इन टियर-2 और टियर-3 शहरों में जमीन खरीदना बन सकता है सोने की खान! अगले 2–4 साल में प्लॉट की कीमतें 25% से 100% तक बढ़ने का अनुमान
इंदौर, जयपुर, लखनऊ समेत कई शहरों में जमीन के दाम 100% तक बढ़ने की उम्मीद
Tier 2 cities real estate: अगर आप प्रॉपर्टी में निवेश करने की सोच रहे हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। देश के रियल एस्टेट बाजार में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव आ रहा है। मेट्रो शहरों में जमीन और मकान की कीमतें आसमान छूने के बाद अब निवेशकों और घर खरीदने वालों की नजर टियर-2 और टियर-3 शहरों पर टिक गई है। प्रॉपटेक कंपनी स्क्वायर यार्ड्स की एक ताजा रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि आने वाले 2 से 4 वर्षों में इन शहरों में जमीन और प्लॉट की कीमतें 25 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का विकास इस उछाल की सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है।
Tier 2 cities real estate: किन शहरों में सबसे ज्यादा तेजी
रिपोर्ट में देश के कई प्रमुख टियर-2 और टियर-3 शहरों का जिक्र किया गया है जहां प्रॉपर्टी की मांग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। इंदौर, जयपुर, भोपाल, नागपुर, चंडीगढ़, मोहाली, लखनऊ, रायपुर, लुधियाना, पटना, रांची, जालंधर और उदयपुर जैसे शहर इस सूची में सबसे आगे हैं। इन शहरों में न केवल स्थानीय खरीदारों की दिलचस्पी बढ़ी है बल्कि बड़े महानगरों में रहने वाले निवेशक भी अब इन बाजारों में आक्रामक तरीके से पैसा लगा रहे हैं। रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार यह रुझान आने वाले कुछ वर्षों में और तेज होने वाला है।
Tier 2 cities real estate: इंदौर और जयपुर में कितना बढ़ा दाम
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में कई शहरों में रियल एस्टेट की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। इंदौर में फ्लैट की कीमतों में करीब 72 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है जबकि प्लॉट के दाम तो 85 से 100 प्रतिशत तक ऊपर चले गए हैं। यह आंकड़ा अपने आप में बेहद चौंकाने वाला है। इसी तरह जयपुर में भी फ्लैट की कीमतें 65 प्रतिशत तक उछली हैं लेकिन प्लॉट की कीमतों में 75 से 90 प्रतिशत तक की तेजी देखने को मिली है। चंडीगढ़ में भी फ्लैट के दाम करीब 44 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। यह रुझान साफ संकेत देता है कि निवेशक अब खाली प्लॉट में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं।
Tier 2 cities real estate: इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा सबसे बड़ा कारण
रियल एस्टेट बाजार में आ रही इस क्रांति के पीछे सबसे बड़ा कारण देशभर में तेजी से हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास है। नए एक्सप्रेसवे, रिंग रोड, मेट्रो नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स पार्क और नए एयरपोर्ट परियोजनाओं ने छोटे और मझोले शहरों की कनेक्टिविटी को पूरी तरह बदल दिया है। जिन शहरों में कुछ साल पहले बड़े महानगरों से पहुंचना मुश्किल होता था अब वहां तक घंटों में पहुंचा जा सकता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मेट्रो, एक्सप्रेसवे और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के आसपास की जमीन की कीमतों में सबसे ज्यादा तेजी देखी जा रही है।
Tier 2 cities real estate: डेवलपर्स का क्या है नजरिया
ग्रीनलैंड्स ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर और सीईओ नितिन श्रीवास्तव का कहना है कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में डेवलपर्स के लिए इस समय बड़ी और अनूठी संभावनाएं बन रही हैं। उनका कहना है कि इन शहरों में जमीन की उपलब्धता अभी भी पर्याप्त है और कीमतें मेट्रो शहरों के मुकाबले काफी किफायती हैं। यही वजह है कि बड़े डेवलपर्स अब प्लॉटेड डेवलपमेंट, टाउनशिप और मिड सेगमेंट हाउसिंग प्रोजेक्ट्स पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
Tier 2 cities real estate: रोजगार बढ़ेगा तो प्रॉपर्टी की मांग भी बढ़ेगी
अंसल हाउसिंग के डायरेक्टर कुशाग्र अंसल ने इस मसले पर अपनी राय साझा करते हुए कहा कि छोटे शहरों में रियल एस्टेट की तेजी का सबसे बड़ा आधार आर्थिक गतिविधियों में हो रही बढ़ोतरी है। कई राज्यों में नए इंडस्ट्रियल क्लस्टर, मैन्युफैकिंग हब और लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित किए जाने से रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। उनका तर्क है कि जैसेजैसे रोजगार बढ़ेगा वैसेवैसे आवासीय प्रॉपर्टी की मांग भी स्वाभाविक रूप से बढ़ती जाएगी। यह एक ऐसा चक्र है जो एक बार शुरू हो जाए तो रुकता नहीं।
Tier 2 cities real estate: बड़े शहरों के निवेशकों की नजर अब इधर
वन ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर उदित जैन का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में टियर-2 और टियर-3 शहरों के रियल एस्टेट बाजार ने काफी मजबूत वृद्धि दर्ज की है। उनके मुताबिक बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के विकास से इन शहरों की कनेक्टिविटी में जो सुधार आया है उसका सीधा और सकारात्मक असर प्रॉपर्टी की मांग पर देखा जा रहा है। सिक्का ग्रुप के चेयरमैन हरविंदर सिंह सिक्का ने भी माना कि अब ये शहर केवल स्थानीय खरीदारों तक सीमित नहीं रहे। बड़े शहरों के निवेशक भी इन बाजारों में भविष्य की संभावनाएं तलाश रहे हैं और ऐसे इलाकों में प्लॉट खरीद रहे हैं जहां आने वाले समय में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स विकसित होने की संभावना है।
Tier 2 cities real estate: निवेश का यह है सही वक्त
विशेषज्ञों की राय में जो निवेशक लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न चाहते हैं उनके लिए यह समय टियर-2 और टियर-3 शहरों में निवेश करने का सबसे सही मौका है। अभी इन शहरों में कीमतें मेट्रो शहरों की तुलना में काफी कम हैं लेकिन जैसेजैसे इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास होगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, इन शहरों की प्रॉपर्टी की कीमतें तेजी से ऊपर जाएंगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जो लोग आज इन शहरों में प्लॉट या जमीन में निवेश करेंगे वे आने वाले 4 से 5 वर्षों में अपने निवेश को कई गुना बढ़ता हुआ देख सकते हैं।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर देश के रियल एस्टेट बाजार का केंद्र धीरेधीरे मेट्रो शहरों से टियर-2 और टियर-3 शहरों की ओर खिसक रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, रोजगार सृजन और किफायती कीमतों का यह त्रिकोण इन शहरों को निवेश के लिहाज से देश का सबसे गर्म बाजार बना रहा है।
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