Bitcoin अपने शिखर से 50% टूटा, फरवरी 2022 के बाद सबसे बड़ी मासिक गिरावट, ट्रंप के टैरिफ और कानूनी टकराव ने बाजार को हिलाया, सोने ने दिखाई मजबूती
Bitcoin अपने शिखर से 50% टूटा, $63,000 से नीचे पहुंचा भाव, ट्रंप टैरिफ और सुप्रीम कोर्ट टकराव से बाजार हिला; सोने ने दिखाई मजबूती
Bitcoin: दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे चर्चित क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin इन दिनों भारी दबाव में है और निवेशकों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। मंगलवार को Bitcoin का कारोबारी भाव 63,000 डॉलर के स्तर से नीचे खिसक गया और दिन के सबसे निचले स्तर पर यह 62,964 डॉलर तक पहुंच गया। कारोबारी सत्र के अंत में यह लगभग 63,800 डॉलर के आसपास बंद हुआ और दिनभर की गणना में करीब तीन प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे भी ज्यादा चिंताजनक तथ्य यह है कि अक्टूबर 2025 में Bitcoin 1,26,000 डॉलर प्रति कॉइन के ऊपर अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर था और अब उस शिखर से यह लगभग 50 प्रतिशत नीचे आ चुका है। फरवरी 2026 का महीना साल 2022 में आई क्रिप्टो की भारी तबाही के बाद से अब तक का सबसे खराब महीना बनता जा रहा है। साल-दर-साल तुलना में Bitcoin 27 से 28 प्रतिशत पिछड़ा हुआ है। आखिर क्यों आई यह गिरावट और आगे क्या होगा, आइए समझते हैं पूरा मामला।
Bitcoin: एक दिन में 4.8% की गिरावट, पूरा क्रिप्टो बाजार हिला
मंगलवार को केवल Bitcoin ही नहीं बल्कि पूरा क्रिप्टोकरेंसी बाजार गहरी चोट खाता दिखा। लंदन के कारोबारी सत्र में Bitcoin एक ही दिन में 4.8 प्रतिशत तक लुढ़क गया हालांकि बाद में कुछ हद तक वापसी हुई। लेकिन यह वापसी भी निवेशकों को ज्यादा राहत देने में सक्षम नहीं रही। पूरे क्रिप्टो बाजार की कुल पूंजीकरण यानी मार्केट कैपिटलाइजेशन की बात करें तो यह अपने सर्वकालिक उच्चतम स्तर से लगभग आधी रह गई है और अभी 2.2 ट्रिलियन डॉलर के आसपास सिमट गई है। जो निवेशक कुछ महीने पहले क्रिप्टो बाजार की तेजी देखकर उत्साहित थे वे अब अपने पोर्टफोलियो में हो रहे नुकसान से परेशान हैं।
ट्रंप के टैरिफ और सुप्रीम कोर्ट के टकराव ने बाजार को डराया
विशेषज्ञों के अनुसार इस गिरावट के पीछे केवल क्रिप्टो बाजार की आंतरिक कमजोरी नहीं है बल्कि अमेरिका में उत्पन्न एक अभूतपूर्व कानूनी और आर्थिक संकट ने पूरे निवेश बाजार को हिला दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार से सभी आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत का सीमा शुल्क यानी टैरिफ लागू कर दिया। लेकिन यह टैरिफ ऐसे समय में लागू हुआ जब पिछले शुक्रवार को अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने ऐसी अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों को असंवैधानिक और गैरकानूनी करार दे दिया था। राष्ट्रपति ट्रंप ने अदालत के इस फैसले को सार्वजनिक रूप से चुनौती देते हुए टैरिफ लागू करने का निर्णय जारी रखा। इससे अमेरिका में एक ऐसी असाधारण स्थिति पैदा हो गई जहां देश का सर्वोच्च न्यायालय और कार्यपालिका एक-दूसरे के आमने-सामने खड़े हैं।
Bitcoin: क्रिप्टो विशेषज्ञ ने बताया सबसे बड़ा खतरा
