Bengal Chunav 2026: कांग्रेस का ‘एकला चलो रे’ दांव, 284 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी, बहरामपुर से ताल ठोकेंगे अधीर रंजन चौधरी

284 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी, बहरामपुर से अधीर रंजन मैदान में, बंगाल में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार

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Bengal Chunav 2026: पश्चिम बंगाल की सियासी सरगर्मी अब चरम पर पहुंच गई है। विधानसभा चुनाव 2026 के लिए कांग्रेस पार्टी ने अपनी पहली बड़ी लिस्ट जारी कर दी है। कुल 294 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस ने 284 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। पार्टी इस बार अकेले ही चुनाव लड़ने का फैसला कर चुकी है। बाकी 10 सीटों पर नामों की घोषणा अभी बाकी है।

खास बात यह है कि कांग्रेस ने अपने सबसे कद्दावर नेता अधीर रंजन चौधरी को बहरामपुर से टिकट दे दिया है। लगभग 30 साल बाद अधीर विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। यह फैसला पार्टी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि बहरामपुर उनका पारंपरिक गढ़ रहा है और उनके मैदान में उतरने से कार्यकर्ताओं में नया जोश है।

तीसरे विकल्प की तलाश: क्यों कांग्रेस ने ठुकराया गठबंधन का हाथ?

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस लंबे समय से संघर्ष कर रही है। 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी सिर्फ 2 सीटें जीत पाई थी। अब 2026 में कांग्रेस ने मजबूती दिखाते हुए अकेले मैदान में उतरने का साहसिक फैसला लिया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह रणनीति राज्य में अपना खोया हुआ आधार दोबारा हासिल करने के लिए है।

284 उम्मीदवारों की सूची में युवाओं के साथ-साथ पुराने और अनुभवी चेहरों का संतुलन बनाया गया है। कांग्रेस का लक्ष्य TMC और BJP के द्विध्रुवीय मुकाबले के बीच खुद को एक मजबूत तीसरे विकल्प के रूप में स्थापित करना है। हालांकि, जानकार इसे वोटों के ध्रुवीकरण के लिहाज से चुनौतीपूर्ण मान रहे हैं।

बहरामपुर का ‘रॉबिनहुड’: 3 दशकों बाद विधानसभा की दहलीज पर अधीर

अधीर रंजन चौधरी बंगाल कांग्रेस के निर्विवाद सेनापति हैं। कई बार लोकसभा सांसद रहने के बाद अब वे बहरामपुर विधानसभा सीट से अपनी किस्मत आजमाएंगे। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, यह कदम ममता बनर्जी के गढ़ में सेंध लगाने की एक बड़ी योजना का हिस्सा है।

अधीर पिछले कई सालों से राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ सबसे प्रखर आवाज रहे हैं। विधानसभा चुनाव लड़ने से न केवल बहरामपुर बल्कि आसपास की सीटों पर भी कांग्रेस को मजबूती मिलने की उम्मीद है। उनके समर्थकों का मानना है कि ‘दादा’ की मौजूदगी से नतीजे चौंकाने वाले हो सकते हैं।

भवानीपुर में महामुकाबला: दीदी के गढ़ में त्रिकोणीय जंग के आसार

चुनावी चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र भवानीपुर सीट है। यहां कांग्रेस ने प्रदीप प्रसाद को मैदान में उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। इस हाई-प्रोफाइल सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का वर्चस्व रहा है, वहीं बीजेपी ने यहां सुवेंदु अधिकारी को उतारकर अपनी मंशा साफ कर दी है।

भवानीपुर में अब ममता, सुवेंदु और प्रदीप प्रसाद के बीच त्रिकोणीय लड़ाई तय है। कांग्रेस इसे महज एक सीट नहीं, बल्कि सत्ता के शीर्ष को चुनौती देने के अवसर के रूप में देख रही है। प्रदीप प्रसाद की स्थानीय सक्रियता इस मुकाबले को और भी कड़ा बना सकती है।

मालतीपुर से मौसम नूर और क्षेत्रीय समीकरणों पर फोकस

कांग्रेस की लिस्ट में मौसम नूर को मालतीपुर सीट से जिम्मेदारी दी गई है। मौसम नूर पार्टी का युवा और प्रभावशाली चेहरा हैं। उनके अलावा कई दिग्गज नेताओं को उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों में उतारा गया है। कांग्रेस ने इस बार जातीय, भाषाई और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की पूरी कोशिश की है ताकि समाज के हर वर्ग तक पहुंच बनाई जा सके।

बंगाल रण का पूरा शेड्यूल: दो चरणों में होगा सत्ता का फैसला

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 दो चरणों में संपन्न होगा, जिसका कार्यक्रम इस प्रकार है:

  • पहला चरण: 23 अप्रैल (152 सीटें) – अधिसूचना 30 मार्च।

  • दूसरा चरण: 29 अप्रैल (148 सीटें) – अधिसूचना 2 अप्रैल।

  • नामांकन: पहले चरण के लिए 6 अप्रैल और दूसरे के लिए 9 अप्रैल तक।

  • परिणाम: 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे।

प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए दो चरणों के बीच छह दिन का पर्याप्त समय रखा है।

क्या कांग्रेस बिगाड़ेगी TMC और BJP का खेल?

पिछले एक दशक से बंगाल की सत्ता पर TMC का कब्जा है और BJP मुख्य विपक्षी दल बनकर उभरी है। ऐसे में कांग्रेस का अकेले लड़ना एक ‘वाइल्ड कार्ड’ एंट्री जैसा है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इससे सत्ता विरोधी वोटों का बिखराव हो सकता है, जिससे सीधे तौर पर TMC को फायदा मिल सकता है। वहीं, कांग्रेस का मानना है कि अधीर रंजन जैसे चेहरों के आने से वे उन मतदाताओं को खींच पाएंगे जो फिलहाल दोनों बड़े दलों से असंतुष्ट हैं।

Bengal Chunav 2026: 4 मई को तय होगा बंगाल का भविष्य

कांग्रेस ने 284 उम्मीदवारों के साथ अपनी गंभीरता और तैयारी का ट्रेलर दिखा दिया है। अधीर रंजन चौधरी का बहरामपुर से लड़ना और भवानीपुर की कांटे की टक्कर ने इस चुनाव को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है। अब देखना यह है कि 4 मई को जनता कांग्रेस को दोबारा संजीवनी देती है या मुकाबला फिर से दो बड़े ध्रुवों के बीच ही सिमट कर रह जाता है। बंगाल की जनता का मूड क्या है, इसका असली पता 4 मई को ही चलेगा।

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