Bengal Election 2026: ओवैसी ने चला ‘चुनावी दांव’, AIMIM की पहली लिस्ट में 12 उम्मीदवारों का ऐलान, हुमायूं कबीर की पार्टी से मिलाया हाथ
एआईएमआईएम ने 12 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की, एजेयूपी के साथ गठबंधन, मुस्लिम बहुल सीटों पर फोकस
Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल की सियासी सरगर्मी तेज होते ही असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने विधानसभा चुनाव 2026 के लिए अपनी पहली उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है। पार्टी ने 12 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है, जो मुख्य रूप से मुस्लिम बहुल क्षेत्रों से चुनाव लड़ेंगे। यह लिस्ट तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व नेता हुमायूं कबीर की नवगठित आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के साथ गठबंधन के तहत जारी की गई है।
इस गठबंधन से बंगाल की राजनीति में नया समीकरण उभरता दिख रहा है। AIMIM और AJUP मिलकर अल्पसंख्यक वोट बैंक को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं, जहां सत्ताधारी TMC और मुख्य विपक्षी भाजपा के बीच पहले से ही कड़ी टक्कर है। ओवैसी की पार्टी का फोकस उन मुद्दों पर है जो अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े हैं, जैसे वोटर लिस्ट से नाम हटाना, प्रमाण पत्र रद्द होना और सामाजिक न्याय।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यह पहली लिस्ट है और आगे और नाम घोषित किए जा सकते हैं। गठबंधन के तहत AIMIM लगभग 8-12 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी, जबकि AJUP बड़ी संख्या में सीटों पर दावेदारी करेगी।
मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर 24 परगना की सीटों पर कब्जा करने की तैयारी
AIMIM ने अपनी पहली लिस्ट में कई महत्वपूर्ण सीटों पर मजबूत उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। लिस्ट में शामिल प्रमुख नाम और उनकी सीटें इस प्रकार हैं:
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रघुनाथगंज: इमरान सोआंकी
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आसनसोल उत्तर: दानिश अजीज
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कांडी: मिस्बाहुल इस्लाम खान
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सुजापुर: रेजाउल करीम
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मोथाबाड़ी: एडवोकेट मोहम्मद मुस्तहिद हक
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नलहाटी: हाजी अंसार शेख साहब
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मुरारई: तासीर शेख साहब
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बारासात: मोनैम सरदार
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करणदिघी: मेहबूब आलम
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सुती: असदुल एसके
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बशीरहाट दक्षिण: शबाना परवीन
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हाबरा: असिक राज मोंडल
ये सभी सीटें मुर्शिदाबाद, मालदा, बीरभूम, उत्तर 24 परगना और अन्य मुस्लिम प्रभाव वाले क्षेत्रों में हैं। पार्टी का दावा है कि इन उम्मीदवारों को स्थानीय स्तर पर अच्छी पकड़ है और वे अल्पसंख्यक समुदाय के मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे।
क्या TMC के ‘वोट बैंक’ में सेंध लगाएगा यह नया गठबंधन?
