Chaitra Purnima 2026: चैत्र पूर्णिमा पर हनुमान जयंती का महासंयोग, 1 अप्रैल को व्रत और 2 अप्रैल को स्नान-दान, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा की प्रामाणिक विधि
1 अप्रैल को व्रत और 2 अप्रैल को स्नान दान, हनुमान जयंती के साथ विशेष महत्व बढ़ा
Chaitra Purnima 2026: इस साल चैत्र पूर्णिमा दो दिन मनाई जाएगी। 1 अप्रैल को व्रत रखा जाएगा और 2 अप्रैल को स्नान-दान का शुभ मुहूर्त रहेगा। इस पूर्णिमा पर भगवान विष्णु, हनुमान जी और चंद्र देव की पूजा का विशेष महत्व है। यहां जानें पूरी पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और व्रत के नियम।
हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को सर्वाधिक पवित्र तिथियों में से एक माना जाता है और चैत्र मास की पूर्णिमा इनमें सबसे विशेष होती है। इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। इस वर्ष यह तिथि और भी खास है क्योंकि चैत्र पूर्णिमा के दिन ही हनुमान जयंती का पर्व भी मनाया जाएगा।
क्यों दो दिनों तक रहेगा पूर्णिमा का प्रभाव? उपवास और दान-पुण्य के लिए अलग-अलग दिन निर्धारित
इस वर्ष चैत्र पूर्णिमा तिथि का विस्तार दो दिनों तक है। 1 अप्रैल 2026 को व्रत रखने का विधान रहेगा जबकि 2 अप्रैल को पवित्र नदियों या घर पर स्नान और दान-पुण्य का शुभ मुहूर्त रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब पूर्णिमा तिथि दो दिनों तक व्याप्त रहती है तो उपवास एक दिन और स्नान-दान दूसरे दिन किया जाता है।
ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा की किरणें सबसे अधिक शक्तिशाली होती हैं और इस दिन किया गया जप, तप और दान कई गुना फल देता है।
सुबह 06:11 से शुरू होगा पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय; नोट करें दिन के चारों विशेष मुहूर्त
इस वर्ष चैत्र पूर्णिमा पर पूजा के चार शुभ मुहूर्त निर्धारित हैं। पहला मुहूर्त सुबह 06:11 बजे से 09:18 बजे तक रहेगा। दूसरा शुभ समय सुबह 10:52 बजे से दोपहर 12:25 बजे तक है। तीसरा मुहूर्त शाम 05:05 बजे से 06:39 बजे तक और चौथा एवं अंतिम मुहूर्त रात 08:05 बजे से 09:32 बजे तक रहेगा।
इनमें से प्रातःकाल का पहला मुहूर्त सर्वाधिक शुभ माना जाता है क्योंकि इस समय पूजा-अर्चना करने से मन की एकाग्रता अधिक रहती है और वातावरण की शुद्धता भी उच्च होती है।
सत्यनारायण भगवान और बजरंगबली की एक साथ कृपा; संकटों से मुक्ति दिलाएगा यह दुर्लभ संयोग
चैत्र पूर्णिमा के दिन मुख्य रूप से भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप की पूजा का विधान है। इसके अलावा इस दिन शिव-पार्वती और चंद्र देव की आराधना भी अत्यंत फलदायी मानी जाती है। इस वर्ष हनुमान जयंती भी इसी तिथि पर पड़ रही है इसलिए हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व और भी बढ़ गया है।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन इन सभी देवताओं की पूजा एक साथ करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
संकल्प से लेकर आरती तक; हनुमान जी को चोला चढ़ाने और कथा श्रवण का विशेष महत्व
चैत्र पूर्णिमा के दिन सबसे पहले प्रातःकाल स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें। संकल्प में अपना नाम, गोत्र और व्रत का उद्देश्य बोलते हुए जल छोड़ें। इसके पश्चात पूजा स्थान को शुद्ध करके भगवान सत्यनारायण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। उन्हें पीले फूल, ताजे फल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें। विधिवत पूजन के बाद भगवान सत्यनारायण की कथा का श्रवण अवश्य करें।
हनुमान जयंती होने के कारण इस दिन हनुमान जी की पूजा भी जरूर करें। इसके लिए चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर हनुमान जी को चोला चढ़ाएं और हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें। संध्याकाल में पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना भी इस दिन का महत्वपूर्ण अनुष्ठान है।
चंद्रोदय और अर्घ्य विधि: “ओम सोमाय नमः” मंत्र के साथ करें चंद्र पूजन; व्रत पारण और सात्विकता के कड़े नियम
रात में जब आकाश में चंद्रमा दिखने लगें तब दूध मिले जल से चंद्र देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय “ओम सोमाय नमः” या “ओम चंद्राय नमः” मंत्र का उच्चारण करें। इसके बाद चंद्रमा को धूप और दीप दिखाएं और फिर व्रत खोल लें।
पूर्णिमा के दिन सात्विक भोजन करने का विधान है। लहसुन, प्याज और मांसाहार का परित्याग इस दिन अनिवार्य माना जाता है। व्रती को दिनभर मन में सकारात्मक विचार रखने चाहिए और किसी से भी कटु वचन नहीं बोलने चाहिए।
अक्षय पुण्य का आधार: अन्न, वस्त्र और सफेद वस्तुओं के दान से चमकेगा भाग्य; चंद्र देव की मिलेगी विशेष कृपा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा तिथि पर किया गया दान सामान्य दिनों की तुलना में अनेक गुना अधिक पुण्यफल देता है। इस दिन विशेष रूप से अन्नदान, वस्त्रदान और जलदान को श्रेष्ठ माना जाता है। इसके अलावा सफेद तिल, चावल, दूध और चीनी का दान भी इस दिन विशेष फलदायी होता है।
गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराने से चंद्र देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में धन-धान्य की कमी नहीं रहती। ब्राह्मणों को भोजन कराना और उन्हें दक्षिणा देना भी इस दिन का महत्वपूर्ण धार्मिक कर्म माना जाता है।
Chaitra Purnima 2026: श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाएं चैत्र पूर्णिमा और हनुमान जन्मोत्सव
चैत्र पूर्णिमा 2026 इस वर्ष अत्यंत विशेष है क्योंकि इस पर हनुमान जयंती का संयोग भी बन रहा है। 1 अप्रैल को व्रत और 2 अप्रैल को स्नान-दान के साथ इस पर्व को पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से मनाएं। सुबह के पहले शुभ मुहूर्त में पूजा आरंभ करें, सत्यनारायण कथा सुनें, हनुमान जी को चोला चढ़ाएं और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का समापन करें। यह दिन आपके जीवन में नई ऊर्जा, सुख और समृद्धि लेकर आए।
अस्वीकरण: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
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