Bengal Election 2026: ममता बनर्जी ने भवानीपुर से ठोकी ताल, 800 मीटर के मेगा पैदल मार्च के साथ दाखिल किया नामांकन
भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी का नामांकन, शुभेंदु अधिकारी से सीधी टक्कर, बंगाल चुनाव में बढ़ी सियासी गर्मी
Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने भवानीपुर विधानसभा सीट से अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। नामांकन दाखिल करने से पहले उन्होंने कालीघाट स्थित आवास से अलीपुर सर्वे बिल्डिंग तक लगभग 800 मीटर पैदल मार्च निकाला, जिसमें हजारों TMC कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। हाथ जोड़कर समर्थकों का अभिवादन करते हुए ममता बनर्जी ने भवानीपुर से लेकर पूरे बंगाल में TMC की जीत सुनिश्चित करने की अपील की।
यह नामांकन 2026 के विधानसभा चुनावों की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भवानीपुर सीट ममता बनर्जी की पारंपरिक सीट रही है और यहां से उन्होंने तीन बार विधायक का चुनाव लड़ा है। इस बार उनका मुकाबला भाजपा के शुभेंदु अधिकारी से होगा, जिसने पिछले सप्ताह अमित शाह की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया था। दोनों नेताओं के बीच यह लड़ाई अब प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है और पूरे राज्य की राजनीति का केंद्र बिंदु बन चुकी है।
कालीघाट की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब
नामांकन दाखिल करने के लिए ममता बनर्जी जब कालीघाट से रवाना हुईं तो उनके साथ TMC कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ थी। ममता अपने चिरपरिचित अंदाज में हाथ जोड़कर समर्थकों का अभिवादन करती रहीं। लगभग 800 मीटर की यह पैदल यात्रा ममता की फिटनेस और जनसमर्थन दोनों को दर्शाती रही।
पैदल मार्च के दौरान सड़क के दोनों ओर TMC झंडे और पोस्टर लहरा रहे थे। कार्यकर्ता ‘जय बांग्ला’ और ‘ममता दीदी जिंदाबाद’ के नारे लगा रहे थे। नामांकन दाखिल करने के बाद ममता बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैं भवानीपुर के लोगों से अपील करती हूं कि वे TMC को जिताएं। सिर्फ भवानीपुर नहीं, बंगाल की सभी 294 सीटों पर TMC की जीत सुनिश्चित करें।”
उन्होंने SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट से नाम कटने पर दुख जताया और कहा कि यह लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है।
क्यों ‘मिनी इंडिया’ कहलाने वाली यह सीट है बंगाल का दिल?
भवानीपुर कोलकाता का एक विविधतापूर्ण इलाका है, जिसे अक्सर ‘मिनी इंडिया’ कहा जाता है। यहां बंगाली मध्यमवर्गीय परिवारों के अलावा मारवाड़ी, गुजराती, पंजाबी, सिख, जैन और बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी रहती है।
आंकड़ों के अनुसार, भवानीपुर में लगभग 42 प्रतिशत बंगाली हिंदू, 34 प्रतिशत गैर-बंगाली हिंदू और 24 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं। कुल मतदाताओं में करीब 75 प्रतिशत हिंदू हैं। इस विविधता के कारण भवानीपुर पूरे बंगाल की राजनीति का आईना माना जाता है। यहां की जीत को पूरे राज्य की राजनीतिक दिशा का संकेत माना जाता है।
ममता बनर्जी इस सीट से पहले भी तीन बार जीत चुकी हैं। 2021 में भी उन्होंने यहां से चुनाव लड़ा था। इस बार शुभेंदु अधिकारी जैसे मजबूत विरोधी के सामने उनकी चुनौती बढ़ गई है।
ममता बनर्जी बनाम शुभेंदु अधिकारी – बंगाल की सबसे बड़ी ‘रॉयल रंबल’
भाजपा ने शुभेंदु अधिकारी को भवानीपुर से उम्मीदवार बनाकर ममता बनर्जी को सीधी चुनौती दी है। शुभेंदु अधिकारी TMC छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले प्रमुख नेताओं में से एक हैं और वे ममता बनर्जी के कट्टर विरोधी माने जाते हैं।
