Chaitra Navratri 2026: मां दुर्गा की पूजा में भूलकर भी न चढ़ाएं ये 6 चीजें, तुलसी से लेकर बासी फल तक, जानें क्या अर्पित करने से रूठ जाती हैं माता, पढ़ें पूरी जानकारी यहाँ
चैत्र नवरात्रि 2026: मां दुर्गा को भूलकर भी न चढ़ाएं ये 6 चीजें, जानें सही पूजा सामग्री।
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि 2026 का पावन पर्व 19 मार्च से शुरू होने वाला है। नौ दिनों तक माता दुर्गा के नौ रूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पूजा में सही सामग्री अर्पित करना जितना जरूरी है उतना ही यह जानना भी जरूरी है कि कौन सी चीजें माता को कभी नहीं चढ़ानी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ वस्तुएं ऐसी हैं जिन्हें मां दुर्गा को अर्पित करने से माता प्रसन्न होने की बजाय रूठ जाती हैं। इस लेख में जानें वे 6 चीजें जो नवरात्रि की पूजा में गलती से भी नहीं चढ़ानी चाहिए।
चैत्र नवरात्रि 2026 – तिथि और महत्व
चैत्र नवरात्रि हिंदू नववर्ष के पहले महीने चैत्र में मनाई जाती है। इस वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होगी और 28 मार्च को रामनवमी के साथ समाप्त होगी।
| नवरात्रि का दिन | तिथि | माता का रूप |
|---|---|---|
| प्रथम | 19 मार्च | शैलपुत्री |
| द्वितीय | 20 मार्च | ब्रह्मचारिणी |
| तृतीय | 21 मार्च | चंद्रघंटा |
| चतुर्थ | 22 मार्च | कूष्मांडा |
| पंचम | 23 मार्च | स्कंदमाता |
| षष्ठ | 24 मार्च | कात्यायनी |
| सप्तम | 25 मार्च | कालरात्रि |
| अष्टमी | 26 मार्च | महागौरी |
| नवमी/रामनवमी | 27-28 मार्च | सिद्धिदात्री |
Chaitra Navratri 2026: मां दुर्गा को भूलकर भी न चढ़ाएं ये 6 चीजें
1. तुलसी के पत्ते – मां दुर्गा को नहीं है पसंद
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता दुर्गा के चंडिका रूप को तुलसी की गंध पसंद नहीं है इसलिए मां दुर्गा की पूजा में तुलसी दल अर्पित करना सही नहीं माना जाता। दुर्गा पूजा के दौरान तुलसी के पत्ते मां को अर्पित करने से प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिल सकते हैं इसलिए ऐसा करने से बचें।
तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है और उनकी पूजा में तुलसी अनिवार्य है। लेकिन माता दुर्गा की पूजा में तुलसी का उपयोग वर्जित माना जाता है। इसके बदले आप माता को लाल या पीले फूल अर्पित कर सकते हैं।
2. धतूरा और मदार के फूल – माता से रखें दूर
माता दुर्गा की पूजा में धतूरा और मदार के फूल अर्पित करने से भी बचना चाहिए नहीं तो मां दुर्गा रूठ सकती हैं। इसके साथ ही कनेर के फूल भी मां को अर्पित करना सही नहीं माना जाता।
ध्यान रहे कि धतूरा और मदार के फूल भगवान शिव को जरूर प्रिय हैं लेकिन माता दुर्गा की पूजा में इनका प्रयोग वर्जित है। माता को गेंदे के फूल, गुलाब, कमल और लाल रंग के फूल विशेष प्रिय हैं।
3. तामसिक भोजन और प्याज-लहसुन – पूर्णतः वर्जित
ऐसा कोई भी भोजन मां को अर्पित न करें जो तामसिक प्रवृत्ति का हो। प्याज और लहसुन से बने भोज्य पदार्थों को भी माता को अर्पित करने से बचें नहीं तो जीवन में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
नवरात्रि के नौ दिनों में स्वयं भी तामसिक भोजन से परहेज रखना शुभ माना जाता है। माता को सात्विक भोग जैसे हलवा, पूड़ी, चना, खीर और पंचामृत अर्पित करें।
4. बासी फल – कभी न चढ़ाएं
कई लोग माता की पूजा तो विधि-विधान से करते हैं लेकिन बासी फल माता को अर्पित कर देते हैं। ऐसा करने से बचना चाहिए। फल नहीं खरीद सकते तो चावल या घर में बना कोई सादा भोजन माता को चढ़ा सकते हैं लेकिन बासी फल गलती से भी मां को न चढ़ाएं।
