सुप्रीम कोर्ट में CJI का गुस्सा फटा! बेकार PIL पर वकील को ऐसी सुनाई कि सब देखते रह गए
CJI सूर्यकांत ने शराब-तामसिक भोजन वाली PIL पर वकील को फटकार लगाई — "आधी रात को ड्राफ्ट करते हो?", खराब ड्राफ्टिंग पर कड़ी चेतावनी, भारी जुर्माना की धमकी
Supreme Court news: देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक अजीबोगरीब मामला सामने आया, जिसने कोर्ट के माहौल को पल भर में बदल दिया। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत एक ऐसी जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान इतने नाराज हो गए कि उन्होंने याचिका दायर करने वाले वकील को खुले कोर्ट में कड़ी फटकार लगा दी। यह मामला शराब की तय मात्रा तय करने और तामसिक भोजन पर नियम बनाने से जुड़ी एक PIL का था, जिसे CJI ने न केवल बेबुनियाद बताया बल्कि याचिकाकर्ता को भविष्य में भारी जुर्माने की भी चेतावनी दे डाली।
Supreme Court news: CJI ने पूछा, “आधी रात को पिटीशन ड्राफ्ट करते हो क्या?”
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने जो बात कही, वह पूरे कोर्टरूम में गूंज गई। उन्होंने याचिकाकर्ता वकील की ओर देखते हुए तीखे लहजे में कहा, “आधी रात को यह सब पिटीशन ड्राफ्ट करते हो क्या?” यह टिप्पणी इसलिए और भी अहम हो जाती है क्योंकि याचिका में जो मांगें उठाई गई थीं, वे न तो कानूनी दृष्टि से स्पष्ट थीं और न ही संवैधानिक रूप से प्रासंगिक। CJI ने इसे सीधे खराब ड्राफ्टिंग का नमूना करार दिया। अदालत ने यह भी कहा कि अगर याचिका दायर करने वाला शख्स वकील नहीं होता, तो उस पर मोटा जुर्माना लगाया जाता। यह बात सुनकर कोर्ट में मौजूद सभी लोग सतर्क हो गए।
Supreme Court news: याचिका में क्या था?
इस PIL को एक वकील ने खुद याचिकाकर्ता के रूप में दाखिल किया था। याचिका में मुख्य रूप से तीन मांगें रखी गई थीं। पहली मांग यह थी कि शराब पीने की एक निश्चित मात्रा तय की जाए और उसे कानूनी रूप से अनिवार्य किया जाए। दूसरी मांग में तामसिक भोजन यानी मांस, मछली आदि के सेवन पर सरकारी नियम बनाने की अपील की गई थी। इसके अलावा याचिका में संपत्ति पंजीकरण से जुड़े कुछ मुद्दों का भी जिक्र था, जो इस PIL के विषय से बिल्कुल अलग और असंबंधित प्रतीत होते थे। CJI की अध्यक्षता वाली पीठ ने इन सभी मांगों को गंभीरता से लेने से इनकार कर दिया।
Supreme Court news: बेंच ने आदेश में क्या लिखा?
CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने अपने आदेश में बेहद सख्त भाषा का इस्तेमाल किया। आदेश में लिखा गया कि यह याचिका बिना दिमाग लगाए दाखिल करने का एक और ताजा उदाहरण है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि याचिका में की गई मांगें बेबुनियाद हैं, अस्पष्ट हैं और इसलिए इन्हें खारिज किया जाता है। पीठ ने यह भी जोड़ा कि यह याचिका खराब ड्राफ्टिंग का एक जीवंत उदाहरण है। हालांकि इस बार अदालत ने कोई आर्थिक जुर्माना नहीं लगाया, लेकिन चेतावनी बिल्कुल साफ थी। अदालत ने कहा कि अगर भविष्य में इसी तरह की कोई याचिका फिर से दाखिल की गई, तो भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
Supreme Court news: “बिना सोचे-समझे याचिकाएं और वकीलों की दुकानें”
CJI ने यह भी जोड़ा कि ऐसे वकीलों ने कई तरह की “दुकानें” चला रखी हैं जहां बिना सोचे-समझे याचिकाएं तैयार की जाती हैं और सुप्रीम कोर्ट पर अनावश्यक बोझ डाला जाता है। सीजेआई का यह रुख साफ संकेत था कि सुप्रीम कोर्ट अब बेकार और अधूरी याचिकाओं को लेकर किसी भी तरह की नरमी बरतने के मूड में नहीं है। अदालत ने यह जरूर कहा कि याचिकाकर्ता चाहे तो कानून के अनुसार संबंधित सरकारी अधिकारियों से संपर्क कर सकता है। यानी अगर उनकी कोई वास्तविक शिकायत है, तो उसके लिए उचित मंच पर जाना चाहिए।
Supreme Court news: सुप्रीम कोर्ट पर बढ़ता मुकदमों का बोझ
यह पहली बार नहीं है जब सुप्रीम कोर्ट ने बेकार PIL पर नाराजगी जताई हो। देश की सर्वोच्च अदालत पहले से ही लाखों लंबित मामलों के बोझ तले दबी हुई है। ऐसे में जब कोई वकील या आम नागरिक बिना किसी ठोस आधार के PIL दाखिल करता है, तो इससे न केवल कोर्ट का समय बर्बाद होता है बल्कि उन वास्तविक मामलों की सुनवाई में भी देरी होती है, जिनमें लोगों को त्वरित न्याय की जरूरत होती है। CJI का यह रुख इसी दिशा में एक मजबूत संदेश है। वे लगातार यह स्पष्ट करते रहे हैं कि PIL एक अहम कानूनी औजार है, लेकिन इसका इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।
Supreme Court news: याचिकाकर्ता और कानून के जानकारों के लिए सबक
यह फैसला उन सभी लोगों के लिए एक सबक है जो बिना तैयारी के, बिना किसी कानूनी आधार के, सीधे देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटा देते हैं। CJI का यह कड़ा संदेश आने वाले समय में बेवजह PIL दाखिल करने की प्रवृत्ति पर लगाम लगाने में मददगार साबित हो सकता है। इसे व्यक्तिगत प्रचार या बेतुकी मांगों के लिए इस्तेमाल करना न्यायिक व्यवस्था के साथ अन्याय है। यह खबर बार एंड बेंच और सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर आधारित है।
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