Budget 2026: इस बार बजट में टैक्सपेयर्स को मिल सकती है बड़ी राहत, ये 5 ऐलान बदल देंगे खेल

केंद्रीय बजट 2026 में मध्यम वर्ग को राहत की उम्मीद, पुरानी कर व्यवस्था में स्लैब संशोधन

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Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 की घोषणा नजदीक आते ही देशभर के करोड़ों करदाताओं की निगाहें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर टिकी हुई हैं। पिछले कुछ वर्षों से सरकार की रणनीति रही है कि मध्यम वर्ग और वेतनभोगी करदाताओं की जेब में अधिक धन बचे जिससे उपभोग में वृद्धि हो और अर्थव्यवस्था को गति मिले। 2020 में नई कर व्यवस्था की शुरुआत और उसके बाद प्रतिवर्ष उसमें सुधार इसी योजना का हिस्सा रहे हैं। पिछले बजट में नई प्रणाली के अंतर्गत 12 लाख रुपये तक की आय को कर मुक्त करके सरकार ने करदाताओं को बड़ा उपहार दिया था। अब प्रश्न यह है कि बजट 2026 में क्या फिर से कोई बड़ा आश्चर्य मिलने वाला है?

कर स्लैब में संशोधन की प्रबल संभावना

विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार सरकार पुरानी कर प्रणाली के स्लैब में परिवर्तन ला सकती है। अब तक पुरानी व्यवस्था में कर ढांचा यथावत बना हुआ है जबकि नई प्रणाली को निरंतर आकर्षक बनाया जा रहा है। उपभोग बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार मध्यम आय वर्ग को राहत प्रदान करने पर केंद्रित हो सकती है।

वर्तमान में पुरानी प्रणाली में 2.5 लाख रुपये से अधिक की आय पर कर लगता है। विश्लेषकों का मानना है कि इस सीमा को बढ़ाकर कम से कम 3 लाख रुपये किया जा सकता है। इससे छोटे और मध्यम वर्ग के करदाताओं को सीधा फायदा मिलेगा। साथ ही उच्च आय वर्ग के लिए भी स्लैब में कुछ समायोजन हो सकते हैं जिससे समग्र कर बोझ में कमी आएगी।

Budget 2026: टीडीएस दरों में सरलीकरण की जरूरत

वर्तमान परिदृश्य में विभिन्न लेनदेन पर अनेक टीडीएस दरें लागू (Budget 2026) हैं जिससे करदाताओं में भ्रम की स्थिति रहती है। किसी पर 1 प्रतिशत तो किसी पर 2 प्रतिशत और कहीं 5 या 10 प्रतिशत की दर से कर काटा जाता है। यह जटिलता व्यवसायियों और आम करदाताओं दोनों के लिए समस्या पैदा करती है।

बजट 2026 (Budget 2026) में सरकार टीडीएस दरों को सरल बनाते हुए इन्हें मात्र 2 से 3 श्रेणियों तक सीमित कर सकती है। इससे अनुपालन आसान हो जाएगा और कर प्रशासन भी सुगम होगा। छोटे व्यवसायियों के लिए यह बड़ी राहत साबित होगी क्योंकि उन्हें विभिन्न दरों को याद रखने और लागू करने में कठिनाई आती है।

पुरानी प्रणाली में मानक कटौती बढ़ाने की मांग

Budget 2026
Budget 2026

नई कर प्रणाली में मानक कटौती को बढ़ाकर 75000 रुपये कर दिया गया है जबकि पुरानी व्यवस्था में यह अभी भी 50000 रुपये पर अटकी हुई है। बढ़ती महंगाई और जीवन यापन की लागत को देखते हुए यह राशि अपर्याप्त प्रतीत होती है।

विशेषज्ञों की राय है कि सरकार पुरानी प्रणाली में भी मानक कटौती बढ़ाने की घोषणा कर सकती है। इसे कम से कम 75000 रुपये या उससे भी अधिक किया जा सकता है। यह कदम उन करदाताओं के लिए राहत लाएगा जो अभी भी पुरानी प्रणाली को चुनते हैं क्योंकि उन्हें विभिन्न कटौतियों का लाभ मिलता है।

