शादी वालों सावधान! मार्च में लग रहा है खरमास, एक महीने बंद होंगे सारे शुभ काम, जानें सही तारीख
14 मार्च से मीन संक्रांति पर लगेगा खरमास, 14 अप्रैल तक विवाह-गृहप्रवेश-मुंडन वर्जित, 22 से 25 मार्च तक चैती छठ का महापर्व
Kharmas 2026 dates: अगर आपके घर में मार्च या अप्रैल में कोई शुभ कार्य जैसे विवाह, गृहप्रवेश या मुंडन आदि होने वाला है तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। मार्च 2026 में खरमास लगने जा रहा है जिसके बाद करीब एक महीने तक सभी मांगलिक और शुभ कार्यों पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। खरमास एक ऐसा काल होता है जब सूर्य देव किसी निर्बल राशि में भ्रमण करते हैं और इस दौरान शुभ कार्य करना अशुभ माना जाता है। पंचांग के अनुसार इस बार मीन संक्रांति पर खरमास लग रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं खरमास की सही तारीख, इसका महत्व और इस दौरान क्या करें और क्या न करें।
Kharmas 2026 dates: खरमास क्या होता है और क्यों माना जाता है अशुभ
हिंदू पंचांग में खरमास का विशेष उल्लेख मिलता है। जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं तब खरमास लग जाता है। धनु और मीन दोनों राशियां गुरु यानी बृहस्पति की राशियां हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य और गुरु की युति होती है तब गुरु की शुभता कम हो जाती है। गुरु को विवाह और मांगलिक कार्यों का कारक माना जाता है इसलिए इस काल में शुभ कार्य करना वर्जित बताया गया है। खरमास साल में दो बार लगता है। पहला खरमास धनु संक्रांति पर लगता है जो आमतौर पर दिसंबर से जनवरी के बीच होता है। दूसरा खरमास मीन संक्रांति पर लगता है जो मार्च और अप्रैल के बीच पड़ता है। मार्च 2026 में मीन संक्रांति वाला खरमास लगने जा रहा है।
Kharmas 2026 dates: मार्च 2026 में खरमास कब से लग रहा है
पंचांग के अनुसार इस बार सूर्य देव 14 मार्च 2026 की देर रात 1 बजकर 8 मिनट पर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। जैसे ही सूर्य मीन राशि में गोचर करेंगे वैसे ही खरमास शुरू हो जाएगा। इस खरमास की समाप्ति 14 अप्रैल 2026 को होगी जब सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करेंगे। मेष राशि में सूर्य का प्रवेश मेष संक्रांति और हिंदू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है। यानी इस बार 14 मार्च से 14 अप्रैल 2026 तक करीब एक पूरे महीने तक खरमास रहेगा। इस पूरे एक महीने में सभी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे।
Kharmas 2026 dates: खरमास में कौन से काम नहीं करने चाहिए
खरमास के दौरान अनेक प्रकार के मांगलिक कार्यों पर रोक लगती है। विवाह से जुड़े किसी भी प्रकार के शुभ कार्य इस दौरान नहीं करने चाहिए। सगाई, तिलक और विवाह समारोह सभी इस काल में वर्जित माने जाते हैं। इसके अलावा नया घर खरीदना या संपत्ति में निवेश करना भी इस दौरान उचित नहीं माना जाता। गृहप्रवेश जैसा शुभ अवसर भी खरमास में नहीं मनाना चाहिए। नया वाहन खरीदना भी इस काल में शुभ नहीं माना जाता है। व्यापार या नया कारोबार शुरू करना, यज्ञोपवीत संस्कार, कान छिदवाना, मुंडन और नामकरण जैसे संस्कार भी खरमास में वर्जित हैं।
Kharmas 2026 dates: खरमास में विवाह करना सही है या गलत
यह सवाल लगभग हर उस परिवार के मन में उठता है जिनके यहां मार्च या अप्रैल में शादी की योजना है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खरमास में विवाह करना शुभ नहीं माना जाता। कहा जाता है कि इस दौरान किए गए शुभ कार्यों के सफल होने की संभावना कम रहती है और जीवन में बाधाएं आ सकती हैं। इसलिए शास्त्रों में खरमास समाप्त होने के बाद ही विवाह करने की सलाह दी जाती है। अगर किसी कारणवश खरमास से पहले ही शादी की तारीख तय हो गई है तो परिवार के बड़े-बुजुर्गों और किसी जानकार ज्योतिषी से परामर्श लेना उचित रहता है।
Kharmas 2026 dates: खरमास में क्या करें, इन कार्यों को मिलती है विशेष अनुमति
खरमास भले ही मांगलिक कार्यों के लिए वर्जित काल हो, लेकिन इस दौरान कुछ विशेष धार्मिक कार्य करना बेहद शुभ माना जाता है। इस पूरे एक महीने में सूर्य देव की उपासना का विशेष महत्व है। प्रतिदिन सूर्योदय के समय सूर्य को जल अर्पित करना और उनके मंत्रों का जाप करना इस काल में विशेष फलदायी माना जाता है। खरमास में पूर्वजों और पिता के लिए श्राद्ध और तर्पण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दौरान जल का दान करना भी बेहद पुण्यकारी बताया गया है। गंगा, यमुना, नर्मदा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करना भी इस काल में विशेष महत्व रखता है।
Kharmas 2026 dates: मीन संक्रांति का धार्मिक महत्व
मीन संक्रांति का हिंदू धर्म में अपना एक अलग महत्व है। जब सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करते हैं तो यह खगोलीय घटना पंचांग में एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जाती है। यह समय आत्मचिंतन, साधना और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। इस दौरान मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और दान-पुण्य का आयोजन किया जाता है। कुल मिलाकर खरमास का काल यदि सही तरीके से बिताया जाए तो यह आध्यात्मिक उन्नति और पुण्य संचय का अनमोल अवसर बन जाता है।
निष्कर्ष
14 मार्च से पहले जिन लोगों को कोई शुभ कार्य करना हो वे जल्द से जल्द मुहूर्त निकालें और खरमास समाप्त होने के बाद यानी 14 अप्रैल के बाद के लिए शुभ कार्यों की योजना बनाएं।
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