बेंगलुरु मेट्रो किराया बढ़ोतरी पर लगा ब्रेक, जनविरोध के बाद BMRCL ने टाला फैसला, बोर्ड करेगा पुनर्विचार
नम्मा मेट्रो किराया बढ़ोतरी पर जनविरोध और राजनीतिक घमासान के बाद BMRCL ने फैसला टाला, बोर्ड करेगा पुनर्विचार; बीजेपी-कांग्रेस में जुबानी जंग जारी
Bangalore Metro Updates: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में नम्मा मेट्रो के किरायों में प्रस्तावित बढ़ोतरी पर फिलहाल रोक लग गई है। भारी जनविरोध और राजनीतिक घमासान के बीच बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने अपने फैसले को वापस लेने का निर्णय किया है। 5 फरवरी को घोषित किए गए नए किरायों को 9 फरवरी से लागू किया जाना था लेकिन अब बोर्ड इस पर पुनर्विचार करेगा। यह निर्णय उस समय आया जब बीजेपी और कांग्रेस के बीच किराया बढ़ोतरी को लेकर तीखी नोकझोंक हो रही थी। आम जनता भी सोशल मीडिया पर इस फैसले का विरोध कर रही थी। मेट्रो यात्रियों के लिए यह राहत की खबर है।
क्या था किराया बढ़ोतरी का प्रस्ताव?
BMRCL ने 96.10 किलोमीटर लंबे नम्मा मेट्रो नेटवर्क को 10 अलग-अलग जोनों में विभाजित करके किराया संरचना में बदलाव का प्रस्ताव रखा था। इस योजना के तहत विभिन्न दूरियों के लिए 1 रुपये से लेकर 5 रुपये तक की वृद्धि की जानी थी।
सबसे कम दूरी यानी 2 किलोमीटर तक की यात्रा के लिए किराया 10 रुपये से बढ़ाकर 11 रुपये करने का प्रस्ताव था। मध्यम दूरी की यात्रा के लिए जैसे 15-20 किलोमीटर की रेंज में किराया 70 रुपये से बढ़ाकर 74 रुपये किया जाना था। सबसे लंबी दूरी यानी 30 किलोमीटर से अधिक के लिए किराया 90 रुपये की जगह 95 रुपये तय किया गया था। इसके अलावा टूरिस्ट पास और ग्रुप टिकटों में भी लगभग 5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया गया था। हालांकि स्मार्ट कार्ड धारकों को मिलने वाली रियायतें यथावत रखी गई थीं। पीक ऑवर्स में 5 प्रतिशत और नॉन-पीक ऑवर्स में 10 प्रतिशत की छूट जारी रखने की बात कही गई थी।
जनता का विरोध और राजनीतिक घमासान
किराया बढ़ोतरी की घोषणा के साथ ही बेंगलुरु में रोष की लहर दौड़ गई। रोजाना लाखों लोग मेट्रो से यात्रा करते हैं और उनके लिए यह अतिरिक्त बोझ था। सोशल मीडिया पर लोगों ने इस फैसले की आलोचना शुरू कर दी। कई लोगों ने कहा कि बेंगलुरु की मेट्रो पहले से ही देश की सबसे महंगी मेट्रो सेवाओं में से एक है।
इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया। बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर किराया बढ़ोतरी की जिम्मेदारी डालने लगीं।
Bangalore Metro Updates: कांग्रेस नेता का बीजेपी पर हमला
कर्नाटक के राज्य मंत्री प्रियांक खड़गे ने बीजेपी पर दोहरे मापदंड का तीखा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जब मेट्रो का विस्तार होता है तो उसका श्रेय लेते हैं लेकिन जब किराया बढ़ता है तो राज्य सरकार को दोषी ठहराया जाता है।
प्रियांक खड़गे ने स्पष्ट किया कि किराया निर्धारण की जिम्मेदारी किराया निर्धारण समिति यानी FFFC की होती है। यह समिति केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त की जाती है और इसके फैसले बाध्यकारी होते हैं। राज्य सरकार इन फैसलों में सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकती। उन्होंने यह भी कहा कि मेट्रो परियोजनाओं में केंद्र और राज्य का संयुक्त निवेश होता है। लेकिन जब बात किराया बढ़ाने की आती है तो पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार पर डाल दी जाती है। यह अनुचित है।