हुमायूं कबीर, जो पहले TMC में सक्रिय थे, अब अपनी पार्टी AJUP के माध्यम से नई राजनीतिक पहचान बना रहे हैं। उन्होंने हाल ही में मुर्शिदाबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर AJUP के 149 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की थी। अब AIMIM के साथ गठबंधन ने इस गठजोड़ को मजबूती दी है।
कबीर ने ओवैसी को अपना ‘बड़ा भाई’ बताते हुए कहा है कि यह गठबंधन अल्पसंख्यकों और पिछड़ों के हक के लिए है। गठबंधन के तहत AJUP लगभग 182 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जिसमें AIMIM को कुछ सीटें दी गई हैं। दोनों पार्टियां मिलकर मुस्लिम बहुल इलाकों में वोट काटने की रणनीति पर काम कर रही हैं।
23 और 29 अप्रैल को महामुकाबला, 4 मई को आएंगे नतीजे
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव दो चरणों में होंगे।
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पहला चरण (23 अप्रैल 2026): 152 सीटों पर मतदान होगा। इसमें पुरुलिया, बांकुरा, झाड़ग्राम, बीरभूम, मिदनापुर, जलपाईगुड़ी, मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर बंगाल के जिले शामिल हैं।
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दूसरा चरण (29 अप्रैल 2026): शेष 142 सीटों पर वोटिंग होगी। इसमें कोलकाता, हावड़ा, हुगली और 24 परगना जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।
वोटों की गिनती 4 मई 2026 को होगी और परिणाम उसी दिन घोषित किए जाएंगे। चुनाव आयोग ने पूरे राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू कर दी है।
‘TMC ने मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक समझा, हक नहीं दिया’
असदुद्दीन ओवैसी ने गठबंधन की घोषणा के समय TMC सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बंगाल में मुस्लिम समुदाय के साथ कई स्तरों पर अन्याय हो रहा है। ओवैसी ने दावा किया कि राज्य में पांच लाख से ज्यादा पिछड़े वर्ग के प्रमाण पत्र रद्द किए गए, जिनमें ज्यादातर मुस्लिम प्रभावित हैं।
उन्होंने आगे कहा, “लोगों को सांस लेने की जगह नहीं मिल रही है। TMC ने अल्पसंख्यकों को सिर्फ वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया है, लेकिन उनके विकास के लिए कुछ नहीं किया।” ओवैसी का यह बयान उन इलाकों में गूंज रहा है, जहां हाल ही में D-voter और वोटर लिस्ट से संबंधित विवाद सामने आए हैं।
क्या त्रिकोणीय मुकाबले में फंसेगी ममता बनर्जी की ‘दीदी’ सरकार?
राजनीतिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि AIMIM-AJUP गठबंधन मुस्लिम बहुल सीटों पर TMC के वोट शेयर को प्रभावित कर सकता है। बंगाल में अल्पसंख्यक मतदाता कुल वोटों का करीब 27-30 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। अगर ये वोट बंटते हैं तो TMC को कई सीटों पर नुकसान हो सकता है।
भाजपा इस स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश कर रही है। पार्टी का कहना है कि TMC की “तुष्टिकरण की राजनीति” के कारण ही छोटी पार्टियां उभर रही हैं। वहीं वामपंथी दल भी अपनी स्थिति मजबूत करने में लगे हैं।
कानून-व्यवस्था, विकास और अल्पसंख्यक सुरक्षा पर टिकी नजरें
2026 का बंगाल चुनाव मुख्य रूप से तीन बड़े मुद्दों पर केंद्रित होने वाला है। पहला, कानून-व्यवस्था, जिसमें हाल की हिंसक घटनाएं और अधिकारियों को बंधक बनाने के मामले शामिल हैं। दूसरा मुद्दा विकास और बेरोजगारी है। तीसरा और सबसे संवेदनशील मुद्दा अल्पसंख्यक अधिकार और सामाजिक न्याय है। D-voter, NRC जैसे मुद्दे और हाल के प्रोटेस्ट ने इस बहस को और तेज कर दिया है।
किंगमेकर बनेंगे ओवैसी या सिर्फ ‘वोट कटवा’ बनकर रह जाएगी पार्टी?
AIMIM का बंगाल में विस्तार लंबे समय से चर्चा में रहा है। AJUP के साथ गठबंधन ने उन्हें स्थानीय स्तर पर आधार दिया है। हुमायूं कबीर TMC के पूर्व नेता होने के कारण कई स्थानीय कार्यकर्ताओं को अपनी ओर खींच सकते हैं।
हालांकि चुनौतियां भी कम नहीं हैं। मुख्य पार्टियों की रणनीति गठबंधन के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है। विश्लेषक मानते हैं कि यह गठबंधन मुख्य रूप से ‘वोट कटवा’ के रूप में काम कर सकता है, लेकिन अगर TMC की लोकप्रियता में गिरावट आई तो इसका असर बड़े पैमाने पर देखने को मिल सकता है।
Bengal Election 2026: निष्कर्ष
TMC, भाजपा, वाम दलों और कांग्रेस के बाद अब AIMIM-AJUP गठबंधन की इस पहली लिस्ट ने बंगाल के चुनावी शोर में नई हलचल पैदा कर दी है। अब देखना होगा कि 23 और 29 अप्रैल को मतदाता इन उम्मीदवारों को कितना समर्थन देते हैं और 4 मई को बंगाल की सत्ता की चाबी किसके हाथ आती है।
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