Bareilly-Lalitpur Corridor: यूपी बजट 2026 में बरेली से झांसी-ललितपुर तक नया कॉरिडोर मंजूर, गंगा-यमुना और शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे से जुड़कर बदलेगी तस्वीर
बरेली-आगरा-झांसी-ललितपुर कॉरिडोर को मंजूरी, शामली-गोरखपुर, गंगा और यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा; बुंदेलखंड-रुहेलखंड को नई कनेक्टिविटी
Bareilly-Lalitpur Corridor: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बुधवार को विधानसभा में पेश किए गए 9.12 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर एक बड़ा तोहफा दिया है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बरेली-आगरा-झांसी-ललितपुर कॉरिडोर को हरी झंडी देने की घोषणा की है, जो प्रदेश के उत्तरी हिस्से को दक्षिणी बुंदेलखंड क्षेत्र से सीधे जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना है। सबसे खास बात यह है कि यह नया कॉरिडोर शामली-गोरखपुर ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे तीनों से जुड़ेगा, जिससे उत्तर प्रदेश में सड़क संपर्क का एक अभूतपूर्व जाल बिछ जाएगा।
बरेली को अब तक नहीं मिल पाया था एक्सप्रेसवे का सीधा लाभ
बरेली उत्तर प्रदेश के रुहेलखंड क्षेत्र का प्रमुख शहर है और लखनऊ तथा दिल्ली दोनों से नेशनल हाइवे के जरिए जुड़ा हुआ है। इसके अलावा उत्तराखंड तक बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए बरेली-पीलीभीत-सितारगंज हाइवे का निर्माण कार्य भी तेज गति से चल रहा है और इसका लगभग आधा काम पूरा हो चुका है। लेकिन इन सबके बावजूद बरेली को अब तक किसी बड़े एक्सप्रेसवे से सीधा जुड़ाव नहीं मिल सका था, जो शहर के व्यापारिक और औद्योगिक विकास की राह में एक बड़ी बाधा मानी जा रही थी।
अब बरेली-ललितपुर कॉरिडोर और शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे दोनों परियोजनाओं के साथ मिलकर बरेली को प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क से सीधे जोड़ने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह शहर के लिए विकास का एक बिल्कुल नया अध्याय साबित हो सकता है।
Bareilly-Lalitpur Corridor: बरेली से आगरा होते हुए झांसी और ललितपुर तक
इस नए कॉरिडोर की योजना के अनुसार यह सड़क मार्ग बरेली से शुरू होकर आगरा तक पहुंचेगा और वहां से झांसी होते हुए बुंदेलखंड के ललितपुर तक जाएगा। इस रूट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह प्रदेश के मध्य और दक्षिणी हिस्सों को सीधे उत्तरी क्षेत्र से जोड़ेगा, जहां अब तक सड़क संपर्क के पर्याप्त विकल्प मौजूद नहीं थे।
बरेली से आगरा का रास्ता पहले से ही नेशनल हाइवे से जुड़ा है और बरेली-मथुरा हाइवे को छह लेन में चौड़ा करने का काम भी प्रगति पर है। नए कॉरिडोर के बनने के बाद यह पूरा रूट एक उच्च गुणवत्ता वाले सड़क नेटवर्क में तब्दील हो जाएगा, जो यात्रियों और माल ढुलाई दोनों के लिए वरदान साबित होगा।
तीन बड़े एक्सप्रेसवे से मिलेगा जुड़ाव, बनेगा मेगा हाइवे जंक्शन
इस कॉरिडोर को जो चीज सबसे खास बनाती है वह है इसका तीन प्रमुख एक्सप्रेसवे से जुड़ना। पहला, 700 किलोमीटर लंबा शामली-गोरखपुर ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे जो प्रदेश के पूर्वी छोर को पश्चिमी छोर से मिलाएगा और बरेली के फरीदपुर, नवाबगंज तथा बहेड़ी तहसील से होकर गुजरेगा। इस छह लेन एक्सप्रेसवे पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पहले से शुरू हो चुकी है और अनुमानित लागत करीब 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक है।
