CBI ने चलाया ‘ऑपरेशन साइस्ट्राइक’, डिजिटल फ्रॉड का भंडाफोड़, 60 लाख और आपत्तिजनक हार्डवेयर बरामद
FBI और इंटरपोल के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोह पर शिकंजा, 35 स्थानों पर छापे
Operation Scystrike: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अंतरराष्ट्रीय साइबर-आधारित वित्तीय अपराधों के एक विशाल नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए “ऑपरेशन साइस्ट्राइक” चलाया है। अमेरिकी FBI, इंटरपोल और ब्रिटेन, कुवैत, आयरलैंड तथा सिंगापुर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय में चलाए गए इस बड़े अभियान में देशभर के 35 स्थानों पर एक साथ छापे मारे गए। इस दौरान 60 लाख रुपये नकद और बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए।
Operation Scystrike: 35 स्थानों पर एक साथ छापे
CBI ने दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में एक साथ 35 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। इन छापों में कर्नाटक, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में स्थित संदिग्धों को निशाना बनाया गया। यह गिरोह छद्म नामों का इस्तेमाल करके दुनियाभर में भोले-भाले पीड़ितों से धन की हेराफेरी करता था।
60 लाख नकद और हार्डवेयर बरामद
तलाशी अभियान के दौरान जांचकर्ताओं को बड़ी सफलता मिली। उन्होंने 60 लाख रुपये नकद के साथ-साथ लैपटॉप, मोबाइल फोन, कंप्यूटर हार्ड डिस्क और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का जखीरा जब्त किया। इन उपकरणों में बड़े पैमाने पर वित्तीय चोरी के आपत्तिजनक डिजिटल सबूत मौजूद थे। गिरफ्तारियों के अलावा, एजेंसी ने उन “म्यूल खातों” को भी फ्रीज कर दिया जिनका इस्तेमाल अवैध धन को स्थानांतरित करने के लिए किया जाता था।
विदेशी एजेंसियों से मिली सूचना
यह अभियान 30 जनवरी को शुरू हुआ था जब विदेशी कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने घोटालेबाजों के बारे में CBI को महत्वपूर्ण सूचनाएं साझा कीं। एक वरिष्ठ CBI अधिकारी ने बताया, “यह गिरोह परिष्कृत डिजिटल धोखाधड़ी के माध्यम से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर लोगों को निशाना बना रहा था।” अंतरराष्ट्रीय सहयोग की बदौलत यह ऑपरेशन संभव हो सका।
Operation Scystrike: दिल्ली में अमेरिकी नागरिकों को ठगने वाले गिरोह का भंडाफोड़
सबसे महत्वपूर्ण सफलताओं में से एक दिल्ली में मिली, जहां एजेंसी ने अमेरिका में नागरिकों को धोखा देने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया। इस छापेमारी के दौरान जांचकर्ताओं ने लैपटॉप, मोबाइल फोन और कंप्यूटर हार्ड डिस्क सहित बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए। फोक्रेहरी पीटर नामक एक प्रमुख आरोपी को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।
फर्जी वीजा और रोजगार रैकेट का पर्दाफाश
इसी सिलसिले में CBI ने नई दिल्ली, गाजियाबाद और कर्नाटक में सक्रिय एक फर्जी वीजा और रोजगार रैकेट का भी पर्दाफाश किया। यह गिरोह कुवैती सरकार के आधिकारिक पोर्टलों का रूप धारण करने के लिए फर्जी वेबसाइटों का इस्तेमाल कर रहा था। वे भारतीय नागरिकों को नकली कुवैती ई-वीजा और प्रमुख कंपनियों में फर्जी नौकरी के वादे देकर मोटी रकम ऐंठ रहे थे।
जाली दस्तावेज और डिजिटल टेम्पलेट बरामद
