नोरा फतेही और संजय दत्त के गाने ‘सरके चुनर तेरी’ पर विवाद गहराया, सिंगर अरमान मलिक और राष्ट्रीय अधिकार आयोग के सदस्य ने जताई कड़ी आपत्ति
अरमान मलिक और NCPCR सदस्य ने उठाए सवाल, गाना यूट्यूब से हटाया गया
Nora Fatehi controversy: बॉलीवुड में जब किसी गाने के बोल परिवार के साथ बैठकर सुनने लायक न रहें तो वह गाना नहीं, एक सामाजिक सवाल बन जाता है।
Nora Fatehi controversy: ‘सरके चुनर तेरी सरके’ गाना आखिर है क्या और किस फिल्म का हिस्सा है?
यह गाना आगामी फिल्म ‘केडी: द डेविल’ का हिस्सा है। नोरा फतेही और संजय दत्त पर फिल्माए गए इस गाने को 15 मार्च 2026 को सार्वजनिक किया गया था। गाने को आवाज दी है गायिका मंगली ने और इसके बोल रकीब आलम ने लिखे हैं। संगीत की जिम्मेदारी अर्जुन जन्या ने संभाली है। गाने में नोरा फतेही को लहंगा चोली पहने देखा जा सकता है। रिलीज के कुछ घंटों के भीतर ही इस गाने की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और देखते ही देखते विरोध का एक बड़ा सिलसिला शुरू हो गया।
Nora Fatehi controversy: गाने के बोलों पर इतना विरोध क्यों हो रहा है?
इस गाने के बोल स्पष्ट रूप से द्विअर्थी हैं और इन्हें परिवार के साथ या सार्वजनिक स्थानों पर सुनना कई लोगों को असहज करता है। सोशल मीडिया पर सैकड़ों उपयोगकर्ताओं ने यह सवाल उठाया कि इस तरह के बोलों वाले गाने को मुख्यधारा की फिल्म में कैसे शामिल किया गया और सेंसर बोर्ड ने इसे कैसे मंजूरी दी। एक उपयोगकर्ता ने लिखा कि यह गाना बसों, दुकानों और सार्वजनिक जगहों पर बजाया जाएगा और इससे महिलाओं और लड़कियों को असहजता होगी। इसे तत्काल प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।
Nora Fatehi controversy: अरमान मलिक ने इस गाने पर क्या कहा?
बॉलीवुड के जाने-माने गायक अरमान मलिक ने इस गाने पर सोशल मीडिया पर सीधी और तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि यह गाना उनकी टाइमलाइन पर दिखा और उन्होंने इसे दोबारा सुना सिर्फ यह भरोसा करने के लिए कि उन्होंने सही सुना है या नहीं। अरमान मलिक ने आगे कहा कि व्यावसायिक गीत लेखन का स्तर इस हद तक गिर जाएगा, यह देखकर दुख होता है। एक प्रतिष्ठित गायक का इस तरह खुलकर सामने आना यह बताता है कि विवाद कितना गंभीर है। अरमान मलिक को उनकी सुरीली आवाज और परिवारों में समान रूप से लोकप्रिय गानों के लिए जाना जाता है।
Nora Fatehi controversy: राष्ट्रीय अधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने क्या कदम उठाया?
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने इस गाने पर तीखी आपत्ति जताते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि कोई भी सभ्य परिवार इस गाने को साथ बैठकर नहीं देख सकता। उन्होंने यह भी कहा कि बॉलीवुड से नैतिकता की उम्मीद भले ही न हो, लेकिन सेंसर बोर्ड का इस तरह की अश्लीलता को लाइसेंस देना शर्मनाक है। उन्होंने यह भी चेताया कि इस मामले में कार्रवाई के लिए औपचारिक नोटिस जारी किया जाएगा। कानूनगो का यह बयान केवल व्यक्तिगत राय नहीं था बल्कि एक संवैधानिक संस्था के सदस्य की आधिकारिक प्रतिक्रिया थी।
Nora Fatehi controversy: नोरा फतेही और संजय दत्त कौन हैं और उनकी क्या भूमिका है?
नोरा फतेही मोरक्कन मूल की भारतीय अभिनेत्री और डांसर हैं जो अपने धमाकेदार डांस मूव्स के लिए देश और दुनिया में मशहूर हैं। ‘दिलबर’, ‘ओ साकी साकी’ और ‘करावां’ जैसे गानों से उन्होंने करोड़ों दर्शकों का दिल जीता है। संजय दत्त बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता हैं जिनका फिल्मी करियर चार दशकों से भी अधिक पुराना है। ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’, ‘वास्तव’ और ‘खलनायक’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को आज भी याद किया जाता है। दोनों की इस गाने में मौजूदगी ने इसे शुरू से ही सुर्खियों में रखा था, लेकिन विवाद ने इस सुर्खी का रंग बदल दिया।
Nora Fatehi controversy: सेंसर बोर्ड और फिल्म उद्योग की जिम्मेदारी क्या होती है?
भारत में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी CBFC की जिम्मेदारी है कि वह फिल्मों और उनके गानों की सामग्री की समीक्षा करे और यह सुनिश्चित करे कि सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित होने वाला कंटेंट सामाजिक मानकों के अनुरूप हो। फिल्म विशेषज्ञों के अनुसार, व्यावसायिक सफलता की होड़ में कई बार रचनात्मकता और जिम्मेदारी के बीच का संतुलन बिगड़ जाता है। किसी गाने के बोल केवल मनोरंजन का जरिया नहीं होते, वे सामाजिक सोच और युवा पीढ़ी की मानसिकता को भी प्रभावित करते हैं।
Nora Fatehi controversy: गाने को यूट्यूब पर प्राइवेट करने के बाद आगे क्या होगा?
सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर विरोध के बाद यूट्यूब पर इस गाने को प्राइवेट कर दिया गया है, यानी फिलहाल यह आम दर्शकों के लिए उपलब्ध नहीं है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या फिल्म निर्माता इस गाने के बोलों में बदलाव करेंगे या इसे फिल्म से पूरी तरह हटा लेंगे। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को भी इस मामले में शिकायत भेजी जा चुकी है। अगर मंत्रालय इस पर संज्ञान लेता है तो यह मामला केवल एक गाने की बहस नहीं रहेगा बल्कि भारतीय फिल्म उद्योग में कंटेंट नियमन की पूरी प्रक्रिया पर एक बड़ी नीतिगत बहस का रूप ले सकता है।
निष्कर्ष
‘सरके चुनर तेरी सरके’ विवाद एक गाने की कहानी नहीं है, यह उस बड़े सवाल की कहानी है जो बार बार उठता है कि मनोरंजन की आजादी और सामाजिक जिम्मेदारी की सीमा कहां खींची जाए। जब एक प्रतिष्ठित गायक, एक संवैधानिक संस्था के सदस्य और आम जनता एक साथ आपत्ति उठाए तो यह संकेत है कि दर्शक अब केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जिम्मेदार मनोरंजन चाहते हैं। फिल्म निर्माताओं और सेंसर बोर्ड दोनों को इस आवाज को गंभीरता से सुनना होगा।
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