Chaitra Navratri Ashtami 2026: 26 मार्च को है महाअष्टमी, जानें चैत्र नवरात्रि अष्टमी का शुभ मुहूर्त, कन्या पूजन विधि, मां महागौरी की पूजा और व्रत के नियम

26 मार्च को चैत्र नवरात्रि अष्टमी, जानें पूजा मुहूर्त, कन्या पूजन विधि और मां महागौरी की पूजा का महत्व।

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Chaitra Navratri Ashtami 2026 इस बार 26 मार्च को मनाई जाएगी। चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च 2026 तक चलेगी। चैत्र नवरात्रि अष्टमी के दिन नवरात्रि के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा होती है जो सौभाग्य की देवी मानी जाती हैं। इस दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है। पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 6:20 से 7:52 बजे तक रहेगा। अगर आप भी चैत्र नवरात्रि अष्टमी की तैयारी कर रहे हैं तो यह लेख आपके लिए बेहद जरूरी है।

Chaitra Navratri Ashtami 2026 – तिथि और शुभ मुहूर्त

Chaitra Navratri Ashtami 2026 Date and Muhurt Time Know Here
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चैत्र नवरात्रि अष्टमी का व्रत और पूजन 26 मार्च 2026 को किया जाएगा। अष्टमी तिथि 25 मार्च को दोपहर 1:50 बजे से शुरू होकर 26 मार्च को सुबह 11:48 बजे तक रहेगी।

मुहूर्त समय
अष्टमी तिथि प्रारंभ 25 मार्च दोपहर 1:50 बजे
अष्टमी तिथि समाप्ति 26 मार्च सुबह 11:48 बजे
प्रथम पूजा मुहूर्त सुबह 6:20 से 7:52 बजे तक
द्वितीय पूजा मुहूर्त सुबह 10:56 से दोपहर 2:01 बजे तक
सायं पूजा मुहूर्त शाम 5:06 से रात 9:33 बजे तक
कन्या पूजन 26 मार्च प्रातःकाल
व्रत पारण 26 मार्च सुबह 11:48 के बाद

उदयातिथि के अनुसार 26 मार्च को ही चैत्र नवरात्रि अष्टमी का व्रत और कन्या पूजन किया जाएगा।

चैत्र नवरात्रि 2026 का पूरा कैलेंडर

चैत्र नवरात्रि अष्टमी को सही परिप्रेक्ष्य में समझने के लिए पूरे नवरात्रि का कैलेंडर जानना जरूरी है।

दिन तारीख देवी स्वरूप विशेष
प्रथमा 19 मार्च मां शैलपुत्री घटस्थापना
द्वितीया 20 मार्च मां ब्रह्मचारिणी व्रत आरंभ
तृतीया 21 मार्च मां चंद्रघंटा सौभाग्य पूजन
चतुर्थी 22 मार्च मां कूष्मांडा स्वास्थ्य पूजन
पंचमी 23 मार्च मां स्कंदमाता संतान सुख
षष्ठी 24 मार्च मां कात्यायनी शत्रु नाश
सप्तमी 25 मार्च मां कालरात्रि तंत्र पूजन
अष्टमी 26 मार्च मां महागौरी कन्या पूजन
नवमी 27 मार्च मां सिद्धिदात्री हवन, समापन

चैत्र नवरात्रि अष्टमी का महत्व क्यों है विशेष?

चैत्र नवरात्रि अष्टमी को महाअष्टमी भी कहा जाता है। यह नवरात्रि के नौ दिनों में सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक है।

देवी भागवत पुराण और मार्कंडेय पुराण में नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि को अत्यंत फलदायी बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन देवी की उपासना करने से सभी संकट दूर होते हैं और नवरात्रि के नौ दिनों की पूजा सफल हो जाती है।

चैत्र नवरात्रि अष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा होती है। महागौरी को सौभाग्य की देवी माना जाता है। मान्यता है कि इनकी पूजा से अविवाहित कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है और विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है।

इस दिन अपनी कुल देवी का पूजन भी किया जाता है। कुल परंपरा के अनुसार हवन और विशेष अनुष्ठान भी किए जाते हैं।

मां महागौरी कौन हैं – स्वरूप और महत्व

चैत्र नवरात्रि अष्टमी की अधिष्ठात्री देवी मां महागौरी का स्वरूप अत्यंत उज्जवल और दिव्य है।

मां महागौरी का रंग पूर्णतः गौर यानी सफेद है। इसीलिए इन्हें महागौरी कहा जाता है। इनकी तुलना शंख, चंद्रमा और कुंद के फूल की श्वेतता से की जाती है।

