ब्रज की होली 2026 का पूरा कैलेंडर,- लड्डू से लेकर लठमार तक, जानें कब और कहां खेली जाएगी होली

24 फरवरी से शुरू लड्डू होली, 25-26 फरवरी लठमार, 27 फरवरी श्री कृष्ण जन्मस्थान, 4 मार्च धूलेंदी

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Mathura-Vrindavan Holi: भगवान श्रीकृष्ण की नगरी ब्रज में होली का त्यौहार केवल एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह एक पूरा पर्व है जो कई दिनों तक अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है। राधा-कृष्ण की पावन भूमि पर होली केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति और आनंद का अद्भुत संगम है।

Mathura-Vrindavan Holi: ब्रज होली का विस्तृत कैलेंडर 2026

ब्रज में विभिन्न स्थानों पर होने वाले आयोजनों की सूची इस प्रकार है:

  • 24 फरवरी – लड्डू होली (बरसाना): श्रीजी मंदिर परिसर में रंगों की जगह लड्डुओं से होली खेली जाती है।

  • 25 फरवरी – लठमार होली (बरसाना): नंदगांव के हुरियारे बरसाना आते हैं और गोपियां उन पर लाठियों से प्रहार करती हैं।

  • 26 फरवरी – लठमार होली (नंदगांव): बरसाना की गोपियां नंदगांव आती हैं और यहां के पुरुषों के साथ होली खेलती हैं।

  • 27 फरवरी – श्री कृष्ण जन्मस्थान होली: मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर परिसर में विशेष होली समारोह।

  • 27 फरवरी – रंग होली (वृंदावन): बांके बिहारी, राधा वल्लभ और निधिवन जैसे मंदिरों में रंग और फूलों की होली।

  • 1 मार्च – छड़ीमार होली (गोकुल): गोकुल के राव जी मंदिर में महिलाएं और पुरुष छड़ियों और ढालों के साथ होली खेलते हैं।

  • 2 मार्च – देवकीनंदन की प्रीकंजू मंदिर में होली: मथुरा के प्रीकंजू मंदिर में भव्य और दिव्य आयोजन।

  • 3 मार्च – द्वारिकाधीश मंदिर होली: मथुरा के द्वारिकाधीश मंदिर में भगवान को गुलाल अर्पित की जाती है।

  • 3 मार्च – चतुर्वेदी समाज का डोला: मथुरा की परंपरागत होली में चतुर्वेदी समाज द्वारा निकाला जाने वाला शहर भ्रमण।

  • 4 मार्च (सुबह 4 बजे) – फालेन का पांडा: होलिका दहन के समय जलती हुई होली से फालेन का पांडा निकलने की साहसिक परंपरा।

  • 4 मार्च – धूलेंदी: मुख्य होली का दिन, जब पूरा ब्रज क्षेत्र सूखे रंगों और गुलाल में सराबोर हो जाता है।

  • 5 मार्च – हुरंगा बलदेव: ब्रज की होली का समापन दाऊजी (बलदेव) में कीचड़ और गोबर की पारंपरिक होली के साथ।

Mathura-Vrindavan Holi: ब्रज की होली क्यों है इतनी खास?

  • धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व: यह भगवान कृष्ण की लीलास्थली है। यहाँ की होली दिव्य लीलाओं का पुनरावलोकन है।

  • प्रेम भक्ति का उत्सव: राधा-कृष्ण का प्रेम यहाँ की संस्कृति का केंद्र है।

  • विविधता: लड्डू, लठमार, फूलों की होली और हुरंगा जैसी विविधता इसे अनूठा बनाती है।

  • सांस्कृतिक धरोहर: सदियों पुरानी परंपराएं और रीति-रिवाज यहाँ आज भी जीवित हैं।

Mathura-Vrindavan Holi: पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

विषय सुझाव
आवास होटल और गेस्ट हाउस की बुकिंग महीनों पहले से कर लें।
सुरक्षा भीड़ में कीमती वस्तुओं का ध्यान रखें और समूह में रहें।
कपड़े पुराने और सफेद कपड़े पहनें; लठमार होली में सिर की सुरक्षा का ध्यान रखें।
रंग रासायनिक रंगों से बचें और केवल प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें।
समय प्रत्येक कार्यक्रम स्थल पर निर्धारित समय से पहले पहुंचें।

निष्कर्ष: ब्रज की होली केवल एक त्यौहार नहीं – यह एक अनुभव है, एक भावना है और एक आध्यात्मिक यात्रा है। यहाँ की होली में शामिल होना जीवन का एक अविस्मरणीय अनुभव है।

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