CBSE New Rules: दहावी बोर्ड में दो बार परीक्षा: तनाव रहित शिक्षा की ओर सीबीएसई की नई पहल”

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 10वीं के लिए एक बड़ा और स्वागत योग्य बदलाव किया है — अब बोर्ड परीक्षा साल में दो बार आयोजित की जाएगी। यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत छात्रों के हित में लिया गया है, ताकि वे कम दबाव में बेहतर तैयारी कर सकें।

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CBSE New Rules: परीक्षा की रूपरेखा:
पहली परीक्षा फरवरी में आयोजित करना अनिवार्य होगा (लगभग 17 फरवरी से 6 मार्च तक)।

दूसरी परीक्षा, जो मई (शुरुआत से मध्य तक) आयोजित होगी, वैकल्पिक है और विशेष रूप से सुधार हेतु होगी ।

छात्र अपनी जो बेहतर अंक अर्जित करेगा, वही अंतिम परिणाम में गिना जाएगा।

परीक्षा का समय-निर्धारण:
पहली परीक्षा फरवरी के अंत तक संपन्न होगी, जबकि दूसरी मई में आयोजित होकर जून के अंत तक परिणाम घोषित किए जाएंगे। CBSE ने लगभग 26.6 लाख विद्यार्थियों के लाभार्थिता की सम्भावना जताते हुए इसे औपचारिक रूप देने की प्रक्रिया तेज कर दी है ।

बदलाव का मकसद और लाभ:
तनाव में कमी: एक ही परीक्षा पर निर्भर रहने से जो दबाव रहता था, वह अब बंट जाएगा।

लगातार तैयारी: छात्र पूरे वर्ष बेहतर तैयारी कर सकेंगे और कमजोर विषयों पर पुनः कार्य कर सकेंगे।

लचीलापन: खेल, बीमारी या अन्य कारणों से छूटी पहली परीक्षा की भरपाई संभव हो सकेगी।

CBSE New Rules: अन्य शैक्षणिक सुधार:
पेपर पैटर्न में बदलाव: 50% सवाल अब क्षमता आधारित होंगे, जो विश्लेषणात्मक सोच पर जोर देंगे।

इंटरनल आकलन: इसे कुल अंकों का 40% एवं बोर्ड परीक्षा 60% अंक तय करेगी।

ओपन-बुक और डिजिटल मूल्यांकन: चुनिंदा विषयों के लिए ओपन‑बुक परीक्षा और डिजिटल ग्रेडिंग सिस्टम अपनाया जाएगा।

गैर-उपस्थिति में रिहाई: कोविड अथवा खेल प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्र 75% उपस्थिति मानदंड में छूट पा सकेंगे ।

छात्र समुदाय की प्रतिक्रिया:
Reddit पर छात्रों ने उत्साह व्यक्त किया है:

“Two Exams Per Year… Full Syllabus… better score will be considered for the final result.”

यह बदलाव समयबद्ध एवं गुणात्मक शिक्षा की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

निष्कर्ष:
सीबीएसई द्वारा साल में दो बार बोर्ड परीक्षा करवाने का निर्णय छात्रों के हित में एक सुचिंतित बदलाव है। यह उनके मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा में निरंतरता, और अच्छे अंक हासिल करने के अवसरों को बढ़ाएगा। हालिया पाठ्यक्रम-विन्यास एवं मूल्यांकन प्रणाली में भी सुधार ने शिक्षा को अधिक आधुनिक और व्यावहारिक बनाया है।

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