मां महागौरी चार भुजाओं वाली हैं। इनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में डमरू है। तीसरे हाथ से वरद मुद्रा और चौथे हाथ से अभय मुद्रा में आशीर्वाद देती हैं। इनका वाहन वृषभ यानी बैल है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार मां पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी जिससे उनका रंग काला पड़ गया था। तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें गंगाजल से स्नान कराया जिससे वे अत्यंत गौर वर्ण हो गईं। तभी से इन्हें महागौरी कहा जाता है।

Chaitra Navratri Ashtami 2026 पूजा विधि – स्टेप बाय स्टेप

चैत्र नवरात्रि अष्टमी की पूजा विधिवत करने से इसका पूरा फल मिलता है।

  • पहला चरण यह है कि प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ सफेद या लाल वस्त्र धारण करें।
  • दूसरे चरण में पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। कलश की स्थापना करें और मां महागौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • तीसरे चरण में मां महागौरी को सफेद फूल, सफेद मिठाई, सफेद वस्त्र और सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
  • चौथे चरण में मां महागौरी का ध्यान मंत्र पढ़ें और दुर्गा सप्तशती के अध्याय का पाठ करें।
  • पांचवें चरण में कन्या पूजन करें। 9 कन्याओं को घर बुलाएं और उन्हें मां के स्वरूप के रूप में पूजें।

कन्या पूजन विधि – सही तरीका और नियम

चैत्र नवरात्रि अष्टमी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कन्या पूजन है।

कन्या पूजन के लिए 2 से 10 वर्ष की आयु की 9 कन्याओं को आमंत्रित किया जाता है। इन्हें नौ देवियों का प्रतीक माना जाता है। कुछ परिवारों में एक बालक को भी बुलाया जाता है जो भैरव का प्रतीक होता है।

कन्या पूजन में पहले उनके पैर धोएं। फिर माथे पर तिलक लगाएं और फूलों की माला पहनाएं। इसके बाद भोजन कराएं जिसमें पूड़ी, चना, हलवा और खीर होती है। अंत में यथाशक्ति दक्षिणा, फल और नए वस्त्र भेंट करें।

मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धापूर्वक कन्या पूजन करता है उसके घर में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है।

Chaitra Navratri Ashtami 2026 व्रत के नियम

चैत्र नवरात्रि अष्टमी का व्रत रखने वाले भक्तों को कुछ नियमों का पालन करना जरूरी है।

व्रत में सात्विक भोजन करना चाहिए। लहसुन, प्याज, मांस, मछली और अंडे का सेवन वर्जित है। फलाहार, साबूदाना, कुट्टू के आटे की रोटी और सेंधा नमक वाला भोजन व्रत में ग्रहण किया जा सकता है।

व्रती को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और क्रोध, लालच तथा असत्य से दूर रहना चाहिए। पूजा के समय मन को शांत और एकाग्र रखें।

अष्टमी व्रत का पारण 26 मार्च को सुबह 11:48 बजे यानी अष्टमी तिथि समाप्त होने के बाद किया जाना चाहिए। कन्या पूजन के बाद ही व्रत का पारण करें।

मां महागौरी की पूजा में किन वस्तुओं का करें उपयोग?

पूजा सामग्री महत्व
सफेद फूल (चमेली, मोगरा) मां महागौरी का प्रिय
सफेद मिठाई (खीर, पेड़ा) भोग के लिए
सफेद वस्त्र मां का प्रिय रंग
सोलह श्रृंगार की सामग्री सौभाग्य के लिए
नारियल शुभता का प्रतीक
पान, सुपारी पूजा में अनिवार्य
घी का दीपक अखंड ज्योति
कपूर आरती के लिए

Chaitra Navratri Ashtami 2026 का मंत्र

मां महागौरी की पूजा में इस मंत्र का जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है।

श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।

इस मंत्र का 108 बार जाप करने से मां महागौरी प्रसन्न होती हैं और भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

Chaitra Navratri Ashtami 2026: निष्कर्ष

चैत्र नवरात्रि अष्टमी 2026 यानी 26 मार्च एक बेहद पावन और फलदायी दिन है। मां महागौरी की पूजा, कन्या पूजन और अखंड व्रत से इस दिन का आध्यात्मिक महत्व और बढ़ जाता है। सुबह 6:20 से 7:52 का शुभ मुहूर्त पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ है। विधिवत पूजा, श्रद्धापूर्वक कन्या पूजन और मंत्र जाप से मां महागौरी की कृपा अवश्य प्राप्त होती है। चैत्र नवरात्रि अष्टमी की पूजा की तैयारी अभी से शुरू कर दें और इस पावन पर्व का पूरा आनंद और आशीर्वाद प्राप्त करें।

अस्वीकरण: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

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