शरद पवार को MVA का राज्यसभा उम्मीदवार बनाने पर सबकी मुहर, उद्धव ने भी छोड़ी जिद
कांग्रेस-उद्धव ने छोड़ी जिद, शरद पवार पर सबकी मुहर; राज्यसभा चुनाव में MVA की एकमात्र सीट पर दावा
Sharad Pawar Rajya Sabha: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। महाविकास आघाड़ी यानी MVA में राज्यसभा सीट को लेकर चल रही खींचतान आखिरकार खत्म हो गई है। सूत्रों के अनुसार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार को MVA का राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने पर सभी घटक दलों ने अपनी सहमति दे दी है। कांग्रेस और शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट दोनों ने शरद पवार के नाम पर हामी भर दी है।
Sharad Pawar Rajya Sabha: एक ही सीट पर तीन दलों की थी नजर
दरअसल महाराष्ट्र विधानसभा में मौजूदा सीटों की संख्या के आधार पर MVA के पास केवल एक ही ऐसी राज्यसभा सीट है जिस पर जीत सुनिश्चित मानी जा रही है। इस एक सीट पर एनसीपी शरद पवार गुट, शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट और कांग्रेस तीनों की नजर थी। तीनों दल इस सीट को अपने खाते में लेना चाहते थे, जिसके चलते गठबंधन के भीतर असमंजस की स्थिति बन गई थी। कई दिनों तक आंतरिक वार्ता चलती रही लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। अंत में सभी पार्टियों ने वरिष्ठता और अनुभव को देखते हुए शरद पवार के नाम पर सहमति जताई।
Sharad Pawar Rajya Sabha: आदित्य ठाकरे ने किया था दावा
सोमवार की सुबह तक स्थिति अलग थी। शिवसेना उद्धव गुट के नेता और युवा नेता आदित्य ठाकरे ने खुलकर दावा किया था कि यह सीट उनकी पार्टी को मिलनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि विधानसभा में संख्या के लिहाज से शिवसेना उद्धव गुट की स्थिति कांग्रेस से बेहतर है, इसलिए सीट पर उनका दावा मजबूत है। आदित्य ठाकरे ने यह भी कहा था कि MVA में किसी तरह का कोई गतिरोध नहीं है और सब कुछ आपसी सहमति से तय होगा। हालांकि उन्होंने अपनी पार्टी की दावेदारी छोड़ने के कोई संकेत नहीं दिए थे।
दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी सुबह तक इस सीट पर अपना हक जताया था। पार्टी के नेताओं ने कहा था कि बातचीत जारी है और जल्द ही कोई फैसला होगा। इस पूरी उठापटक के बीच शरद पवार का नाम एक ऐसे विकल्प के रूप में उभरा जिस पर सभी को एतराज नहीं था।
Sharad Pawar Rajya Sabha: पांच मार्च है नामांकन की अंतिम तारीख
राज्यसभा की सात सीटों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख पांच मार्च निर्धारित की गई है। यानी अब MVA के पास बेहद कम समय बचा है। चुनाव 16 मार्च को होंगे और उसी दिन मतगणना भी की जाएगी। ऐसे में शरद पवार के नाम पर जल्द औपचारिक घोषणा होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि नामांकन की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।
Sharad Pawar Rajya Sabha: शरद पवार का नाम क्यों बना सर्वसम्मति का आधार
शरद पवार महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे अनुभवी और वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं। उनका राजनीतिक करियर पांच दशकों से भी अधिक लंबा है। वे कई बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और केंद्र में कृषि मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद भी संभाल चुके हैं। इसके अलावा वे भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के भी अध्यक्ष रह चुके हैं। उनकी राजनीतिक पकड़ और सामाजिक प्रभाव को देखते हुए MVA के सभी घटक दल उनके नाम पर राजी हो गए। गठबंधन की राजनीति में जब कोई एक नाम सबको स्वीकार्य हो तो उसे ही प्राथमिकता दी जाती है और शरद पवार इस कसौटी पर खरे उतरे।
Sharad Pawar Rajya Sabha: कांग्रेस ने अन्य राज्यों में भी लिया फैसला
इस बीच कांग्रेस पार्टी ने अन्य राज्यों में राज्यसभा उम्मीदवारों को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की दूसरी सीट पर स्थानीय उम्मीदवारों को राज्यसभा टिकट देने का निर्णय किया है। इससे साफ है कि पार्टी अपने प्रदेश संगठनों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। स्थानीय नेताओं को मौका देने से जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का मनोबल भी बढ़ेगा।
Sharad Pawar Rajya Sabha: महाराष्ट्र में MVA की मौजूदा स्थिति
पिछले विधानसभा चुनाव में महायुति यानी भाजपा, शिवसेना एकनाथ शिंदे गुट और एनसीपी अजित पवार गुट के गठबंधन ने जबरदस्त बहुमत हासिल किया था। इस जीत के बाद MVA की विधानसभा में स्थिति काफी कमजोर हो गई। इसी वजह से राज्यसभा में भी MVA केवल एक सीट पर ही जीत का दावा कर सकती है। बाकी सीटें सत्तारूढ़ महायुति के पास जाने की पूरी संभावना है। ऐसे में MVA के लिए यह एकमात्र सीट बेहद अहम है। पार्टी को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके सभी विधायक एकजुट होकर वोट करें और किसी तरह की क्रॉस वोटिंग न हो।
Sharad Pawar Rajya Sabha: राज्यसभा चुनाव का महत्व और आगे की राह
राज्यसभा देश की संसद का उच्च सदन है और यहां पहुंचना किसी भी नेता के लिए बड़ी उपलब्धि होती है। शरद पवार जैसे अनुभवी नेता के राज्यसभा में होने से MVA को केंद्रीय राजनीति में एक मजबूत आवाज मिलेगी। पवार अपने तीखे और तथ्यपरक भाषणों के लिए जाने जाते हैं और संसद में उनकी उपस्थिति विपक्ष के लिए फायदेमंद साबित होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से MVA के भीतर एकता का संदेश भी जाएगा।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नामांकन की औपचारिक प्रक्रिया कब और कैसे होती है। पांच मार्च की समयसीमा को देखते हुए MVA को जल्द से जल्द कागजी कार्रवाई पूरी करनी होगी। शरद पवार की उम्मीदवारी की आधिकारिक घोषणा होते ही महाराष्ट्र की सियासत में नई हलचल देखने को मिल सकती है। फिलहाल गठबंधन के भीतर जो सहमति बनी है वह MVA के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
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