दूसरा, गंगा एक्सप्रेसवे जो मेरठ से प्रयागराज तक जाता है और तीसरा, यमुना एक्सप्रेसवे जो नोएडा से आगरा को जोड़ता है। जब बरेली-ललितपुर कॉरिडोर इन तीनों एक्सप्रेसवे से कनेक्ट होगा तो बरेली एक तरह से मेगा हाइवे जंक्शन बन जाएगा, जहां से प्रदेश के किसी भी कोने में तेज गति से पहुंचा जा सकेगा। गोरखपुर से बरेली और फिर बरेली से ललितपुर तक का सफर जो अभी एक दिन से अधिक लेता है, वह कुछ ही घंटों में सिमट जाएगा।
Bareilly-Lalitpur Corridor: बुंदेलखंड और रुहेलखंड दोनों क्षेत्रों को मिलेगी नई ऊर्जा
इस कॉरिडोर का सबसे बड़ा सामाजिक-आर्थिक प्रभाव बुंदेलखंड और रुहेलखंड दोनों क्षेत्रों पर पड़ेगा। बुंदेलखंड का झांसी-ललितपुर इलाका ऐतिहासिक रूप से पिछड़ा माना जाता रहा है, जहां बेहतर सड़क संपर्क न होने के कारण औद्योगिक निवेश आकर्षित करना मुश्किल रहता था। अब इस कॉरिडोर के बनने से यहां तक पहुंच आसान होगी, जिसका सीधा असर रोजगार सृजन, कृषि उपज के परिवहन और पर्यटन विकास पर दिखेगा।
विशेषकर झांसी, जहां पहले से डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की स्थापना का काम चल रहा है और 200 से अधिक रक्षा उद्योगों के लिए समझौते किए जा चुके हैं, वहां इस नई सड़क परियोजना से लॉजिस्टिक्स सुविधा में भारी सुधार होगा। दूसरी तरफ बरेली, रामपुर और शाहजहांपुर जैसे शहरों में भी औद्योगिक गतिविधियों और व्यापार को नई गति मिलेगी।
यूपी का एक्सप्रेसवे नेटवर्क बनेगा देश में सबसे बड़ा
उत्तर प्रदेश पहले से ही एक्सप्रेसवे और हाइवे निर्माण में देश में अग्रणी राज्य बना हुआ है। यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी परियोजनाएं पहले से संचालित हैं। इसके अलावा गंगा एक्सप्रेसवे पर काम तेजी से चल रहा है। अब शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे और बरेली-ललितपुर कॉरिडोर जैसी नई परियोजनाओं के जुड़ने से प्रदेश का कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क चार हजार किलोमीटर से अधिक हो जाएगा, जो किसी भी भारतीय राज्य के लिए एक रिकॉर्ड होगा।
योगी सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाया जाए और इसके लिए विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे जरूरी शर्त है। बेहतर सड़क संपर्क से न केवल यात्रा का समय घटेगा बल्कि औद्योगिक निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण क्षेत्रों तक विकास की किरण पहुंचेगी।
Bareilly-Lalitpur Corridor: चुनावी साल से पहले सरकार का बड़ा दांव
यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि यूपी बजट 2026-27 योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल का अंतिम पूर्ण बजट है और अगले साल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी इस बड़ी घोषणा को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। बरेली, आगरा, झांसी और ललितपुर जैसे शहरों के मतदाता इस कॉरिडोर के जमीन पर उतरने का बेसब्री से इंतजार करेंगे। फिलहाल सरकार ने बजट में इस परियोजना के लिए मंजूरी दे दी है और आने वाले महीनों में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य की समय-सीमा स्पष्ट होने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर बरेली-ललितपुर कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के सड़क नक्शे पर एक गेम चेंजर परियोजना साबित हो सकती है, जो प्रदेश के विभिन्न हिस्सों के बीच दूरियां मिटाकर समग्र विकास की नई राह खोलेगी।
उल्लेखनीय है कि इस बजट में नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर के लिए 400 करोड़ रुपये का अलग प्रावधान भी किया गया है, जो सरकार की कनेक्टिविटी को लेकर गंभीरता को दर्शाता है। बरेली और बुंदेलखंड के निवासियों के लिए यह बजट उम्मीदों की एक नई किरण लेकर आया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इन वादों को जमीन पर कितनी तेजी से उतार पाती है और कब तक यह कॉरिडोर यातायात के लिए तैयार होता है।
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