Budget 2026: शिक्षा से रोजगार तक उच्च स्तरीय समिति का गठन, एसएमई के लिए 10 हजार करोड़ का फंड, वाराणसी और पटना में शिप रिपेयर की सुविधा

शिक्षा-रोजगार-उद्यम के लिए उच्च स्तरीय समिति, एसएमई 10 हजार करोड़ फंड, माइक्रो यूनिट्स 2 हजार करोड़, वाराणसी-पटना में शिप रिपेयर, रेयर अर्थ सुविधाएं

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Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज लोकसभा में अपना नौवां बजट पेश करते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। शिक्षा से रोजगार और उद्यम के क्षेत्र में एक उच्चस्तरीय स्थायी समिति के गठन का प्रस्ताव रखा गया। एसएमई के लिए 10 हजार करोड़ रुपए का विशेष फंड घोषित किया गया। माइक्रो एंटरप्राइजेज को 2 हजार करोड़ रुपए की मदद दी जाएगी। वाराणसी और पटना में शिप रिपेयर इकोसिस्टम बनाए जाएंगे। रेयर अर्थ मटेरियल के लिए ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में डेडिकेटेड सुविधाएं स्थापित की जाएंगी। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार के सुधारों से 7 प्रतिशत की विकास दर हासिल हुई है और गरीबी कम करने में मदद मिली है।

शिक्षा से रोजगार तक उच्च स्तरीय समिति का गठन

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में शिक्षा, रोजगार और उद्यम को जोड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की। उन्होंने शिक्षा से रोजगार और उद्यम के क्षेत्र में एक उच्चस्तरीय स्थायी समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा। यह समिति विकसित भारत के मुख्य चालक के रूप में सेवा क्षेत्र पर केंद्रित उपायों की सिफारिश करेगी। इस समिति का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ना है। अक्सर देखा जाता है कि शिक्षा प्राप्त करने के बाद युवाओं को रोजगार नहीं मिल पाता या उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने में कठिनाई होती है।

यह समिति इस खाई को पाटने का काम करेगी। वित्त मंत्री ने कहा कि इस पहल से हम 2047 तक सेवा क्षेत्र में 10 प्रतिशत वैश्विक हिस्सेदारी के साथ वैश्विक नेता बन सकेंगे। भारत सेवा क्षेत्र में पहले से मजबूत है लेकिन इस समिति की सिफारिशों से इसे और बढ़ावा मिलेगा। शिक्षा पाठ्यक्रम को उद्योग की जरूरतों के अनुसार तैयार किया जाएगा ताकि छात्र पढ़ाई पूरी करते ही रोजगार के लिए तैयार हों।

Budget 2026: एसएमई के लिए 10 हजार करोड़ का ग्रोथ फंड

छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए बजट में बड़ी घोषणा की गई है। वित्त मंत्री ने 10 हजार करोड़ रुपए का एसएमई ग्रोथ फंड प्रस्तावित किया है। यह फंड छोटे और मध्यम उद्यमों के विस्तार और विकास के लिए उपयोग किया जाएगा। एसएमई क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यह सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है और जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

इस क्षेत्र को वित्तीय सहायता मिलने से व्यवसायों का विस्तार होगा। नए उत्पाद और सेवाएं विकसित की जा सकेंगी। तकनीकी उन्नयन में मदद मिलेगी। छोटे उद्यमियों को अक्सर बैंकों से लोन लेने में कठिनाई होती है। यह विशेष फंड उनकी इस समस्या का समाधान करेगा। फंड के माध्यम से उद्यमियों को आसानी से वित्तीय सहायता मिल सकेगी। इससे रोजगार सृजन में भी मदद मिलेगी।

माइक्रो एंटरप्राइजेज को 2 हजार करोड़ की मदद

वित्त मंत्री ने सूक्ष्म उद्यमों के लिए भी विशेष प्रावधान किया है। सरकार 2 हजार करोड़ रुपए के फंड से माइक्रो एंटरप्राइजेज को सपोर्ट करेगी। माइक्रो एंटरप्राइजेज सबसे छोटे व्यवसाय होते हैं जिनमें निवेश और टर्नओवर बहुत कम होता है। ये ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार देते हैं। छोटे दुकानदार, कारीगर, हस्तशिल्पी और घरेलू उद्योग इसी श्रेणी में आते हैं। इन्हें वित्तीय सहायता मिलने से उनका व्यवसाय स्थिर होगा। नए उपकरण खरीदे जा सकेंगे।

