सरकारी कार्यक्रमों में अब अनिवार्य होगा पूरा ‘वंदे मातरम्’: राष्ट्रगान के बाद बजेंगे सभी 6 छंद, नए दिशानिर्देश जारी
सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगान के बाद पूरे 6 छंद बजेंगे, ध्यान मुद्रा में खड़े रहना जरूरी
Vande Mataram: केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी किए हैं। अब सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों, कॉलेजों, पद्म पुरस्कार समारोहों, राष्ट्रपति-राज्यपाल के कार्यक्रमों और तिरंगा फहराने के मौकों पर ‘वंदे मातरम्’ के पूरे छह छंद बजाना अनिवार्य होगा। यह गीत राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के तुरंत बाद बजाया जाएगा। मौजूद सभी लोगों को गीत के दौरान ध्यान मुद्रा में खड़े रहना होगा – ठीक वैसे ही जैसे राष्ट्रगान के समय होता है।
हालांकि यह नियम सिनेमा हॉल में फिल्मों के प्रदर्शन के दौरान लागू नहीं होगा। गृह मंत्रालय की ओर से जारी इन दिशानिर्देशों का मुख्य उद्देश्य स्वतंत्रता संग्राम के इस गीत को उसकी मूल संपूर्णता के साथ पुनः स्थापित करना है।
Vande Mataram: क्यों वापस लाए जा रहे हैं छहों छंद?
बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 में ‘वंदे मातरम्’ लिखा था। यह गीत 1882 में उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में प्रकाशित हुआ। मूल रूप से इसमें कुल छह छंद हैं। शुरुआती दो छंद भारत को माँ के रूप में चित्रित करते हैं, जबकि बाद के छंदों में दुर्गा, कमला (लक्ष्मी) और सरस्वती जैसी हिंदू देवियों का जिक्र है।
1937 में कांग्रेस के फैजपुर अधिवेशन में सिर्फ पहले दो छंदों को ही राष्ट्रगीत के रूप में अपनाया गया था। इसका कारण था कि कुछ मुस्लिम सदस्यों को बाद के छंदों में देवियों के उल्लेख से आपत्ति थी। अब केंद्र सरकार ने फैसला लिया है कि सरकारी आयोजनों में गीत के पूरे छह छंद ही बजेंगे। पूरा गीत लगभग 3 मिनट 10 सेकंड लंबा होता है।
Vande Mataram: किन-किन कार्यक्रमों में अनिवार्य होगा ‘वंदे मातरम्’?
गृह मंत्रालय के नए दिशानिर्देशों के अनुसार निम्नलिखित सभी अवसरों पर ‘वंदे मातरम्’ के पूरे छह छंद बजाना अनिवार्य होगा:
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राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति या राज्यपाल के किसी भी कार्यक्रम में उनके आगमन और प्रस्थान के समय
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राष्ट्रपति या राज्यपाल के भाषण से पहले और बाद में
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पद्म पुरस्कार, गैलेंट्री अवॉर्ड, अन्य नागरिक सम्मान समारोहों में
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तिरंगा फहराने के सभी सरकारी अवसरों पर
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सभी सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों के प्रमुख समारोहों में
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गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और अन्य राष्ट्रीय पर्वों के मुख्य समारोहों में
जब गीत बजाया या गाया जाएगा, तब मौजूद सभी लोग ध्यान मुद्रा में खड़े रहेंगे। कोई भी व्यक्ति बैठा नहीं रह सकेगा।
Vande Mataram: पूरे छह छंदों का संक्षिप्त अर्थ
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प्रथम छंद – भारत को सुजलां-सुफलां, शस्य-श्यामला, मलयज-शीतल माता के रूप में वर्णित करता है।
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द्वितीय छंद – कोटि-कोटि कंठों से गूंजती माँ की शक्ति और रिपु-दल वारिणी (शत्रुओं का नाश करने वाली) माता का गुणगान।
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तृतीय छंद – माँ को विद्या, धर्म, हृदय, मर्म, प्राण, शक्ति और भक्ति का स्वरूप बताता है।
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चतुर्थ छंद – माँ को दुर्गा, कमला और वाणी के रूप में नमन करता है।
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पंचम छंद – श्यामला, सरला, सुस्मिता, भूषिता धरणी-भरणी माता का वर्णन।
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षष्ठ छंद – माँ को शक्ति का मूल रूप बताते हुए बार-बार वंदन।
ये छंद मिलकर भारत माता की पूर्ण छवि प्रस्तुत करते हैं।
Vande Mataram: वंदे मातरम् की ऐतिहासिक यात्रा
बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 में यह गीत लिखा था। 1882 में ‘आनंदमठ’ उपन्यास में प्रकाशित हुआ। स्वतंत्रता संग्राम में यह गीत बहुत लोकप्रिय हुआ। 1905 के बंग-भंग आंदोलन में इसे बड़े पैमाने पर गाया गया। 1937 में कांग्रेस ने सिर्फ पहले दो छंदों को अपनाया। 1950 में राष्ट्रगान के रूप में ‘जन गण मन’ को चुना गया, लेकिन ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगीत का दर्जा मिला।
अब केंद्र सरकार ने सरकारी आयोजनों में पूरे छह छंदों को अनिवार्य करने का फैसला लिया है। यह कदम स्वतंत्रता संग्राम के गीत को उसकी मूल शक्ति के साथ पुनः स्थापित करने की दिशा में उठाया गया है।
Vande Mataram: क्या कहते हैं दिशानिर्देश?
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‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रगान के तुरंत बाद बजाया जाएगा
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सभी लोग ध्यान मुद्रा में खड़े रहेंगे
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सिनेमा हॉल में फिल्मों के दौरान यह नियम लागू नहीं होगा
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सभी सरकारी आयोजनों, स्कूलों और राष्ट्रीय पर्वों पर अनिवार्य
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पूरे छह छंद बजाए जाएंगे (लगभग 3 मिनट 10 सेकंड)
ये दिशानिर्देश तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं। सभी सरकारी विभागों, स्कूलों और संस्थानों को इनका पालन करना अनिवार्य है।
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