उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा झटका! पिटकुल MD यूसी ध्यानी की नियुक्ति रद्द, जानें पूरा मामला

पिटकुल MD यूसी ध्यानी की नियुक्ति रद्द, 2021 नियमावली का उल्लंघन; कोर्ट ने दी सख्त टिप्पणी

0

Uttarakhand High Court: उत्तराखंड से एक बड़ी खबर सामने आई है जिसने राज्य के ऊर्जा विभाग में हलचल मचा दी है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की नैनीताल स्थित दो न्यायाधीशों की खंडपीठ ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पॉवर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड यानी पिटकुल के प्रबंध निदेशक पद पर यूसी ध्यानी की नियुक्ति को पूरी तरह अवैध करार दे दिया है। कोर्ट ने यह नियुक्ति रद्द करते हुए साफ कहा कि इस पद पर नियुक्ति करते समय साल 2021 में बनाई गई नियमावली का खुलेआम उल्लंघन किया गया। इस फैसले ने राज्य सरकार और ऊर्जा विभाग के अधिकारियों की नींद उड़ा दी है।

Uttarakhand High Court: क्या है पूरा मामला

उत्तराखंड में ऊर्जा क्षेत्र के तीन प्रमुख निगम हैं जिनमें पिटकुल यानी पॉवर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड, यूपीसीएल यानी उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड और यूजेवीएनएल यानी उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड शामिल हैं। इन तीनों निगमों में प्रबंध निदेशक और निदेशक के पदों पर नियुक्ति के लिए साल 2021 में एक विस्तृत नियमावली तैयार की गई थी।

इस नियमावली का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि इन महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति में पारदर्शिता बनी रहे और योग्य व्यक्ति ही इन जिम्मेदारियों को संभालें। लेकिन जब यूसी ध्यानी को पिटकुल के प्रबंध निदेशक पद पर नियुक्त किया गया तो इस नियमावली की पूरी तरह अनदेखी की गई। इसी को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।

Uttarakhand High Court: कोर्ट ने क्या कहा अपने फैसले में

उत्तराखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए यूसी ध्यानी की नियुक्ति को अवैध घोषित किया। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि ध्यानी को पिटकुल के प्रबंध निदेशक पद पर नियुक्त करते समय ऊर्जा के तीनों निगमों में नियुक्ति के लिए बनाई गई 2021 की नियमावली की साफ तौर पर अवहेलना की गई।

कोर्ट ने यह भी कहा कि जब नियमावली मौजूद हो और उसे बाकायदा लागू किया गया हो तो उसकी अनदेखी करके की गई कोई भी नियुक्ति कानूनी रूप से वैध नहीं मानी जा सकती। इसीलिए कोर्ट ने इस नियुक्ति को रद्द कर दिया। यह फैसला न सिर्फ इस मामले के लिए बल्कि राज्य में सरकारी नियुक्तियों की प्रक्रिया के लिए भी एक बड़ा संदेश है।

Uttarakhand High Court: क्या है पिटकुल और उसका महत्व

पिटकुल यानी पॉवर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड उत्तराखंड राज्य का एक अत्यंत महत्वपूर्ण सरकारी निगम है। यह निगम राज्य में बिजली के पारेषण यानी ट्रांसमिशन का काम देखता है। सरल भाषा में कहें तो जो बिजली उत्पादन केंद्रों में बनती है उसे घरों, उद्योगों और दुकानों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी इसी निगम की होती है।

उत्तराखंड एक पहाड़ी राज्य है जहां बिजली का पारेषण तंत्र बेहद जटिल है। पहाड़ी इलाकों में बिजली की लाइनें बिछाना और उनका रखरखाव करना एक चुनौतीपूर्ण काम है। इसीलिए पिटकुल के प्रबंध निदेशक का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और इस पर योग्य and अनुभवी व्यक्ति की नियुक्ति जरूरी होती है।

Uttarakhand High Court: 2021 की नियमावली क्यों बनाई गई थी

साल 2021 में उत्तराखंड सरकार ने ऊर्जा के तीनों निगमों में नियुक्ति की प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए एक विस्तृत नियमावली तैयार की थी। इस नियमावली में यह स्पष्ट किया गया था कि प्रबंध निदेशक और निदेशक जैसे उच्च पदों पर नियुक्ति के लिए क्या योग्यताएं जरूरी हैं, चयन प्रक्रिया क्या होगी और किस तरह से उम्मीदवारों का मूल्यांकन किया जाएगा।

इस नियमावली का मकसद यह था कि इन महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति में राजनीतिक हस्तक्षेप और मनमानी न हो। लेकिन जैसा अक्सर होता है सरकारी तंत्र में नियमों की अनदेखी कर दी जाती है। यही इस मामले में भी हुआ और नियमावली की परवाह किए बिना नियुक्ति कर दी गई।

Uttarakhand High Court: राज्य के ऊर्जा विभाग पर असर

इस फैसले का असर उत्तराखंड के पूरे ऊर्जा विभाग पर पड़ने वाला है। पिटकुल जैसे महत्वपूर्ण निगम में प्रबंध निदेशक का पद खाली होने से प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो सकता है। अब राज्य सरकार को इस पद पर नई नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करनी होगी और इस बार 2021 की नियमावली का पूरी तरह पालन करना होगा।

यह फैसला यह भी बताता है कि अदालतें सरकारी नियुक्तियों पर नजर रख रही हैं और अगर नियमों का उल्लंघन होता है तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार के लिए यह एक बड़ा सबक है।

Uttarakhand High Court: राजनीतिक हलकों में हलचल

हाईकोर्ट के इस फैसले से राज्य के राजनीतिक हलकों में भी हलचल मच गई है। विपक्षी दलों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का आरोप है कि राज्य में सरकारी नियुक्तियों में नियमों की अनदेखी करना एक आम बात हो गई है और इसीलिए कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ रहा है।

सत्तारूढ़ दल की तरफ से अभी तक इस फैसले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। राज्य सरकार के कानूनी सलाहकार इस फैसले का अध्ययन कर रहे हैं और आगे की रणनीति तय की जाएगी।

Uttarakhand High Court: आगे क्या होगा

अब सवाल यह है कि आगे क्या होगा। पिटकुल के प्रबंध निदेशक पद पर नई नियुक्ति की प्रक्रिया कब शुरू होगी और इस बार क्या 2021 की नियमावली का पूरी तरह पालन किया जाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा। राज्य सरकार के पास यह विकल्प भी है कि वह इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे लेकिन अगर हाईकोर्ट का फैसला कानूनी रूप से मजबूत है तो ऐसा करना मुश्किल होगा।

इस मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारत में न्यायपालिका एक स्वतंत्र और मजबूत संस्था है जो सरकारी मनमानी पर लगाम लगाने में सक्षम है।

read more here

केजरीवाल बरी हुए तो छलके आंसू! दिल्ली से चंडीगढ़ तक AAP में जश्न, BJP ने कसा तंज

Chery KP31,- डीजल और इलेक्ट्रिक का धमाकेदार कॉम्बो, पिकअप की दुनिया बदलने आई यह गाड़ी!

ईरान पर आसमान से बरसी आग! इजरायल और अमेरिका ने एक साथ 30 ठिकानों को किया तबाह

‘The Kerala Story 2’ की रिलीज का रास्ता साफ, केरल हाई कोर्ट ने हटाया स्टे, उल्का गुप्ता और अदिति भाटिया हैं लीड रोल में

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.