Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी की असली धूम देखनी है तो इन 5 जगहों पर बनाएं घूमने का प्लान, रंगों और उत्सव का अनूठा अनुभव
23 जनवरी को मनाई जाएगी बसंत पंचमी, जयपुर से कोलकाता तक जानें कहां होता है सबसे खास उत्सव
Basant Panchami 2026: क्या आपने महसूस किया कि सर्दियों की ठिठुरन धीरे-धीरे कम हो रही है और मौसम एक सुहानी करवट ले रहा है? यह इशारा है कि बसंत ऋतु का आगमन हो रहा है। बसंत पंचमी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भारत में बसंत ऋतु के स्वागत का उत्सव है। यह पर्व प्रेम, रंगों और नए-पन का प्रतीक है। ज्ञान, विद्या और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित इस दिन हर तरफ पीला रंग छाया रहता है, चाहे वह कपड़े हों, फूल हों या फिर भोजन।
भारत के अलग-अलग हिस्सों में लोग इस फेस्टिवल को अपने अनोखे अंदाज से मनाते हैं। 23 जनवरी 2026 को अगर आप इस त्योहार का असली जादू देखना चाहते हैं, तो इन पांच जगहों की सैर जरूर करें। हर जगह की अपनी खासियत है और बसंत पंचमी मनाने का अपना अलग अंदाज।
जयपुर, राजस्थान – पतंगों का आसमान

जयपुर में बसंत पंचमी (Basant Panchami 2026) का दूसरा नाम ही पतंगबाजी है। इस दिन गुलाबी नगर का पूरा आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। सुबह से लेकर शाम तक लोग अपनी छतों पर जमा होते हैं, जहां संगीत बजता है और हंसी-ठिठोली का माहौल रहता है। मंदिर और महल रोशनी से जगमगा उठते हैं और बाजार पीले कपड़ों से सजे नजर आते हैं।
जयपुर में इस त्योहार के दौरान एक अलग ही रौनक और उत्सव का अहसास होता है। हवा महल, जंतर मंतर और सिटी पैलेस जैसी ऐतिहासिक इमारतों की पृष्ठभूमि में उड़ती रंगीन पतंगें एक अद्भुत नजारा पेश करती हैं। बाजारों में पतंग और माँझे की दुकानें सजी होती हैं और लोग अपनी पसंदीदा पतंगें खरीदने के लिए उत्सुक रहते हैं।
शहर के पुराने इलाकों में पतंगबाजी की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। परिवार और दोस्त एक साथ मिलकर इस दिन का आनंद लेते हैं। घरों में विशेष पकवान बनाए जाते हैं और पीले रंग के व्यंजनों को खास तवज्जो दी जाती है। केसर की खीर, बेसन के लड्डू और तिल के व्यंजन इस दिन की खासियत होते हैं।
Basant Panchami 2026: वृंदावन, उत्तर प्रदेश – होली की शुरुआत
वृंदावन में बसंत पंचमी (Basant Panchami 2026) का मतलब केवल बसंत ऋतु का स्वागत नहीं, बल्कि होली की शुरुआत है। यहां इस दिन से ही रंगों का उत्सव शुरू हो जाता है, जो अगले 40 दिनों तक चलता है। बांके बिहारी मंदिर में भगवान को पीले वस्त्र और फूलों से सजाया जाता है। सबसे खास बात यह है कि इस दिन ठाकुर जी को पहली बार गुलाल का टीका लगाया जाता है, जो ब्रज में होली के आगाज का प्रतीक है।
इस दुर्लभ नजारे को देखने और पीले गेंदे के फूलों से सजे शहर का आनंद लेने के लिए देश भर से भक्त यहां आते हैं। मंदिर परिसर में भक्ति संगीत और कीर्तन का माहौल रहता है। राधा रानी मंदिर, प्रेम मंदिर और इस्कॉन मंदिर भी विशेष रूप से सजाए जाते हैं।
वृंदावन की गलियों में रंगों की बौछार और भक्ति के गीत एक अलग ही अनुभव देते हैं। यमुना नदी के घाटों पर आरती का दृश्य मन को शांति और आनंद से भर देता है। स्थानीय मिठाइयों और व्यंजनों का स्वाद लेना भी इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
वाराणसी, उत्तर प्रदेश – आध्यात्मिक अनुभव
