बारामती उपचुनाव 2026: सुनेत्रा पवार ने कांग्रेस से की अपील, आकाश मोरे नामांकन वापस लें, महाविकास अघाड़ी में खुली दरार, महायुति को फायदा? देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात, भाजपा का समर्थन का आश्वासन

बारामती उपचुनाव 2026: सुनेत्रा पवार ने कांग्रेस से आकाश मोरे का नामांकन वापस लेने की अपील, महाविकास अघाड़ी में दरार, महायुति को फायदा, देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात

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Baramati By Election 2026: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। बारामती विधानसभा उपचुनाव को लेकर उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की प्रमुख सुनेत्रा पवार ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल से फोन पर बात की है। उन्होंने स्पष्ट अनुरोध किया कि कांग्रेस अपना उम्मीदवार आकाश मोरे का नामांकन वापस ले ले ताकि उपचुनाव बिना मुकाबले के हो सके। 23 अप्रैल को होने वाले इस उपचुनाव ने महाविकास अघाड़ी के गठबंधन में दरार उजागर कर दी है और पूरे राज्य की सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

Baramati By Election 2026: सुनेत्रा पवार का फोन कॉल और कांग्रेस पर दबाव

सूत्रों के मुताबिक बुधवार को सुनेत्रा पवार ने हर्षवर्धन सपकाल से सीधे संपर्क साधा। उन्होंने कहा कि बारामती सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार आकाश मोरे अपना नामांकन वापस ले लें। नामांकन वापसी की अंतिम तिथि से ठीक एक दिन पहले यह अपील आई है। बारामती एनसीपी का गढ़ माना जाता है और यहां अजित पवार के निधन के बाद उपचुनाव हो रहा है। सुनेत्रा पवार खुद इस सीट से चुनाव लड़ रही हैं। कांग्रेस ने आकाश मोरे को मैदान में उतारकर गठबंधन की परंपरा तोड़ी है जिससे MVA में तनाव बढ़ गया है।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि सुनेत्रा पवार की यह अपील सिर्फ एक सीट तक सीमित नहीं है। यह महाराष्ट्र कांग्रेस की रणनीति और गठबंधन की मजबूती को चुनौती दे रही है। हर्षवर्धन सपकाल ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस नेतृत्व इस मामले पर गंभीर विचार-विमर्श कर रहा है।

Baramati By Election 2026: देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात, भाजपा का समर्थन का आश्वासन

उपचुनाव से पहले सुनेत्रा पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी मुलाकात की। बैठक में उपचुनाव की रणनीति और प्रचार की चर्चा हुई। सूत्रों का कहना है कि फडणवीस ने उन्हें ‘बड़े भाई’ की तरह भाजपा का पूरा समर्थन देने का भरोसा दिलाया। महायुति गठबंधन में भाजपा, एनसीपी और शिवसेना शामिल हैं। अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी ने सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष बना दिया था।

यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बारामती में महायुति की मजबूत पकड़ है। फडणवीस की अगुवाई में भाजपा लगातार सुनेत्रा पवार के पक्ष में माहौल बनाने में जुटा है। अगर कांग्रेस नामांकन वापस ले लेती है तो उपचुनाव बिना मुकाबले का हो जाएगा जिससे महायुति को राजनीतिक लाभ मिलेगा।

Baramati By Election 2026: बारामती उपचुनाव का राजनीतिक महत्व और पवार परिवार का गढ़

बारामती विधानसभा सीट महाराष्ट्र की सबसे प्रतिष्ठित सीटों में से एक है। यह पवार परिवार का पारंपरिक गढ़ रहा है। अजित पवार लंबे समय तक यहां से विधायक रहे और उपमुख्यमंत्री के रूप में राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभाई। जनवरी 2026 में विमान दुर्घटना में उनके निधन के बाद सीट खाली हुई। एनसीपी ने सुनेत्रा पवार को उम्मीदवार बनाया है।

बारामती का इतिहास देखें तो यहां हमेशा पवार परिवार का वर्चस्व रहा है। शरद पवार और अजित पवार दोनों ने इस क्षेत्र को अपनी राजनीतिक ताकत का केंद्र बनाया। अब सुनेत्रा पवार इस विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। लेकिन कांग्रेस द्वारा आकाश मोरे को उम्मीदवार बनाए जाने से यह उपचुनाव सिर्फ स्थानीय नहीं बल्कि राज्य स्तर का मुकाबला बन गया है। आकाश मोरे कांग्रेस के राज्य सचिव हैं और पूर्व एमएलसी विजय राव मोरे के बेटे हैं।

Baramati By Election 2026: महाविकास अघाड़ी में खुली दरार, शरद पवार गुट और शिवसेना का रुख

महाविकास अघाड़ी में इस मुद्दे पर स्पष्ट मतभेद सामने आ गए हैं। शरद पवार की एनसीपी (एसपी) ने पहले ही घोषणा कर दी है कि वह सुनेत्रा पवार के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारेगी। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) ने भी सम्मान के कारण मुकाबला न करने का संकेत दिया है। लेकिन कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार उतारकर गठबंधन की एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कांग्रेस का तर्क है कि चुनाव लड़ना लोकतंत्र की आत्मा है और किसी भी सीट को बिना मुकाबले छोड़ना सही नहीं। पार्टी के कुछ नेता कह रहे हैं कि अगर विमान दुर्घटना मामले में एफआईआर दर्ज होती है तो वे नामांकन वापस लेने पर विचार कर सकते हैं। यह बयान महायुति सरकार पर दबाव बनाने जैसा है।