बीजेपी सांसद ने बताया जनता की जीत
बेंगलुरु दक्षिण से बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने किराया बढ़ोतरी पर लगी रोक को जनता की जीत बताया। उन्होंने ट्वीट करके कहा कि जनता के दबाव ने सरकार को अपना फैसला वापस लेने पर मजबूर कर दिया।
हालांकि तेजस्वी सूर्या ने कांग्रेस की राज्य सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के कुप्रबंधन के कारण राज्य का वित्तीय हाल खराब है। इसी वजह से राज्य सरकार ने मेट्रो को दी जाने वाली सब्सिडी बंद कर दी है। तेजस्वी सूर्या ने दावा किया कि सब्सिडी में कटौती के कारण ही बेंगलुरु मेट्रो देश की सबसे महंगी मेट्रो बन गई है। उन्होंने मांग की कि किराया तय करने के लिए एक नई समिति बनाई जाए जो वैज्ञानिक तरीके से और जनहित को ध्यान में रखकर किराया निर्धारित करे।
Bangalore Metro Updates: BMRCL का पक्ष
बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड का तर्क था कि परिचालन लागत लगातार बढ़ रही है। बिजली, रखरखाव, कर्मचारियों के वेतन और अन्य खर्चों में वृद्धि हुई है। इसलिए किराया बढ़ाना जरूरी है।
BMRCL ने कहा कि वे धीरे-धीरे किराया बढ़ाने की योजना बना रहे थे ताकि यात्रियों पर एक साथ बड़ा बोझ न पड़े। छोटी-छोटी वृद्धि से यात्री आसानी से तालमेल बिठा सकते हैं। अगर लंबे समय तक किराया नहीं बढ़ाया जाता तो भविष्य में बहुत बड़ी वृद्धि करनी पड़ सकती है।
मेट्रो प्रशासन का यह भी कहना था कि वे सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने और नेटवर्क का विस्तार करने के लिए वित्तीय रूप से मजबूत होना चाहते हैं।
वित्तीय स्थिति और सब्सिडी का सवाल
जानकारों का मानना है कि कर्नाटक सरकार की वित्तीय स्थिति ने भी इस मुद्दे को जटिल बना दिया है। राज्य सरकार ने कई महत्वाकांक्ी योजनाएं शुरू की हैं जिनमें बड़ा खर्च हो रहा है। इसके कारण अन्य क्षेत्रों में बजट की कमी हो रही है।
परंपरागत रूप से राज्य सरकारें मेट्रो सेवाओं को सब्सिडी देती हैं ताकि किराया सस्ता रहे। लेकिन अगर राज्य सरकार सब्सिडी कम कर देती है या बंद कर देती है तो मेट्रो प्रशासन को किराया बढ़ाना पड़ता है।
Bangalore Metro Updates: आगे क्या होगा?
अब BMRCL के बोर्ड की बैठक होगी जिसमें किराया बढ़ोतरी के मुद्दे पर फिर से विचार किया जाएगा। बोर्ड सभी पक्षों की चिंताओं को ध्यान में रखकर कोई निर्णय लेगा। यात्रियों की सुविधा, वित्तीय जरूरतें और राजनीतिक संवेदनशीलता सभी को देखा जाएगा।
संभव है कि बोर्ड किराया वृद्धि को पूरी तरह वापस ले ले या फिर कम दरों पर बढ़ोतरी का फैसला करे। कुछ विशेष श्रेणियों जैसे छात्रों, बुजुर्गों या दैनिक यात्रियों के लिए रियायत भी दी जा सकती है। फिलहाल यात्रियों को राहत है कि पुराने किराये ही लागू रहेंगे। लेकिन यह मुद्दा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में इस पर और भी चर्चा होगी।
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