Chaitra Kalashtami 2026,- 11 मार्च को रखा जाएगा चैत्र कालाष्टमी व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, काल भैरव पूजा विधि, मंत्र और महत्व

11 मार्च 2026 को चैत्र कालाष्टमी व्रत, काल भैरव पूजा रात में, शुभ मुहूर्त 1:54 AM से 4:19 AM, अकाल मृत्यु भय दूर

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Chaitra Kalashtami 2026: हिंदू धर्म में हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का पावन व्रत रखा जाता है। यह व्रत भगवान शिव के अत्यंत शक्तिशाली और रौद्र रूप काल भैरव को समर्पित है। मार्च 2026 में पड़ने वाली कालाष्टमी इसलिए विशेष महत्व रखती है क्योंकि यह चैत्र मास में आ रही है। वैदिक पंचांग के अनुसार चैत्र कालाष्टमी का व्रत 11 मार्च 2026 को रखा जाएगा। भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि इस दिन पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से काल भैरव की पूजा करने पर अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।

Chaitra Kalashtami 2026: चैत्र कालाष्टमी 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 11 मार्च 2026 की देर रात यानी 12 मार्च के शुरुआती घंटों में रात 1 बजकर 54 मिनट से प्रारंभ होगी। यह तिथि 12 मार्च 2026 की सुबह 4 बजकर 19 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। चूंकि काल भैरव की मुख्य पूजा रात के समय यानी निशा काल में की जाती है और इसी समय उनकी पूजा का विधान सबसे श्रेष्ठ माना जाता है, इसलिए उदया तिथि और अर्धरात्रि पूजा के समन्वय को देखते हुए धर्माचार्यों और पंचांग के जानकारों ने 11 मार्च 2026 की रात को ही चैत्र कालाष्टमी का व्रत और पूजन करना सर्वश्रेष्ठ बताया है।

Chaitra Kalashtami 2026: कौन हैं भगवान काल भैरव

काल भैरव भगवान शिव के अत्यंत उग्र और शक्तिशाली रूप हैं। शास्त्रों में उन्हें काशी का कोतवाल और समय के स्वामी के रूप में वर्णित किया गया है। भगवान काल भैरव का वाहन श्वान यानी कुत्ता है। उनके हाथों में त्रिशूल, खड्ग, पाश और डमरू होता है। उनका स्वरूप अत्यंत भयावह लेकिन भक्तों के लिए वरदान देने वाला है। काशी विश्वनाथ धाम में भगवान काल भैरव का मंदिर अत्यंत प्रसिद्ध है और वहां उन्हें काशी नगरी का रक्षक माना जाता है। मान्यता है कि जो भी भक्त काशी में काल भैरव के दर्शन किए बिना विश्वनाथ जी के दर्शन करता है उसकी यात्रा अधूरी मानी जाती है।

Chaitra Kalashtami 2026: काल भैरव पूजा की सरल और संपूर्ण विधि

कालाष्टमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त यानी सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें और दिनभर उपवास रखें। रात को निशा काल में पूजा का आरंभ करें। सबसे पहले भगवान काल भैरव की मूर्ति या चित्र को पंचामृत यानी दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान कराएं। इसके बाद उन्हें गंगाजल से शुद्ध करें। पूजन स्थल पर सरसों के तेल का दीपक जलाएं। सरसों का तेल काल भैरव को अत्यंत प्रिय है। भगवान काल भैरव को काले तिल, उड़द की दाल और नीले या काले रंग के फूल अर्पित करें।

Chaitra Kalashtami 2026: भैरव चालीसा का पाठ और मंत्र जाप

पूजा के दौरान भैरव चालीसा का पाठ अवश्य करें। इसके साथ ही ॐ कालभैरवाय नमः मंत्र का 108 बार जाप करें। यह मंत्र जाप माला से करें और हर माला के बाद भगवान को पुष्प समर्पित करें। काल भैरव के बीज मंत्र ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरुकुरु बटुकाय ह्रीं का जाप भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। पूजा के अंत में भगवान की आरती करें और उनसे अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने की प्रार्थना करें। उन्हें नारियल और इमरती का भोग लगाना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

Chaitra Kalashtami 2026: श्वान को खिलाएं मीठी रोटी

काल भैरव का वाहन श्वान यानी कुत्ता है। शास्त्रों में यह स्पष्ट उल्लेख है कि कालाष्टमी के दिन काले कुत्ते को मीठी रोटी या बिस्कुट खिलाने से भगवान काल भैरव अत्यंत प्रसन्न होते हैं। इससे कुंडली के ग्रह दोषों का प्रभाव कम होता है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। यह उपाय शनि और राहु-केतु के दोषों के निवारण में भी सहायक माना जाता है। काले कुत्ते की सेवा करने से काल भैरव की असीम कृपा प्राप्त होती है।

Chaitra Kalashtami 2026: चैत्र कालाष्टमी का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

चैत्र मास को हिंदू नव वर्ष का प्रारंभिक मास माना जाता है। इस माह में पड़ने वाली कालाष्टमी इसीलिए अन्य महीनों की कालाष्टमी से अधिक फलदायी और महत्वपूर्ण होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में शनि या राहु-केतु के अशुभ प्रभाव चल रहे होते हैं उनके लिए यह व्रत रामबाण उपाय माना जाता है। साढ़ेसाती या ढैय्या से परेशान जातकों को इस व्रत से विशेष लाभ होता है। यह व्रत न केवल शत्रुओं पर विजय दिलाता है बल्कि साधक को मानसिक दृढ़ता, साहस और आत्मिक शक्ति भी प्रदान करता है।

Chaitra Kalashtami 2026: व्रत में इन बातों का रखें ध्यान

कालाष्टमी के दिन तामसिक भोजन यानी मांस, मदिरा और प्याज-लहसुन का सेवन वर्जित है। काले रंग के वस्त्र पहनना इस दिन शुभ माना जाता है। पूजा के बाद भोग को प्रसाद के रूप में परिवार और जरूरतमंद लोगों में वितरित करें। रात्रि जागरण का भी विशेष महत्व है। जो लोग न्यायिक विवादों, संपत्ति के झगड़ों या शत्रुओं की परेशानियों से जूझ रहे हैं उनके लिए काल भैरव की पूजा विशेष रूप से लाभकारी है। भगवान काल भैरव को काशी का कोतवाल और न्याय का देवता भी कहा जाता है।

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