Baramati By Election 2026: राज्य कांग्रेस की रणनीति और आकाश मोरे का दावा

महाराष्ट्र कांग्रेस ने आकाश मोरे को मैदान में उतारकर साफ संदेश दिया है कि वह बारामती में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहती है। आकाश मोरे ने कहा है कि वे चुनाव लड़ेंगे और जीतने का पूरा प्रयास करेंगे। कांग्रेस का मानना है कि बारामती में पिछले तीन दशकों में पहली बार वह सीधा मुकाबला कर रही है।

हर्षवर्धन सपकाल की अगुवाई में कांग्रेस इस उपचुनाव को MVA की एकजुटता का परीक्षण मान रही है। अगर नामांकन वापस ले लिया गया तो यह कांग्रेस के लिए झटका होगा। लेकिन अगर मुकाबला हुआ तो यह महायुति बनाम MVA का बड़ा टेस्ट बनेगा।

Baramati By Election 2026: महायुति की मजबूती और सुनेत्रा पवार की चुनौती

महायुति गठबंधन इस उपचुनाव को अपनी एकता का प्रतीक बनाने में लगा है। देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे और अन्य नेता सुनेत्रा पवार के समर्थन में प्रचार करने वाले हैं। बारामती में एनसीपी और भाजपा की संयुक्त ताकत भारी पड़ सकती है। अगर सुनेत्रा पवार जीतती हैं तो महायुति की छवि और मजबूत होगी।

दूसरी ओर सुनेत्रा पवार को पवार परिवार की विरासत और स्थानीय समर्थन का फायदा है। लेकिन कांग्रेस के एंट्री से मुकाबला रोचक हो गया है। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि यह उपचुनाव 2029 के विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल साबित हो सकता है।

Baramati By Election 2026: बारामती का चुनावी इतिहास और जनता की भावनाएं

बारामती के मतदाता हमेशा से पवार परिवार के प्रति वफादार रहे हैं। अजित पवार के निधन ने यहां शोक की लहर पैदा कर दी थी। कई लोग मानते हैं कि सम्मान के कारण उपचुनाव बिना मुकाबले का होना चाहिए। लेकिन कांग्रेस का रुख लोकतंत्र की बहस को आगे बढ़ा रहा है।

स्थानीय स्तर पर किसान, युवा और महिलाएं इस मुकाबले पर नजर रखे हुए हैं। विकास कार्यों, रोजगार और कृषि मुद्दे यहां के मुख्य एजेंडे हैं। सुनेत्रा पवार इन मुद्दों पर फोकस कर रही हैं जबकि आकाश मोरे कांग्रेस की पारंपरिक राजनीति को आगे बढ़ाने की कोशिश में हैं।

राजनीतिक विश्लेषण: क्या होगा अगला मोड़

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि सुनेत्रा पवार की अपील अगर सफल हुई तो MVA में और दरार पड़ सकती है। अगर कांग्रेस अड़ी रही तो महायुति को फायदा होगा। कुछ नेता कह रहे हैं कि यह उपचुनाव शरद पवार और अजित पवार गुट के बीच पुरानी रंजिश को भी उजागर कर रहा है।

कांग्रेस के अंदर भी मतभेद हैं। कुछ नेता unopposed चुनाव चाहते हैं तो कुछ मुकाबला करने के पक्ष में हैं। हाईकमान का फैसला अंतिम होगा।

Baramati By Election 2026: आगे की चुनौतियां और राज्य राजनीति पर असर

यह उपचुनाव महाराष्ट्र की सियासी तस्वीर बदल सकता है। अगर सुनेत्रा पवार बिना मुकाबले जीतती हैं तो महायुति की जीत होगी। मुकाबले की स्थिति में वोट प्रतिशत और नेट रन रेट जैसी बातें चर्चा में आएंगी।

राज्य में अन्य उपचुनाव भी होने वाले हैं। राहुरी सीट पर भी सियासी गतिविधियां तेज हैं। कुल मिलाकर बारामती 2026 का सबसे हॉट सीट बन गया है।

निष्कर्ष: लोकतंत्र की परीक्षा

बारामती उपचुनाव महाराष्ट्र राजनीति की एक नई मिसाल बन सकता है। सुनेत्रा पवार की अपील और कांग्रेस का रुख दोनों ही लोकतंत्र की जटिलताओं को दिखाते हैं। अब देखना यह है कि नामांकन वापसी होती है या मुकाबला। जो भी हो, यह फैसला पूरे राज्य की राजनीति को प्रभावित करेगा।

महाराष्ट्र के मतदाता इस बार भी अपनी सूझबूझ दिखाएंगे। राजनीतिक दल चाहे जो भी रणनीति अपनाएं, अंतिम फैसला जनता का होगा।

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