क्रिप्टो इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी एक्सिस के मुख्य परिचालन अधिकारी और सह-संस्थापक Jimmy Xue ने इस पूरी स्थिति पर अपनी राय जाहिर करते हुए कहा कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले और प्रशासन द्वारा तुरंत शुल्क लागू करने के बीच जो कानूनी और आर्थिक टकराव पैदा हुआ है वह इस सप्ताह वैश्विक बाजारों के लिए सबसे बड़ा और गंभीर जोखिम है। उनका कहना है कि जब किसी देश की सर्वोच्च अदालत और वहां की सरकार परस्पर विरोधी दिशाओं में चलती दिखती हैं तो वैश्विक निवेशक घबराहट में अपना पैसा जोखिम भरे निवेश से निकालकर सुरक्षित विकल्पों में लगाने लगते हैं। क्रिप्टोकरेंसी को निवेशक वैसे भी उच्च जोखिम वाला निवेश मानते हैं इसलिए इस अनिश्चितता का सबसे ज्यादा असर इसी पर पड़ा।
$53,000 तक जाने की आशंका
बाजार विशेषज्ञों की चिंताएं यहीं खत्म नहीं होती। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि अगर बाजार में बिकवाली का यही दबाव बना रहा और कोई सकारात्मक कारक सामने नहीं आया तो Bitcoin का भाव 53,000 से 55,000 डॉलर के स्तर तक भी फिसल सकता है। यह एक गंभीर चेतावनी है क्योंकि इसका मतलब होगा कि अपने सर्वकालिक उच्च से Bitcoin 57 से 58 प्रतिशत तक नीचे आ जाएगा। हालांकि कुछ दीर्घकालिक निवेशकों का कहना है कि Bitcoin पहले भी ऐसी तेज गिरावटों से उबरा है और लंबी अवधि में इसकी संभावनाएं बनी हुई हैं।
सोने ने दिखाई मजबूती, Bitcoin से बिल्कुल उलट तस्वीर
Bitcoin की इस बुरी स्थिति के ठीक उलट सोना इन दिनों निवेशकों का सबसे भरोसेमंद दोस्त साबित हो रहा है। पिछले छह महीनों में सोने की कीमत में 54 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। मंगलवार को सोने में मामूली एक प्रतिशत की गिरावट आई और यह 5,154 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता रहा। यह तुलना बेहद दिलचस्प है। जहां Bitcoin अपने शिखर से आधा हो गया वहीं सोना अपने पांच साल के उच्च स्तर के आसपास टिका हुआ है। वैश्विक अनिश्चितता और आर्थिक उठापटक के दौर में निवेशक एक बार फिर पारंपरिक और सुरक्षित निवेश की तरफ लौट रहे हैं।
क्रिप्टोकरेंसी क्या होती है और क्यों है इतनी अस्थिर?
जो लोग क्रिप्टोकरेंसी की दुनिया से परिचित नहीं हैं उनके लिए समझना जरूरी है कि यह एक डिजिटल या आभासी मुद्रा होती है जिसे क्रिप्टोग्राफी नामक जटिल कंप्यूटर तकनीक से सुरक्षित किया जाता है। यह किसी केंद्रीय बैंक या सरकार के नियंत्रण में नहीं होती और ब्लॉकचेन नामक एक विकेंद्रीकृत तकनीक पर चलती है जिसमें हजारों कंप्यूटर मिलकर लेनदेन को सत्यापित करते हैं। इसी विकेंद्रीकृत प्रकृति की वजह से क्रिप्टोकरेंसी की कीमतें बाजार की मांग और आपूर्ति पर निर्भर करती हैं और किसी भी बड़ी खबर या घटना का इन पर तुरंत और तीव्र असर पड़ता है। यही कारण है कि क्रिप्टो में एक दिन में ही पांच से दस प्रतिशत तक का उतार-चढ़ाव देखना असामान्य नहीं है।
भारतीय निवेशकों के लिए जरूरी सलाह यह है कि क्रिप्टोकरेंसी में निवेश से पहले इसके उच्च जोखिम को भली-भांति समझें और केवल उतनी ही राशि लगाएं जिसके डूब जाने पर आपकी आर्थिक स्थिति पर कोई गंभीर असर न पड़े।
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