पिछले सप्ताह शुभेंदु ने अमित शाह की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया था। उन्होंने कहा था कि भवानीपुर से जीतकर वे ममता बनर्जी की तानाशाही का अंत करेंगे। अब दोनों नेताओं के बीच यह मुकाबला व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों स्तर पर बेहद दिलचस्प हो गया है।
बंगाली अस्मिता और विकास के दम पर किला बचाने की तैयारी
ममता बनर्जी नामांकन के बाद दिए बयान में बार-बार बंगाली अस्मिता, विकास और लोकतंत्र की रक्षा की बात की। उन्होंने SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए और कहा कि लाखों नाम वोटर लिस्ट से गायब हो गए हैं।
TMC की रणनीति इस बार बंगाली गौरव, ‘जय बांग्ला’ और केंद्र सरकार के खिलाफ ‘बाहरी ताकतों’ का मुद्दा उठाने पर केंद्रित है। ममता पूरे राज्य में 294 सीटों पर जीत का लक्ष्य रख रही हैं और भवानीपुर को इसके लिए प्रतीकात्मक केंद्र बनाया जा रहा है।
‘परिवर्तन’ का नारा और हिंदुत्व कार्ड से घेराबंदी
भाजपा शुभेंदु अधिकारी के जरिए ममता बनर्जी के खिलाफ ‘परिवर्तन’ का नारा दे रही है। पार्टी का फोकस भ्रष्टाचार, तुष्टिकरण और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर है। अमित शाह और अन्य केंद्रीय नेताओं की सक्रियता से भाजपा भवानीपुर में मजबूत लड़ाई लड़ने की तैयारी में है।
क्या ये नतीजे तय करेंगे बंगाल का भविष्य?
2026 के विधानसभा चुनाव बंगाल की राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं। ममता बनर्जी के लिए यह चुनाव सत्ता बचाने की लड़ाई है, जबकि भाजपा सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस भी मैदान में है, लेकिन मुख्य लड़ाई TMC और BJP के बीच ही मानी जा रही है।
भवानीपुर की लड़ाई पूरे चुनाव का ट्रेंड सेट कर सकती है। अगर ममता यहां से जीतीं तो TMC का मनोबल बढ़ेगा। वहीं शुभेंदु की जीत भाजपा के लिए बड़ा नैतिक और राजनीतिक विजय होगी।
बंगाली, गैर-बंगाली और मुस्लिम मतदाताओं का त्रिकोणीय प्रभाव
भवानीपुर में वोट बैंक का समीकरण जटिल है। बंगाली हिंदू, गैर-बंगाली हिंदू और मुस्लिम मतदाताओं के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है। TMC मुस्लिम और बंगाली वोट बैंक पर भरोसा करती है, जबकि भाजपा हिंदू वोटों को एकजुट करने की कोशिश कर रही है।
पिछले चुनावों में ममता बनर्जी ने यहां अच्छा मार्जिन से जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार शुभेंदु अधिकारी जैसे मजबूत उम्मीदवार के आने से मुकाबला कड़ा हो गया है।
‘नफरत नहीं, विकास चाहती है जनता’
नामांकन दाखिल करने के बाद ममता बनर्जी ने TMC कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता विकास चाहती है, न कि नफरत। उन्होंने केंद्र सरकार पर बंगाल को निशाना बनाने का आरोप लगाया और कार्यकर्ताओं से पूरे राज्य में सक्रिय रहने की अपील की।
SIR प्रक्रिया और गायब होते मतदाताओं पर ममता के सवाल
SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को लेकर ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से मुलाकात की मांग की है। उनके अनुसार लाखों नाम वोटर लिस्ट से गायब हो गए हैं, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है। भाजपा ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताया है।
बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच व्यक्तिगत वैमनस्य काफी पुराना है। शुभेंदु के भाजपा में जाने के बाद यह वैमनस्य और बढ़ गया है। भवानीपुर इस वैमनस्य का नया मैदान बन गया है।
Bengal Election 2026: 2026 के महामुकाबले का औपचारिक शंखनाद
ममता बनर्जी द्वारा भवानीपुर से नामांकन दाखिल करना 2026 बंगाल विधानसभा चुनाव की शुरुआत का प्रतीक है। यह सीट अब पूरे चुनाव का केंद्र बन गई है। पैदल मार्च, भारी जनसमर्थन और आक्रामक बयानों से ममता ने अपना दम दिखाया है।
अब देखना होगा कि 23 और 29 अप्रैल को मतदान के बाद भवानीपुर की जनता किसके पक्ष में फैसला सुनाती है। यह फैसला पूरे बंगाल की राजनीति की दिशा तय करेगा।
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