अमेरिका ने B1 और B2 वीजा नियमों में किया बड़ा बदलाव, 12 नए देश सूची में शामिल, 15000 डॉलर तक बॉन्ड जमा करना होगा अनिवार्य, 2 अप्रैल से लागू होंगे नए नियम, जानें पूरी डिटेल और प्रभावित देशों की लिस्ट
2 अप्रैल से लागू नियम, 12 नए देश शामिल, ओवरस्टे रोकने के लिए सख्ती
B1/B2 Visa Alert: अमेरिका की ट्रम्प सरकार ने इमिग्रेशन और वीजा नीतियों में लगातार सख्ती बरतते हुए एक और बड़ा कदम उठाया है। पिछले एक साल में कई बदलाव किए गए हैं लेकिन यह नया कदम सबसे व्यापक और प्रभावशाली माना जा रहा है। अब कई देशों के नागरिकों को अमेरिका का टूरिस्ट या बिजनेस वीजा लेने के लिए बड़ी रकम बॉन्ड के रूप में जमा करनी होगी। यह राशि 5000 डॉलर से लेकर 15000 डॉलर तक हो सकती है।
अगर वीजा धारक समय पर अमेरिका छोड़ देता है तो यह राशि वापस कर दी जाएगी। लेकिन अगर वह समय सीमा से अधिक रुक जाता है तो यह पूरी राशि जब्त हो जाएगी। यह नियम पहले 37 देशों पर लागू था लेकिन अब 12 और देशों को जोड़ा गया है। आइए विस्तार से समझते हैं कि ये नए नियम क्या हैं और किन देशों पर लागू होंगे।
B1/B2 Visa Alert: 2 अप्रैल 2026 से लागू होंगे सख्त नियम
अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने आधिकारिक घोषणा में स्पष्ट किया है कि ये नए और सख्त वीजा बॉन्ड नियम 2 अप्रैल 2026 से पूरी तरह प्रभावी हो जाएंगे। इस तारीख के बाद जो भी व्यक्ति इन 50 देशों की नई सूची में शामिल किसी भी देश से B1 या B2 वीजा के लिए आवेदन करेगा उसे संभवतः बॉन्ड राशि जमा करनी पड़ सकती है। यह निर्णय वीजा इंटरव्यू के दौरान कांसुलर अधिकारी द्वारा लिया जाएगा। अगर अधिकारी को लगता है कि आवेदक के ओवरस्टे करने की संभावना है तो वह बॉन्ड की मांग कर सकता है।
नई सूची में शामिल 12 देश इस प्रकार हैं: कंबोडिया, इथियोपिया, जॉर्जिया, ग्रेनाडा, लेसोथो, मॉरीशस, मंगोलिया, मोजाम्बिक, निकारागुआ, पापुआ न्यू गिनी, सेशेल्स और ट्यूनीशिया। इससे पहले 2025 में 37 अन्य देशों पर भी यह नियम लागू किया जा चुका है। उस सूची में क्यूबा, बुरुंडी, नामीबिया, तंजानिया, जाम्बिया और कई अन्य अफ्रीकी और लैटिन अमेरिकी देश शामिल थे। अब दोनों सूचियों को मिलाकर कुल लगभग 50 देश इस नियम के दायरे में आ गए हैं।
क्या है वीजा बॉन्ड नियम की पूरी प्रक्रिया?
यह वीजा बॉन्ड नियम एक विशेष प्रकार की वित्तीय गारंटी व्यवस्था है। इस नियम के तहत वीजा इंटरव्यू के समय कांसुलर अधिकारी आवेदक की प्रोफाइल, वित्तीय स्थिति, यात्रा का उद्देश्य और अन्य कारकों का गहन मूल्यांकन करते हैं। अगर अधिकारी को लगता है कि आवेदक के वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी अमेरिका में रुकने की संभावना है तो वह आवेदक से 5000 डॉलर, 10000 डॉलर या 15000 डॉलर तक का बॉन्ड जमा कराने का निर्देश दे सकता है। यह राशि केवल तभी जमा करनी होगी जब कांसुलर अधिकारी स्पष्ट रूप से निर्देश दें। सभी आवेदकों को अनिवार्य रूप से यह राशि नहीं देनी होगी। बॉन्ड राशि अमेरिकी सरकार द्वारा निर्धारित खाते में जमा की जाती है।
अगर वीजा धारक अपनी वीजा अवधि समाप्त होने से पहले समय पर अमेरिका छोड़ देता है और अपने देश वापस लौट जाता है तो यह पूरी राशि ब्याज सहित वापस कर दी जाएगी। लेकिन अगर वीजा धारक निर्धारित समय सीमा के बाद भी अमेरिका में रुकता है यानी ओवरस्टे करता है तो यह पूरी राशि अमेरिकी सरकार द्वारा जब्त कर ली जाएगी और वापस नहीं की जाएगी। साथ ही उस व्यक्ति के भविष्य में वीजा मिलने की संभावना भी लगभग खत्म हो जाएगी।
B1/B2 Visa Alert: वीजा नियमों में सख्ती क्यों बढ़ाई जा रही है?