कच्चे माल की खरीद में आसानी होगी। एमएसएमई को तरलता सहायता देने के लिए ट्रेड्स सेटलमेंट प्लेटफॉर्म को अनिवार्य कर दिया गया है। यह प्लेटफॉर्म छोटे व्यवसायियों को बड़ी कंपनियों से समय पर भुगतान दिलाने में मदद करेगा। अक्सर छोटे व्यवसायियों को बड़ी कंपनियों से देर से भुगतान मिलता है जिससे उनका कैश फ्लो प्रभावित होता है। यह प्लेटफॉर्म इस समस्या का समाधान करेगा।

Budget 2026: वाराणसी और पटना में शिप रिपेयर इकोसिस्टम

वित्त मंत्री ने जलमार्ग विकास के लिए महत्वपूर्ण घोषणा की है। वाराणसी और पटना में शिप रिपेयर इकोसिस्टम बनाया जाएगा। यह दोनों शहर गंगा नदी के किनारे स्थित हैं और जलमार्ग परिवहन के लिए महत्वपूर्ण हैं। शिप रिपेयर सुविधा से जलमार्ग पर चलने वाले जहाजों की मरम्मत और रखरखाव आसान होगा। इससे जलमार्ग परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। माल ढुलाई की लागत कम होगी।

नदी परिवहन पर्यावरण के लिए भी अनुकूल है। वाराणसी और पटना में नई सुविधा से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। तकनीकी कौशल वाले युवाओं को काम मिलेगा। जलमार्ग से जुड़े व्यवसायों का विकास होगा। यह पहल गंगा नदी के आर्थिक उपयोग को बढ़ाने में भी मदद करेगी।

दुर्लभ खनिजों के लिए समर्पित सुविधाएं

रेयर अर्थ मटेरियल यानी दुर्लभ खनिजों के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है। ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में डेडिकेटेड फेसिलिटी बनाने की पहल की गई है। इन राज्यों में डेडिकेटेड मिनरल पार्क स्थापित किए जाएंगे। दुर्लभ खनिज आधुनिक तकनीक के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा उपकरण और अन्य हाई टेक उत्पादों में इनका उपयोग होता है।

अभी भारत इन खनिजों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। समर्पित खनिज पार्क बनने से घरेलू उत्पादन बढ़ेगा। आयात निर्भरता कम होगी। स्थानीय उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। ये तीनों राज्य खनिज संपदा के लिए जाने जाते हैं। यहां पर खनिज पार्क बनना आर्थिक रूप से फायदेमंद होगा।

Budget 2026: सरकार के सुधारों से 7 प्रतिशत विकास

वित्त मंत्री ने बजट भाषण में सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार के कदमों से 7 प्रतिशत की विकास दर हासिल हुई है। गरीबी कम करने में मदद मिली है। भारत को वैश्विक बाजारों से एकीकृत होना होगा। सरकार ने व्यापक सुधार किए हैं। केवल 2025 में 350 से अधिक सुधारों को शुरू किया गया है। ये सुधार विभिन्न क्षेत्रों में किए गए हैं।

व्यापार करना आसान बनाया गया है। कर प्रणाली को सरल किया गया है। नियमों और कानूनों में सुधार किए गए हैं। डिजिटलीकरण को बढ़ावा दिया गया है। इन सुधारों का नतीजा यह है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारत की विकास दर बेहतर बनी हुई है। निवेश के लिए माहौल सुधरा है। विदेशी निवेश आ रहा है। रोजगार सृजन हो रहा है।

बजट 2026 में की गई ये सभी घोषणाएं देश के आर्थिक विकास को नई गति देंगी। शिक्षा से रोजगार तक का सेतु बनेगा। छोटे और मध्यम उद्यमों को मजबूती मिलेगी। जलमार्ग परिवहन का विकास होगा। दुर्लभ खनिजों में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

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