुए थे, इसलिए फिलहाल कोई सीधी वार्ता करने की योजना नहीं है। ईरान का यह रुख बाजार के लिए सबसे बड़ा ट्रिगर साबित हुआ।

अमेरिका और ईरान के दावों के बीच फंसा बाजार

ईरान के इनकार के ठीक उलट अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और यह सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है। दोनों तरफ से आने वाले विरोधाभासी बयानों ने निवेशकों को पूरी तरह उलझन में डाल दिया है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक दोनों देशों के बयानों में एकरूपता नहीं आएगी, तब तक तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। यह भ्रम की स्थिति निवेशकों का भरोसा डिगा रही है।

होर्मुज जलडमरूमध्य और वैश्विक तेल आपूर्ति पर खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे विवाद में होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति सबसे महत्वपूर्ण है। दुनिया के कुल तेल सप्लाई का करीब 20 प्रतिशत इसी रास्ते से गुजरता है। अगर यहां कोई बाधा उत्पन्न होती है या तनाव बढ़ता है, तो वैश्विक सप्लाई पर भारी असर पड़ सकता है।

ईरान इस जलडमरूमध्य पर अपनी मजबूत पकड़ रखता है। ऐसे में किसी भी तरह की अस्थिरता कीमतों को और ऊपर धकेल सकती है। बाजार इस बात पर नजर रखे हुए है कि आगे क्या होता है।

पेट्रोल-डीजल की महंगाई और बढ़ता आयात बिल

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। कच्चे तेल की कीमतों में हर $1 प्रति बैरल की बढ़ोतरी से देश की आयात बिल पर करीब 8,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ता है।

अगर कीमतें $103 के ऊपर बनी रहीं तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। इससे आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ेगा और महंगाई भी प्रभावित होगी। खासकर ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और कृषि क्षेत्र पर इसका सीधा असर दिखेगा। सरकार पहले से ही तेल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए प्रयास कर रही है, लेकिन वैश्विक स्तर पर इतनी तेजी आने पर राहत पैकेज की मांग बढ़ सकती है।

क्या कच्चे तेल की कीमतें $110 का स्तर छुएंगी?

बाजार के जानकारों का कहना है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम नहीं होता, तब तक तेल की कीमतों में यह उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। अगर हालात और बिगड़ते हैं तो कीमतें $110 तक भी पहुंच सकती हैं। दूसरी ओर अगर दोनों देशों के बीच कोई सकारात्मक संकेत मिलता है तो कीमतें दोबारा नीचे आ सकती हैं। फिलहाल बाजार सतर्क मोड में है।

वर्तमान बाजार में जोखिम प्रबंधन और रणनीति

तेल की कीमतों में अनिश्चितता के बीच निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए।

  • शॉर्ट टर्म में वोलेटिलिटी ज्यादा रहेगी, इसलिए फ्यूचर्स और ऑप्शंस में सावधानी से ट्रेड करें।

  • लंबी अवधि के निवेशकों को अभी नए पोजीशन बनाने से पहले कुछ दिन इंतजार करना चाहिए।

  • भारत में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों पर नजर रखें, लेकिन जोखिम को ध्यान में रखें।

एक्सपर्ट्स की राय है कि इस समय हेजिंग स्ट्रैटेजी अपनाना फायदेमंद साबित हो सकता है।

महंगाई और ब्याज दरों में बदलाव की आशंका

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। महंगाई बढ़ने से केंद्रीय बैंक ब्याज दरों पर फिर से विचार कर सकते हैं। यूरोप और अमेरिका जैसे देशों में भी ईंधन की कीमतें बढ़ने से उपभोक्ता खर्च प्रभावित होगा। मिडिल ईस्ट का तनाव अगर लंबा खिंचा तो ग्लोबल ग्रोथ पर भी असर पड़ सकता है।

स्ट्रैटेजिक रिजर्व और आयात विविधीकरण

भारत सरकार ने पहले ही स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व को मजबूत किया है। साथ ही रूस और सऊदी अरब जैसे देशों से आयात बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार को अभी से पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में राहत देने पर विचार करना चाहिए ताकि आम आदमी पर बोझ कम पड़े।

Crude Oil Price: अनिश्चितता और सतर्कता का दौर

ईरान-अमेरिका तनाव अगर जारी रहा तो आने वाले हफ्तों में कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। भारत जैसे देशों को इस स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयार रहना होगा। आम निवेशक और उपभोक्ता दोनों को सतर्क रहना चाहिए। बाजार की नजर अब होर्मुज जलडमरूमध्य और दोनों देशों के अगले कदम पर टिकी हुई है।

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