पिछले पूरे एक साल में ट्रम्प प्रशासन ने इमिग्रेशन सिस्टम और वीजा प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण और सख्त बदलाव किए हैं। अमेरिकी सरकार का स्पष्ट कहना है कि वीजा प्रोग्राम का व्यापक दुरुपयोग हो रहा था। बहुत से लोग टूरिस्ट वीजा पर अमेरिका जाते थे लेकिन फिर वापस नहीं लौटते थे। वे अवैध रूप से वहीं रुक जाते थे और काम करने लगते थे। आवेदकों की जांच और वेरिफिकेशन प्रक्रिया पर्याप्त सख्त नहीं थी जिसका फायदा गलत लोग उठा रहे थे। इसी को ध्यान में रखते हुए अब कई कदम उठाए गए हैं। एम्बेसी और कांसुलेट में वीजा इंटरव्यू की प्रक्रिया को बहुत कड़ा कर दिया गया है।
अब साक्षात्कार में अधिक गहन सवाल पूछे जाते हैं। सोशल मीडिया वेरिफिकेशन को काफी बढ़ाया गया है। आवेदकों के फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच की जाती है। वीजा फीस और अन्य प्रशासनिक शर्तों में भी बदलाव किए गए हैं। कुछ मामलों में फीस बढ़ाई गई है। पिछले साल एक लाख से अधिक वीजा रद्द भी किए गए थे। इन सभी कदमों का मुख्य उद्देश्य अवैध रूप से रुकने की घटनाओं को कम करना और वीजा सिस्टम को अधिक पारदर्शी, नियंत्रित और सुरक्षित बनाना है।
पहले से शामिल 37 देशों की सूची
2025 में जब यह बॉन्ड व्यवस्था पहली बार शुरू की गई थी तब 37 देशों को इसमें शामिल किया गया था। उन देशों में से कुछ प्रमुख देश हैं: क्यूबा, बुरुंडी, नामीबिया, तंजानिया, जाम्बिया, अंगोला, बेनिन, केप वर्डे, चाड, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, जिबूती, इक्वेटोरियल गिनी, इरिट्रिया, गाम्बिया, गिनी, गिनी बिसाऊ, हैती, लाइबेरिया, मॉरिटानिया, साओ टोमे एंड प्रिंसिपे, सिएरा लियोन, सोमालिया और सूडान। इन देशों से ओवरस्टे की दर ऐतिहासिक रूप से अधिक रही है। डेटा के अनुसार इन देशों के 10 से 30 प्रतिशत तक वीजा धारक समय पर वापस नहीं लौटते थे। यही कारण था कि इन्हें पहली सूची में रखा गया।
B1/B2 Visa Alert: भारतीयों पर क्या होगा असर?
अच्छी खबर यह है कि भारत इस नई या पुरानी किसी भी सूची में शामिल नहीं है। इसका मतलब है कि भारतीय नागरिकों को फिलहाल यह बॉन्ड राशि जमा नहीं करनी होगी। हालांकि भारतीय आवेदकों को भी पहले की तुलना में अधिक सख्त इंटरव्यू प्रक्रिया और डॉक्यूमेंटेशन से गुजरना पड़ रहा है। लेकिन बॉन्ड व्यवस्था से भारत अभी तक बाहर है। भारत से अमेरिका जाने वालों की ओवरस्टे दर तुलनात्मक रूप से कम है। ज्यादातर भारतीय टूरिस्ट या बिजनेस विजिटर समय पर वापस लौट आते हैं। इसलिए भारत को इस सूची में शामिल नहीं किया गया है।
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