प्रवासी मजदूरों को बड़ी राहत: 5 किलो एलपीजी सिलेंडर का दैनिक कोटा दोगुना, एक दिन में बिके 1.06 लाख सिलेंडर, सरकार ने क्यों लिया यह फैसला, खाड़ी तनाव के बीच मजदूरों की रसोई की समस्या हल
प्रवासी मजदूरों को राहत: 5 किलो एलपीजी सिलेंडर का दैनिक कोटा दोगुना, सोमवार को 1.06 लाख सिलेंडर बिके, खाड़ी तनाव के बीच सरकार का बड़ा फैसला
LPG Cylinder Crisis: केंद्र सरकार ने प्रवासी मजदूरों की मुश्किलों को ध्यान में रखते हुए 5 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर का दैनिक कोटा दोगुना कर दिया है। यह फैसला खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण गैस सप्लाई पर पड़ रहे असर को देखते हुए उठाया गया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि अब राज्यों को मार्च की शुरुआत वाली औसत दैनिक आपूर्ति का दोगुना कोटा दिया जा रहा है। सिर्फ सोमवार को ही पूरे देश में 1.06 लाख से ज्यादा 5 किलो वाले सिलेंडर बिक चुके हैं। यह कदम उन लाखों प्रवासी मजदूरों के लिए बड़ी राहत साबित होगा जो शहरों में काम की तलाश में आते हैं और उनके पास नियमित घरेलू गैस कनेक्शन नहीं होता। 14.2 किलो के सब्सिडी वाले सिलेंडर की तुलना में 5 किलो वाले सिलेंडर बाजार दर पर उपलब्ध होते हैं, लेकिन अब इनकी उपलब्धता बढ़ जाने से मजदूरों को रसोई जलाने में आसानी होगी।
सरकार का फैसला: क्यों बढ़ाया गया 5 किलो सिलेंडर का कोटा
पेट्रोलियम मंत्रालय ने 6 अप्रैल को सभी राज्यों को एक पत्र जारी कर 5 किलो एलपीजी सिलेंडर का दैनिक कोटा दोगुना करने का निर्देश दिया। सुजाता शर्मा ने मंगलवार को प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि खाड़ी देशों में चल रहे तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस सप्लाई प्रभावित हुई है। ऐसे में देश में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने और प्रवासी मजदूरों को परेशानी न हो, इसके लिए यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। सरकार का फोकस उन मजदूरों पर है जो निर्माण कार्य, छोटे उद्योगों और सेवाओं में लगे रहते हैं। इनके पास अक्सर स्थायी पता या LPG कनेक्शन नहीं होता, इसलिए वे छोटे 5 किलो सिलेंडर पर निर्भर रहते हैं। अब दैनिक कोटा बढ़ने से वितरक ज्यादा मात्रा में सिलेंडर उपलब्ध करा सकेंगे।
LPG Cylinder Crisis: दिल्ली में 549 रुपये है 5 किलो सिलेंडर, 14.2 किलो का 913 रुपये
दिल्ली में 5 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की बाजार कीमत 549 रुपये है, जबकि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत 913 रुपये है। 5 किलो वाला सिलेंडर पूरी तरह नॉन-सब्सिडी है और इसे कोई भी व्यक्ति आसानी से एलपीजी वितरक से पहचान पत्र दिखाकर खरीद सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस बढ़े हुए कोटे का फायदा मुख्य रूप से प्रवासी मजदूरों, छोटे होटल-ढाबा संचालकों और उन परिवारों को मिलेगा जिनके पास नियमित कनेक्शन नहीं है। इससे रसोई गैस की किल्लत दूर होगी और रोजमर्रा की जिंदगी थोड़ी आसान बनेगी।
LPG Cylinder Crisis: 23 मार्च से अब तक 7.8 लाख सिलेंडर बिके, सोमवार को रिकॉर्ड बिक्री
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 23 मार्च से लेकर अब तक पूरे देश में लगभग 7.8 लाख 5 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर बेचे जा चुके हैं। सिर्फ सोमवार को ही 1.06 लाख से अधिक सिलेंडर की बिक्री दर्ज की गई, जो इस योजना की सफलता को दिखाता है। सुजाता शर्मा ने कहा कि कोटा बढ़ाए जाने के बाद से बिक्री में तेजी आई है। कई राज्यों में मजदूरों की मांग को देखते हुए वितरण केंद्रों पर अतिरिक्त स्टॉक भेजा जा रहा है। इससे कालाबाजारी और जमाखोरी पर भी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