माता को हमेशा ताजे और मौसमी फल ही अर्पित करें। आम, केला, नारियल, सेब और अनार माता को विशेष प्रिय हैं।
5. खंडित दीपक – पूजा से पहले जांच लें
नवरात्रि की पूजा से पहले ही मिट्टी का दीपक खरीद लेना चाहिए। इस बात का ख्याल रखें कि दीपक खंडित न हो। दीपक के खंडित होने से दुर्गा मां की पूजा करने के बाद भी मां के आशीर्वाद से वंचित रह सकते हैं।
नवरात्रि में अखंड दीपक जलाने की परंपरा है। पूजा से पहले दीपक को ध्यान से देखें कि वह कहीं से टूटा या खंडित तो नहीं है। खंडित बर्तन या मूर्ति भी पूजा में उपयोग नहीं करनी चाहिए।
6. कृत्रिम फूल और माला – शास्त्रों में वर्जित
कई लोग कृत्रिम फल, फूल और माला नवरात्रि के दौरान माता को अर्पित कर देते हैं। ऐसा करना शास्त्रों के अनुसार सही नहीं माना जाता। ऐसा करने से माता प्रसन्न होने की बजाय रूठ सकती हैं।
प्लास्टिक या कागज के फूल और माला पूजा में उपयोग करना शास्त्रों में वर्जित है। हमेशा ताजे और असली फूलों की माला ही माता को अर्पित करें।
तुलनात्मक तालिका – क्या चढ़ाएं, क्या नहीं?
| अर्पित न करें | इसके बदले चढ़ाएं |
|---|---|
| तुलसी के पत्ते | लाल गुलाब, कमल |
| धतूरा, मदार, कनेर | गेंदा, चमेली, गुलाब |
| प्याज-लहसुन युक्त भोजन | हलवा, पूड़ी, खीर, चना |
| बासी फल | ताजे मौसमी फल |
| खंडित दीपक | साबुत मिट्टी का दीपक |
| कृत्रिम फूल और माला | ताजे फूलों की माला |
नवरात्रि पूजा में क्या अवश्य करें?
नवरात्रि में माता को खुश करने के लिए सही सामग्री का उपयोग करना उतना ही जरूरी है जितना गलत चीजों से बचना।
माता दुर्गा को लाल रंग अत्यंत प्रिय है इसलिए पूजा में लाल फूल, लाल चुनरी और लाल फल अवश्य चढ़ाएं। पंचामृत यानी दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण माता को विशेष प्रिय है। धूप और कपूर से आरती करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ करें या सुनें। नौ कन्याओं को भोज कराना अष्टमी और नवमी के दिन विशेष फलदायी होता है।
नवरात्रि के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
नवरात्रि के नौ दिनों में कुछ विशेष नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है।
मांस और मदिरा का सेवन वर्जित है। घर को साफ-सुथरा रखें। जमीन पर सोने से भी फल मिलता है। बाल और नाखून न कटवाएं। नवरात्रि में क्रोध और कलह से बचें। दैनिक पूजा में नियमितता बनाए रखें।
ज्योतिषाचार्य पंडित राजेश शर्मा का कहना है कि नवरात्रि में माता की पूजा केवल सामग्री से नहीं बल्कि शुद्ध मन और भावना से होती है। जो भक्त सच्चे मन से माता को पुकारता है माता उसकी पुकार जरूर सुनती हैं। लेकिन पूजा विधि का ध्यान रखना भी जरूरी है क्योंकि गलत सामग्री चढ़ाने से पूजा का फल नहीं मिलता।
निष्कर्ष
चैत्र नवरात्रि 2026 का पावन पर्व 19 मार्च से शुरू हो रहा है। माता दुर्गा की पूजा में सही सामग्री उतनी ही जरूरी है जितना गलत चीजों से बचना। तुलसी, धतूरा, मदार, कनेर, तामसिक भोजन, बासी फल, खंडित दीपक और कृत्रिम फूल माला — इन छह चीजों को भूलकर भी माता को अर्पित न करें। सच्चे मन से, विधि-विधान से और उचित सामग्री के साथ माता की पूजा करने से मां अवश्य प्रसन्न होती हैं और भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।
अस्वीकरण: यह लेख धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। पाठक अपने विवेक और आस्था के अनुसार इसका उपयोग करें।
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