ईरान के आत्मघाती बोट हमले में बिहार के मर्चेंट नेवी इंजीनियर देओनंदन प्रसाद सिंह की मौत, फारस की खाड़ी में अमेरिकी तेल टैंकर पर धमाके से मचा हड़कंप
फारस की खाड़ी में तेल टैंकर पर आत्मघाती बोट हमला, 15 भारतीय नाविक सुरक्षित बचाए गए
Bihar sailor death: मिडिल ईस्ट में जारी जंग का आज 14वां दिन है और इस युद्ध की आग अब एक भारतीय परिवार तक भी पहुंच गई है। फारस की खाड़ी में एक अमेरिकी तेल टैंकर पर ईरान की आत्मघाती बोट के हमले में एक भारतीय इंजीनियर की दर्दनाक मौत हो गई है। मृतक की पहचान बिहार निवासी देओनंदन प्रसाद सिंह के रूप में हुई है, जो इस जहाज पर अतिरिक्त चीफ इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। इस हादसे में 15 अन्य भारतीय क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बचा लिया गया है।
Bihar sailor death: किस जहाज पर हुआ हमला
मार्शल आइलैंड्स के झंडे तले चलने वाला अमेरिकी तेल टैंकर MT सेफसी विष्णु इराक के बसरा के पास खोर अल जुबैर बंदरगाह के निकट कार्गो लोडिंग ऑपरेशन में लगा हुआ था। यह जहाज इराक के बसरा तट के पास उत्तरी फारस की खाड़ी से गुजर रहा था, तभी अचानक एक सफेद रंग की मानवरहित स्पीडबोट तेजी से आई और जहाज के स्टारबोर्ड हिस्से से जा टकराई। इस स्पीडबोट में विस्फोटक भरे होने की आशंका है। टक्कर के तुरंत बाद जहाज पर एक के बाद एक दो जोरदार धमाके हुए और पूरा टैंकर आग की चपेट में आ गया।
Bihar sailor death: रेस्क्यू ऑपरेशन और बचाव कार्य
धमाके इतने भीषण थे कि जहाज पर सवार सभी क्रू मेंबर्स को अपनी जान बचाने के लिए समुद्र में कूदना पड़ा। आसपास मौजूद एक एसटीएस टग ने तत्काल बचाव अभियान चलाया और डूब रहे क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद इराकी कोस्ट गार्ड ने भी मोर्चा संभाला और शेष बचे 27 क्रू मेंबर्स को रेस्क्यू किया। इस हमले में बचाए गए 27 क्रू मेंबर्स में 15 भारतीय नागरिक और 12 फिलीपीनी नागरिक शामिल हैं। सभी बचे हुए भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और उन्हें जरूरी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
Bihar sailor death: कौन थे देओनंदन प्रसाद सिंह
इस हमले में जान गंवाने वाले देओनंदन प्रसाद सिंह मूल रूप से बिहार के रहने वाले थे। वे जहाज पर अतिरिक्त चीफ इंजीनियर यानी सुपरिंटेंडेंट के पद पर कार्यरत थे। मुंबई के कांदिवली स्थित रहेजा टावर में उनका निवास था। एक अनुभवी मर्चेंट नेवी इंजीनियर के रूप में उन्होंने अपना पूरा करियर समुद्री सेवा को समर्पित किया था। उनकी असमय मृत्यु न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक गहरे दुख का विषय है।
Bihar sailor death: ईरान ने क्यों किया हमला
ईरान की तरफ से इस हमले को लेकर सफाई दी गई है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर यानी आईआरजीसी का कहना है कि उन्होंने पहले इस टैंकर को चेतावनी दी थी कि वह उत्तरी फारस की खाड़ी से न गुजरे, लेकिन चेतावनी के बावजूद जहाज ने अपना रास्ता नहीं बदला, इसलिए उस पर हमला किया गया। गौरतलब है कि 28 फरवरी को मिडिल ईस्ट में जंग की शुरुआत के बाद से अब तक ईरान इस क्षेत्र में 18 तेल टैंकरों को निशाना बना चुका है।
Bihar sailor death: पीएम मोदी की कूटनीतिक पहल
इस घटना के बाद भारत सरकार तुरंत हरकत में आई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से सीधे फोन पर बात की। इस बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और भारतीय तेल टैंकरों की फारस की खाड़ी में सुरक्षित आवाजाही को भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। पीएम मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत इस क्षेत्र में शांति का समर्थक है और संघर्ष को बढ़ावा देने वाली किसी भी कार्रवाई का विरोध करता है।
Bihar sailor death: भारत पर क्या है असर
मिडिल ईस्ट में जारी यह संघर्ष भारत के लिए कई स्तरों पर गंभीर चुनौती बन चुका है। एक तरफ फारस की खाड़ी में भारतीय नाविकों की जान खतरे में है तो दूसरी तरफ इस क्षेत्र से होने वाली तेल आपूर्ति बाधित होने से देश में ईंधन संकट गहराता जा रहा है। पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की किल्लत से आम आदमी की जिंदगी प्रभावित हो रही है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से पूरा करता है। ऐसे में इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर पड़ता है।
Bihar sailor death: क्या है आगे की चुनौती
देओनंदन प्रसाद सिंह की मौत ने यह साफ कर दिया है कि मिडिल ईस्ट का यह युद्ध अब केवल उस क्षेत्र की समस्या नहीं रही। इसकी लपटें भारत तक पहुंच चुकी हैं। हजारों भारतीय नाविक और कामगार इस क्षेत्र में काम करते हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे, तेल आपूर्ति में बाधा और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, इन तीनों मोर्चों पर भारत सरकार को एक साथ काम करना होगा।
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