वाराणसी में बसंत पंचमी (Basant Panchami 2026) का अनुभव बेहद आध्यात्मिक होता है। यहां गंगा के घाट दीयों की रोशनी से चमक उठते हैं। पूरे शहर में मंदिरों से लेकर स्कूलों और घरों तक में सरस्वती पूजा की जाती है। सुबह के समय नाव की सवारी करते हुए प्रार्थनाओं और मंत्रों की गूंज सुनना एक अद्भुत अनुभव है।
काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन इस दिन को और खास बना देते हैं। यहां का माहौल पूरी तरह भक्तिमय होता है। अस्सी घाट, दशाश्वमेध घाट और मणिकर्णिका घाट पर विशेष आरती का आयोजन होता है। घाटों पर पंडित-पुजारी और साधु-संत वेद मंत्रों का उच्चारण करते हैं।
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में भव्य सरस्वती पूजा होती है। छात्र-छात्राएं पीले वस्त्र धारण कर देवी सरस्वती की आराधना करते हैं। काशी की संकरी गलियों में कचौड़ी-सब्जी के साथ मलैया जैसे स्ट्रीट फूड सर्दी में गर्माहट और स्वाद घोल देते हैं। लस्सी, जलेबी और रबड़ी का स्वाद भी लाजवाब होता है।
कोलकाता, पश्चिम बंगाल: सरस्वती पूजा का केंद्र
कोलकाता में बसंत पंचमी (Basant Panchami 2026) बहुत ही श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। यहां सरस्वती पूजा एक प्रमुख त्योहार है। स्कूल और कॉलेज देवी की मूर्तियों से सजाए जाते हैं। पीले कपड़े पहने युवा छात्र फूल और किताबें अर्पित करने के लिए इकट्ठा होते हैं और दिल से प्रार्थना करते हैं।
शहर भर में सामुदायिक पंडाल लगाए जाते हैं। हर मोहल्ले में अलग-अलग थीम के साथ सरस्वती माता की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। कला और सौंदर्य का अद्भुत प्रदर्शन देखने को मिलता है। घरों में खिचड़ी, बेगुनी, लाबड़ा और संदेश जैसे विशेष पकवान बनाए जाते हैं।
दक्षिणेश्वर और बेलूर मठ जैसे मंदिर दिन के समय बेहद शांत और आध्यात्मिक महसूस होते हैं। हुगली नदी के किनारे सैर करना और स्थानीय बंगाली व्यंजनों का आनंद लेना इस यात्रा को यादगार बना देता है। रोशोगुल्ला, मिष्टी दोई और मछली की करी बंगाल की खासियत हैं।
Basant Panchami 2026: पंजाब – सरसों के खेतों की पीली चादर
बसंत पंचमी (Basant Panchami 2026) के दिन पंजाब का माहौल जोश और खुशी से भरा होता है। चारों तरफ सरसों के खेत चमकीले पीले रंग में खिले हुए नजर आते हैं। प्रकृति अपने सबसे खूबसूरत रूप में होती है। यहां भी पतंगबाजी एक मुख्य आकर्षण है।
गांवों और शहरों में लोक संगीत और नृत्य की धूम होती है। भांगड़ा और गिद्दा के जीवंत प्रदर्शन देखने को मिलते हैं। लोग पीले कपड़े पहनते हैं और घर के बाहर उत्सव मनाते हैं। गुरुद्वारों में संगत का स्वागत प्रार्थनाओं के साथ किया जाता है।
परिवार और दोस्तों के साथ पारंपरिक पंजाबी खाने का आनंद लिया जाता है। मक्की की रोटी और सरसों का साग इस मौसम की विशेषता है। लस्सी, पिन्नी और गजक भी खास होते हैं। खेतों के बीच फोटो सेशन और पिकनिक का मजा अलग ही होता है। यह प्रकृति और समुदाय से जुड़ाव महसूस कराता है।
बसंत पंचमी केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के साथ जुड़ने, रंगों का उत्सव मनाने और नई शुरुआत का प्रतीक है। इन पांच जगहों पर इस त्योहार को मनाने का अनुभव अविस्मरणीय होता है। अगर आप वास्तव में बसंत पंचमी की धूम देखना चाहते हैं तो इनमें से किसी एक जगह जरूर जाएं।
Read More Here
IND vs NZ T20 सीरीज से पहले न्यूजीलैंड को बड़ा झटका, माइकल ब्रेसवेल चोटिल, पहला मैच खेलना मुश्किल