डिजिटल अरेस्ट पर केंद्र की स्टेटस रिपोर्ट, सुप्रीम कोर्ट से मांगा एक महीने का समय
सुप्रीम कोर्ट से एक महीने का समय मांगा, हाई लेवल कमेटी गठित, सीबीआई ने दर्ज की नई FIR
Digital Arrest: डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी है। सरकार ने अदालत को बताया है कि इस गंभीर मुद्दे से निपटने के लिए एक हाई लेवल इंटर डिपार्टमेंटल कमेटी का गठन किया गया है। इसके साथ ही मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है जिसने नई एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। केंद्र सरकार ने कोर्ट से डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों से निपटने के लिए एक ठोस और असरदार योजना बनाने हेतु एक महीने का समय मांगा है।
डिजिटल अरेस्ट एक नए प्रकार का साइबर अपराध है जिसमें धोखेबाज खुद को सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को डराते धमकाते हैं और ऑनलाइन बंधक बनाकर पैसे ऐंठते हैं। इस मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। यह मुद्दा पूरे देश में चिंता का विषय बन चुका है।
Digital Arrest: सीबीआई को सौंपी गई जांच
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) के मामलों की जांच अब सीबीआई को सौंप दी गई है। सीबीआई ने इस संबंध में नई एफआईआर दर्ज कर ली है और जांच शुरू कर दी है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट मामलों की जांच सीबीआई से करवाने के आदेश दिए थे। अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है।
सीबीआई जांच से उम्मीद है कि इस अपराध के मास्टरमाइंड और गिरोह के सदस्यों तक पहुंचा जा सकेगा। देशभर में फैले इस नेटवर्क को उजागर करना जरूरी है।
हाई लेवल कमेटी का गठन

गृह मंत्रालय ने डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) की समस्या से निपटने के लिए एक हाई लेवल इंटर डिपार्टमेंटल कमेटी बनाई है। यह कमेटी विभिन्न सरकारी विभागों के साथ मिलकर काम कर रही है।
कमेटी लोगों से मिले सुझावों पर भी विचार कर रही है। जनता और विशेषज्ञों के सुझाव इस समस्या से निपटने में मददगार साबित हो सकते हैं। यह कमेटी एक व्यापक रणनीति तैयार करेगी जिसमें रोकथाम, जागरूकता और कानूनी कार्रवाई शामिल होगी। सभी पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है।
एक महीने का समय मांगा
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) जैसे मामलों से निपटने के लिए एक ठोस और असरदार योजना बनाने में थोड़ा समय लगेगा। इसी वजह से केंद्र ने अदालत से एक महीने का समय मांगा है। सरकार का कहना है कि सभी सुझावों को ध्यान में रखते हुए एक मजबूत योजना तैयार करने के लिए समय जरूरी है। जल्दबाजी में बनाई गई योजना प्रभावी नहीं होगी।
इस योजना का उद्देश्य आगे चलकर लोगों को ऐसे ऑनलाइन धोखाधड़ी और डराने वाले मामलों से बचाना है। एक व्यापक और दीर्घकालिक समाधान जरूरी है।
Digital Arrest: डिजिटल अरेस्ट क्या है?
डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) एक साइबर अपराध है जिसमें धोखेबाज वीडियो कॉल के जरिए खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य सरकारी अधिकारी बताते हैं। वे पीड़ित को डराते हैं कि उनके खिलाफ कोई गंभीर मामला दर्ज है। फिर वे पीड़ित को ऑनलाइन बंधक बना लेते हैं और घंटों तक वीडियो कॉल पर रखते हैं। इस दौरान वे लगातार डर दिखाकर पैसे की मांग करते हैं।
डरे हुए पीड़ित अक्सर बड़ी रकम ट्रांसफर कर देते हैं। कई मामलों में लाखों रुपये की ठगी हो चुकी है। यह अपराध तेजी से फैल रहा है।
Digital Arrest: बढ़ते मामले चिंता का विषय
पूरे देश में डिजिटल अरेस्ट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हर दिन नए मामले सामने आ रहे हैं। पढ़े लिखे और जागरूक लोग भी इस जाल में फंस रहे हैं। साइबर अपराधी बेहद चालाकी से काम करते हैं। वे असली सरकारी दफ्तरों जैसा माहौल बनाते हैं। नकली यूनिफॉर्म पहनते हैं और सरकारी दस्तावेजों की नकल दिखाते हैं। पीड़ितों को इतना डरा दिया जाता है कि वे किसी से सलाह भी नहीं लेते। यही अपराधियों की रणनीति है। जागरूकता की कमी भी एक बड़ा कारण है।
सरकार के प्रयास
सरकार इस समस्या को गंभीरता से ले रही है। कई स्तरों पर कार्रवाई की जा रही है। जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
साइबर सेल और पुलिस को प्रशिक्षित किया जा रहा है। तकनीकी उपायों पर भी काम हो रहा है। अपराधियों को पकड़ने के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन यह एक जटिल समस्या है। अपराधी अक्सर विदेशों से काम करते हैं। उन्हें पकड़ना चुनौतीपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत है।
Digital Arrest: लोगों को सतर्क रहने की जरूरत
डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) से बचने के लिए लोगों को सतर्क रहना बहुत जरूरी है। कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी या जांच नहीं करती। अगर कोई ऐसी कॉल आए तो तुरंत काट दें। किसी भी दबाव में पैसे ट्रांसफर न करें। पहले अपने परिवार या पुलिस से संपर्क करें।
याद रखें कि असली सरकारी अधिकारी कभी भी फोन पर पैसे नहीं मांगते। अगर कोई कानूनी मामला होता है तो उसकी लिखित सूचना आती है। जागरूकता ही बचाव का सबसे अच्छा तरीका है। डिजिटल अरेस्ट एक गंभीर साइबर अपराध है जिससे निपटने के लिए सरकार गंभीर प्रयास कर रही है। सीबीआई जांच, हाई लेवल कमेटी और व्यापक योजना बनाने के प्रयास सही दिशा में कदम हैं। लेकिन इस समस्या को जड़ से खत्म करने में समय लगेगा। तब तक लोगों को खुद सतर्क रहना होगा। आज सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई में और स्पष्टता आएगी। सरकार की ठोस कार्य योजना की उम्मीद है।
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