LPG Cylinder Crisis: कमर्शियल एलपीजी आपूर्ति में 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी
प्रवासी मजदूरों के अलावा सरकार ने कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति को भी पहले के स्तर से 70 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। होटल, रेस्तरां, ढाबे और छोटे उद्योग इस बढ़ी हुई आपूर्ति का फायदा उठा रहे हैं। पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद सरकार ने ईंधन आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए कई कदम उठाए हैं। 4,300 से ज्यादा छापेमारी अभियान चलाकर जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग पर नकेल कसी गई है।
LPG Cylinder Crisis: ईंधन की उपलब्धता पर सरकार का भरोसा, घबराहट में खरीदारी न करें
सुजाता शर्मा ने आम लोगों से अपील की है कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की किसी प्रकार की किल्लत की अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और सभी खुदरा बिक्री केंद्र सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे स्थानीय स्तर पर नियमित ब्रीफिंग करें और भ्रामक सूचनाओं पर तुरंत रोक लगाएं। सरकार का मानना है कि संकट की स्थिति में भी ईंधन आपूर्ति बिना किसी बाधा के जारी रहेगी।
LPG Cylinder Crisis: प्रवासी मजदूरों की समस्या और सरकार की संवेदनशीलता
भारत में करोड़ों प्रवासी मजदूर विभिन्न राज्यों में काम करते हैं। खासकर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, सूरत और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में इनकी संख्या बहुत ज्यादा है। इनमें से अधिकांश के पास स्थायी आवास या LPG कनेक्शन नहीं होता। वे रोजाना या साप्ताहिक आधार पर छोटे सिलेंडर खरीदते हैं। कोटा दोगुना करने का फैसला इन्हीं मजदूरों की दैनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है। इससे उनकी रसोई की समस्या हल होगी और वे बेहतर तरीके से काम पर फोकस कर सकेंगे।
LPG Cylinder Crisis: अन्य राज्यों में भी बढ़ी तैयारियां
उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में जहां प्रवासी मजदूरों की संख्या अधिक है, वहां अतिरिक्त कोटा भेजा जा रहा है। कई राज्यों के एलपीजी वितरकों ने बताया कि मांग बढ़ने के साथ स्टॉक की सप्लाई भी तेज कर दी गई है। सरकार ने सभी तेल कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे इस बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए रिफाइनरी स्तर पर उत्पादन बढ़ाएं।
LPG Cylinder Crisis: एलपीजी क्षेत्र में भविष्य की योजनाएं
सरकार प्रवासी मजदूरों और छोटे उपभोक्ताओं के लिए और अधिक सुविधाएं लाने की तैयारी कर रही है। भविष्य में 5 किलो सिलेंडर को और सस्ता बनाने या कुछ छूट देने पर भी विचार चल रहा है। साथ ही, डोरस्टेप डिलीवरी और डिजिटल बुकिंग सिस्टम को मजबूत किया जा रहा है।
निष्कर्ष: मजदूर हित में सरकार का सकारात्मक कदम
5 किलो एलपीजी सिलेंडर का कोटा दोगुना करना सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। खासकर वैश्विक स्तर पर ईंधन संकट की आशंका के बीच यह फैसला प्रवासी मजदूरों के लिए बड़ी राहत है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में बिक्री के आंकड़े कितने बढ़ते हैं और कितने मजदूर परिवारों को इसका लाभ मिल पाता है। सरकार का यह कदम न सिर्फ ईंधन उपलब्धता सुनिश्चित करेगा बल्कि आम जनता में विश्वास भी बढ़ाएगा।
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