CBI अधिकारियों ने जाली दस्तावेजों और डिजिटल टेम्पलेट्स को जब्त करने के अलावा एक आरोपी से 60 लाख रुपये बरामद किए। सूरज श्रीवास्तव नाम के एक अन्य प्रमुख संदिग्ध को भी गिरफ्तार किया गया। ये लोग विभिन्न सरकारी वेबसाइटों की हूबहू नकल बनाकर लोगों को धोखा दे रहे थे।
Operation Scystrike: कैसे काम करता था यह गिरोह
यह गिरोह एक अत्याधुनिक और जटिल प्रणाली के माध्यम से काम करता था जिसमें डिजिटल धोखाधड़ी और तीव्र वित्तीय हेरफेर का संयोजन था। संपर्क के समय गिरोह के सदस्य फर्जी डोमेन और छद्म नामों का उपयोग करके आधिकारिक संस्थाओं के रूप में पेश आते थे। वे पीड़ितों को धोखाधड़ी वाली सेवाओं के लिए तत्काल भुगतान करने के लिए बरगलाते थे।
म्यूल खातों का जाल
एक बार पैसा भेजे जाने के बाद, इसे तुरंत कई गुप्त खातों के जाल में भेज दिया जाता था। ये “म्यूल अकाउंट” मध्यस्थ बैंक खाते थे जिनका उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में धन को स्थानांतरित करने और ऑडिट के निशान मिटाने के लिए किया जाता था। इस विकेंद्रीकृत दृष्टिकोण ने सरगनाओं को प्रारंभिक अपराध से खुद को दूर रखने की अनुमति दी।
नकदी निकासी की विशेष टीमें
विशेष “कैश विद्ड्रॉल” टीमें अंततः डिजिटल आय को अप्राप्य ठोस मुद्रा में परिवर्तित कर देती थीं। इस तरह डिजिटल लेन-देन को नकदी में बदलकर पूरे नेटवर्क को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था। यह पूरा सिस्टम इतना जटिल था कि सामान्य जांच में इसे पकड़ना मुश्किल था।
Operation Scystrike: अंतरराष्ट्रीय सहयोग की अहमियत
यह ऑपरेशन अंतरराष्ट्रीय सहयोग का बेहतरीन उदाहरण है। FBI, इंटरपोल और विभिन्न देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने मिलकर काम किया। साइबर अपराध की सीमाविहीन प्रकृति को देखते हुए ऐसा सहयोग बेहद जरूरी है। बिना अंतरराष्ट्रीय समन्वय के इस तरह के गिरोहों को पकड़ना लगभग असंभव है।
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पीड़ित
इस गिरोह ने केवल भारतीयों को ही नहीं बल्कि अमेरिका, ब्रिटेन, कुवैत और अन्य देशों के नागरिकों को भी अपना शिकार बनाया था। विभिन्न देशों में अलग-अलग तरीके से लोगों को निशाना बनाया जाता था। कहीं फर्जी वीजा तो कहीं नकली नौकरी के जरिए लोगों को फंसाया जाता था।
साइबर अपराध की बढ़ती चुनौती
यह मामला दर्शाता है कि साइबर अपराध कितनी तेजी से बढ़ रहा है और कितना परिष्कृत हो गया है। अपराधी अब उन्नत तकनीक और जटिल नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके खिलाफ लड़ाई के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भी लगातार अपनी क्षमताओं को अपग्रेड करना पड़ रहा है।
Operation Scystrike: जागरूकता की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे अपराधों से बचने के लिए जनता में जागरूकता फैलाना भी जरूरी है। लोगों को सतर्क रहना चाहिए और किसी भी अनजान स्रोत से आए संदेशों या कॉल पर भरोसा नहीं करना चाहिए। कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर पैसे की मांग नहीं करती।
“ऑपरेशन साइस्ट्राइक” CBI और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की एक बड़ी सफलता है। यह दिखाता है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो रही है और कोई भी इससे बच नहीं सकता।
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