Assam Elections 2026: परिसीमन के बाद मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव कितना बदलेगा, हिमंता बिस्वा सरमा की रणनीति क्या है? 9 अप्रैल को होगा मतदान, भाजपा तीसरी बार सत्ता में आने और कांग्रेस वापसी की कोशिश में, जानिए पूरा समीकरण
असम विधानसभा चुनाव 2026: परिसीमन के बाद बदले समीकरण, मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव और हिमंता बिस्वा सरमा की रणनीति
Assam Elections 2026: असम विधानसभा चुनाव 2026 में 9 अप्रैल को मतदान होना है और इस बार का चुनाव सीधे भाजपा और कांग्रेस के बीच है। परिसीमन के बाद सीटों के समीकरण बदले हैं और मुस्लिम मतदाताओं के प्रभाव पर नई बहस छिड़ी है। भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश में है जबकि कांग्रेस लगातार दो हारों के बाद वापसी के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। असम की राजनीति इस बार एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां हर एक सीट और हर एक वोट का हिसाब बेहद बारीकी से लगाया जा रहा है। परिसीमन के बाद बदले हुए निर्वाचन क्षेत्रों ने पुराने समीकरणों को हिलाकर रख दिया है।
Assam elections 2026: भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा और निर्णायक मुकाबला
इस दौर के विधानसभा चुनावों में असम एकमात्र ऐसा राज्य है जहां भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। बाकी राज्यों में क्षेत्रीय दल भी बड़ी भूमिका में हैं, लेकिन असम में मुकाबला द्विध्रुवीय (Bipolar) है। भाजपा यहां 2016 से सत्ता में है और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में पार्टी ने अपनी पकड़ और मजबूत की है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने भी इस बार रणनीति बदलते हुए स्थानीय नेतृत्व को आगे कर पूरे दमखम से मैदान में उतरने का फैसला किया है। यह चुनाव तय करेगा कि क्या भाजपा का ‘अजेय’ रथ जारी रहेगा या कांग्रेस की वापसी होगी।
Assam elections 2026: परिसीमन और मुस्लिम मतदाताओं का बदलता समीकरण
परिसीमन असम की राजनीति का सबसे चर्चित और संवेदनशील पहलू बन गया है। नए सीमांकन के बाद कई निर्वाचन क्षेत्रों की बनावट बदल गई है, जिससे मुस्लिम बहुल और मुस्लिम प्रभावित सीटों के स्वरूप में बड़ा परिवर्तन आया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, परिसीमन के बाद कुछ पारंपरिक सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं की ‘किंगमेकर’ वाली भूमिका कम हुई है, जबकि कुछ नई सीटों पर उनका प्रभाव केंद्रित हुआ है। यह बदलाव सीधे तौर पर दोनों प्रमुख दलों की टिकट वितरण और चुनाव प्रचार की रणनीति को प्रभावित कर रहा है।
हिमंता बिस्वा सरमा: भाजपा के रणनीतिकार और मुख्य चेहरा
हिमंता बिस्वा सरमा असम के मुख्यमंत्री हैं और उत्तर पूर्व भारत के सबसे प्रभावशाली राजनेताओं में गिने जाते हैं। 2015 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद, उन्होंने पूर्वोत्तर में पार्टी के विस्तार में मुख्य भूमिका निभाई है। सरमा को उनकी आक्रामक शैली, विकास कार्यों और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता के लिए जाना जाता है। वे ‘पूर्वोत्तर लोकतांत्रिक गठबंधन’ (NEDA) के संयोजक भी हैं। इस चुनाव में उनकी प्रतिष्ठा दांव पर है, क्योंकि वे हिंदुत्व और विकास के हाइब्रिड मॉडल के साथ लगातार तीसरी बार जीत का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।
Assam elections 2026: असम चुनाव 2026 के प्रमुख मुद्दे और चुनौतियां
असम के मतदाताओं के बीच इस बार कई बुनियादी और भावनात्मक मुद्दे एक साथ उभरे हैं:
* बाढ़ नियंत्रण और भूमि अधिकार: असम के लिए हर साल आने वाली बाढ़ एक स्थायी समस्या है।
* अवैध प्रवासन: एनआरसी और नागरिकता से जुड़े मुद्दे अभी भी विमर्श का केंद्र हैं।
* बेरोजगारी: युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना एक बड़ी चुनौती है।
* जातीय पहचान: बोडो, कार्बी और अन्य आदिवासी समुदायों का समर्थन हासिल करना अनिवार्य है।
* भ्रष्टाचार: विपक्ष ने सरकार पर भ्रष्टाचार और असंतुलित विकास के गंभीर आरोप लगाए हैं।
Assam elections 2026: कांग्रेस की पुनरुत्थान की कोशिश और ‘एंटी-इनकंबेंसी’
लगातार दो हारों के बाद कांग्रेस ने इस बार अपनी संगठनात्मक कमजोरी को दूर करने का प्रयास किया है। पार्टी ने युवाओं की बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं और महिला सुरक्षा को अपने मुख्य चुनावी वादों में शामिल किया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा के लिए ‘एंटी-इनकंबेंसी’ (सत्ता विरोधी लहर) एक बड़ी चुनौती हो सकती है। हालांकि, कांग्रेस के लिए जमीनी स्तर पर कैडर को सक्रिय करना और बिखरे हुए विपक्ष को एकजुट रखना अब भी सबसे कठिन काम बना हुआ है।
निष्कर्ष
असम विधानसभा चुनाव 2026 केवल एक राज्य का चुनाव नहीं है, यह पूर्वोत्तर भारत की राजनीतिक दिशा तय करने वाला एक निर्णायक मुकाबला है। परिसीमन के बाद बदले समीकरण, मुस्लिम मतदाताओं की बदलती भूमिका, युवाओं की अपेक्षाएं और महिला वोट बैंक मिलकर इस चुनाव को बेहद जटिल और रोचक बना रहे हैं। हिमंता बिस्वा सरमा की अनुभवी रणनीति बनाम कांग्रेस की पुनरुत्थान की कोशिश के इस टकराव का फैसला 9 अप्रैल को जनता की अदालत में होगा।read more here