Budget 2026: पति पत्नी के लिए संयुक्त कराधान की संभावना

भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान यानी आईसीएआई की सिफारिश पर सरकार पति पत्नी के लिए संयुक्त कराधान प्रणाली लाने पर विचार कर रही है। यह अवधारणा कई विकसित देशों में पहले से लागू है और वहां सफलतापूर्वक काम कर रही है।

इस व्यवस्था (Budget 2026) में पति पत्नी की संयुक्त आय पर कर लगाया जाएगा न कि अलग अलग। इससे परिवार की कुल कर देयता में कमी आएगी और कर प्रणाली अधिक संतुलित बन सकेगी। विशेष रूप से उन परिवारों को लाभ होगा जहां एक की आय बहुत अधिक है और दूसरे की कम। संयुक्त रूप से कर लगने पर औसत कर दर कम हो जाएगी।

हालांकि इस प्रस्ताव को लागू करने में कई तकनीकी चुनौतियां हैं। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि यह व्यवस्था सभी के लिए लाभकारी हो और किसी को नुकसान न पहुंचे। संभव है कि इसे वैकल्पिक रखा जाए जिससे जिन्हें फायदा हो वे इसे चुन सकें।

दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ में छूट बढ़ाने की उम्मीद

शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के लिए राहत की खबर (Budget 2026) आ सकती है। वर्तमान में दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर 1.25 लाख रुपये तक की छूट उपलब्ध है। इससे अधिक की राशि पर कर लगता है।

सरकार इस कर मुक्त सीमा को बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये या उससे भी अधिक कर सकती है। यह कदम खुदरा निवेशकों को प्रोत्साहित करेगा और बाजार में अधिक भागीदारी को बढ़ावा देगा। वर्तमान में कई छोटे निवेशक कर के डर से अपने लाभ को बुक नहीं करते। छूट सीमा बढ़ने से उन्हें राहत मिलेगी।

इसके अतिरिक्त सरकार पूंजीगत लाभ कर की दरों में भी कुछ कमी कर सकती है। यह विशेष रूप से उन निवेशकों के लिए लाभदायक होगा जिनकी आय सीमा से अधिक है।

Budget 2026: आवास ऋण पर ब्याज कटौती

घर खरीदने वालों के लिए भी कुछ राहत की उम्मीद (Budget 2026) है। वर्तमान में आवास ऋण के ब्याज पर 2 लाख रुपये तक की कटौती उपलब्ध है। बढ़ती संपत्ति कीमतों को देखते हुए यह सीमा अपर्याप्त लगती है।

सरकार इस सीमा को बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर सकती है। यह कदम रियल एस्टेट क्षेत्र को भी बढ़ावा देगा जो हाल के वर्षों में मंदी का सामना कर रहा है। अधिक लोग घर खरीदने के लिए प्रोत्साहित होंगे।

स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर अधिक छूट

स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर वर्तमान में 25000 रुपये तक की कटौती मिलती है और वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह 50000 रुपये है। कोविड महामारी के बाद स्वास्थ्य बीमा का महत्व बढ़ गया है और प्रीमियम भी बढ़े हैं।

सरकार इन सीमाओं को बढ़ाकर सामान्य नागरिकों के लिए 50000 रुपये और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 75000 रुपये कर सकती है। यह कदम (Budget 2026)लोगों को पर्याप्त स्वास्थ्य बीमा लेने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

Budget 2026: शिक्षा ऋण पर ब्याज कटौती

उच्च शिक्षा के लिए लिए गए ऋण के ब्याज पर पूरी कटौती उपलब्ध है लेकिन केवल आठ वर्षों तक। कई बार छात्र लंबे समय तक ऋण चुकाते रहते हैं। सरकार इस अवधि को बढ़ा सकती है या असीमित कर सकती है।

निष्कर्ष: बजट 2026 (Budget 2026) से करदाताओं को काफी उम्मीदें हैं। सरकार ने पहले भी मध्यम वर्ग को राहत देने में रुचि दिखाई है। इस बार भी कुछ बड़े कदम उठाए जा सकते हैं। हालांकि अंतिम फैसला वित्त मंत्री ही लेंगी और सब कुछ बजट भाषण में ही स्पष्ट होगा। करदाताओं को उम्मीद है कि उनकी जेब पर बोझ कम होगा और अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

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