चारधाम यात्रा होगी आसान: ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक सीधी ट्रेन, 40 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट पर तेज हो रहा काम
40 हजार करोड़ प्रोजेक्ट तेज, 99 किमी सुरंग पूरी, कर्णप्रयाग तक सीधी ट्रेन, चारधाम यात्रा सुगम
Railway Update: उत्तराखंड के पवित्र चारधाम की यात्रा करने का सपना देखने वाले श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी है। जल्द ही बुजुर्ग और शारीरिक रूप से कमजोर श्रद्धालुओं को दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर लंबा और थकाऊ बस-टैक्सी का सफर नहीं करना पड़ेगा। भारतीय रेलवे की महत्वाकांक्षी चारधाम रेल परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है।
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में इस परियोजना को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की और बताया कि ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेल कनेक्टिविटी की दिशा में काफी प्रगति हो चुकी है। यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक है।
Railway Update: 40 हजार करोड़ से अधिक का निवेश
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया:
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कुल लागत: उत्तराखंड में 40,384 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली तीन नई रेल लाइनों को मंजूरी प्रदान की गई है।
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परियोजना की लंबाई: इन परियोजनाओं की कुल लंबाई 216 किलोमीटर है। अब तक इनमें से 16 किलोमीटर का हिस्सा चालू हो चुका है।
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व्यय: मार्च 2025 तक इन परियोजनाओं पर 19,898 करोड़ रुपये का व्यय हो चुका है।
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विस्तार: गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ तक रेल संपर्क के विस्तार के लिए आवश्यक सर्वेक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है।
Railway Update: किन शहरों और धार्मिक स्थलों को मिलेगा लाभ
यह महत्वाकांक्षी रेल परियोजना उत्तराखंड के पांच प्रमुख जिलों से होकर गुजरेगी:
देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली।
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धार्मिक जुड़ाव: यह रेल लाइन देवप्रयाग और कर्णप्रयाग जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों को ऋषिकेश और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सीधे रेल संपर्क के माध्यम से जोड़ेगी।
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सुविधा: कर्णप्रयाग से आगे केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा अपेक्षाकृत आसान हो जाएगी। रेल संपर्क उपलब्ध होने से यात्रा का समय और खर्च दोनों में भारी कमी आएगी।
Railway Update: सुरंगों का विशाल नेटवर्क
पहाड़ी क्षेत्र की कठिन भूगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए इस परियोजना का अधिकांश मार्ग सुरंगों के माध्यम से बनाया जा रहा है:
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मुख्य सुरंगें: परियोजना में कुल 104 किलोमीटर लंबाई की 16 मुख्य सुरंगें शामिल हैं, जिनमें से 99 किलोमीटर का कार्य पूर्ण हो चुका है।
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एस्केप सुरंगें: सुरक्षा के लिए लगभग 98 किलोमीटर लंबाई की 12 एस्केप सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें से 94 किलोमीटर का काम पूरा हो गया है।
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सुरक्षा: सुरंगों को भूकंप प्रतिरोधी बनाया जा रहा है और आपातकालीन स्थितियों के लिए विशेष सुरक्षा प्रणालियां स्थापित की जा रही हैं।
Railway Update: श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को लाभ
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सुलभ दर्शन: वृद्ध और शारीरिक रूप से अक्षम लोग जो दुर्गम पहाड़ी रास्तों के कारण हिचकिचाते थे, अब आराम से पवित्र स्थलों के दर्शन कर सकेंगे।
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आर्थिक विकास: स्थानीय पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र का समग्र विकास होगा।
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बुनियादी सुविधाएं: कृषि उत्पादों की बाजार तक पहुंच आसान होगी और शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच में सुधार होगा।
निष्कर्ष
चारधाम रेल परियोजना केवल एक रेल लाइन नहीं है, बल्कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और सुविधा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके पूर्ण होने से हिमालय के दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का जीवन आसान हो जाएगा और धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलेगी।
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