Assam Election 2026: “मैं राहुल गांधी का सिपाही हूं, डरूंगा नहीं”, असम पुलिस की छापेमारी पर पवन खेड़ा का सीएम हिमंता और शाह पर पलटवार
असम पुलिस रेड पर पवन खेड़ा का पहला बयान: ‘100 पुलिसवाले मेरे छोटे फ्लैट पर भेजे गए, मुझे नहीं पता लैपटॉप कहां से आया’, CM हिमंता और अमित शाह पर साजिश का आरोप, राहुल गांधी का सिपाही हूं डरूंगा नहीं
Assam Election 2026: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के दिल्ली स्थित फ्लैट पर असम पुलिस की छापेमारी के बाद उनका पहला सार्वजनिक बयान सामने आया है। पवन खेड़ा ने आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश रची जा रही है और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उनके खिलाफ हथकंडे अपना रहे हैं।
पवन खेड़ा ने कहा कि वे राहुल गांधी के सिपाही हैं और डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवालों पर जवाब मांगा और पुलिस कार्रवाई को डराने की कोशिश बताया। इस मामले में पवन खेड़ा ने तेलंगाना हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की है। पूरा मामला राजनीतिक गलियारों में तूफान खड़ा कर रहा है।
खेड़ा का साजिश पर बड़ा आरोप
असम पुलिस द्वारा दिल्ली में पवन खेड़ा के फ्लैट पर की गई छापेमारी के कुछ घंटों बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने अपना पहला बयान जारी किया। उन्होंने साफ कहा कि यह उनकी ओर से राजनीतिक साजिश है और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा तथा गृह मंत्री अमित शाह उनके खिलाफ हथकंडे अपना रहे हैं।
पवन खेड़ा ने बताया कि उनके छोटे से फ्लैट पर करीब 100 पुलिसकर्मी भेजे गए थे जबकि वे घर पर नहीं थे। अब पुलिस जहां भी उन्हें लगता है कि वे गए हैं, वहां पुलिस भेज दी जाती है। उन्होंने लैपटॉप की जब्ती को लेकर भी सवाल उठाया और कहा कि उन्हें नहीं पता कि पुलिस ने उनके घर से कुछ उठाया या खुद लेकर आई थी।
पवन खेड़ा ने कहा कि वे कांग्रेस पार्टी के सवालों को चुप करवाने की कोशिश का विरोध करेंगे। उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए तेलंगाना हाई कोर्ट का रुख किया है। इस घटना ने पूरे राजनीतिक वातावरण को गरमा दिया है और विपक्षी दलों ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है।
प्रवक्ताओं के बीच बढ़ी सियासी रार
पवन खेड़ा कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता हैं जो अक्सर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने कुछ दस्तावेजों और जानकारी को लेकर सवाल उठाए थे जिसके बाद असम पुलिस ने उनके दिल्ली स्थित फ्लैट पर छापा मारा।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने पहले ही पवन खेड़ा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा था कि आरोप लगाने से पहले उन्हें विदेश मंत्री से पूछना चाहिए था और यह केस राहुल गांधी तक जा सकता है। हिमंता ने यह भी कहा कि असम पुलिस ‘पाताल’ से भी लोगों को ढूंढकर ला सकती है।
पवन खेड़ा ने इन बयानों का जवाब देते हुए खुद को मेवाड़ का और राहुल गांधी का सिपाही बताया। उन्होंने कहा कि उनकी आदत डरने की नहीं है और वे सवाल पूछते रहेंगे। यह पूरा मामला कांग्रेस और सत्ताधारी दलों के बीच तनाव को बढ़ा रहा है।
विपक्ष ने जताई कड़ी नाराजगी
इस घटना का सीधा असर राजनीतिक माहौल पर पड़ा है। कांग्रेस ने इसे विपक्ष को दबाने की साजिश बताया है जबकि सत्ताधारी दल इसे कानून का पालन बता रहे हैं।
पवन खेड़ा के बयान के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में आक्रोश बढ़ गया है और कई नेताओं ने समर्थन में बयान जारी किए हैं। यह मामला तेलंगाना हाई कोर्ट में पहुंच चुका है जिससे कानूनी प्रक्रिया शुरू हो गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना आने वाले दिनों में विपक्ष और सरकार के बीच और तीखी बहस का कारण बन सकती है।
देश भर में चर्चा चल रही है कि क्या यह व्यक्तिगत मामला है या राजनीतिक प्रतिशोध। लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी के मुद्दे पर भी सवाल उठ रहे हैं।
डराने के बजाय जवाबी हमले की रणनीति
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार पवन खेड़ा का बयान काफी आक्रामक और आत्मविश्वास से भरा है। उन्होंने खुद को राहुल गांधी का सिपाही बताकर पार्टी के भीतर एकजुटता का संदेश दिया है।
“पवन खेड़ा का बयान दिखाता है कि कांग्रेस अब डरने के बजाय जवाबी हमला बोलने की रणनीति अपना रही है। असम पुलिस की कार्रवाई को साजिश बताना विपक्ष की तरफ से एक मजबूत कदम है।”
यह टिप्पणी उन वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषकों की है जो पिछले कई वर्षों से राष्ट्रीय राजनीति पर नजर रख रहे हैं।
हिमंता बिस्वा सरमा के पिछले बयानों और पवन खेड़ा की प्रतिक्रिया से साफ है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि तेलंगाना हाई कोर्ट का फैसला इस मामले की दिशा तय करेगा। अगर कोर्ट अग्रिम जमानत देता है तो विपक्ष को मजबूती मिलेगी।
अब कानूनी लड़ाई की बारी
अब सारी नजरें तेलंगाना हाई कोर्ट पर हैं जहां पवन खेड़ा ने अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की है। असम पुलिस की जांच आगे बढ़ेगी और यह देखना होगा कि पुलिस क्या सबूत पेश करती है।
कांग्रेस पार्टी इस मामले को संसद और सड़क दोनों जगह उठा सकती है। पवन खेड़ा के बयान के बाद पार्टी के अन्य नेताओं के बयान भी आने की संभावना है। देश भर के राजनीतिक गलियारों में इस घटना की चर्चा जारी रहेगी।
अंतिम फैसला अदालत और राजनीतिक घटनाक्रम दोनों तय करेंगे।
“मैं नहीं डरूंगा, सवाल करता रहूंगा”
पवन खेड़ा ने कहा कि दिल्ली में मेरे छोटे से फ्लैट पर 100 पुलिसकर्मी गए जबकि मैं घर पर नहीं था। अब जहां भी मुझे लगता है कि गया हूं, पुलिस भेज दी जाती है।
उन्होंने पूछा कि कांग्रेस पार्टी ने सिर्फ सवाल उठाए हैं तो उसे चुप क्यों करवाना चाहते हैं। पवन खेड़ा ने कहा कि हम कहते हैं कि ये कागज और जानकारी आई है, इसकी जांच कीजिए। क्या हम गलत कह रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जवाब देने की जगह सबको गाली दी जा रही है और डराने की कोशिश की जा रही है।
पवन खेड़ा ने जोर देकर कहा कि मैं मेवाड़ का हूं, कांग्रेस का हूं और राहुल गांधी का सिपाही हूं, तो कैसे डर जाऊंगा।
उन्होंने अंत में कहा कि मैं नहीं डरूंगा, बोलते रहूंगा और सवाल करते रहूंगा, इसलिए पुलिस को नजरअंदाज कर रहा हूं।
“पाताल से भी ढूंढ लाएंगे”
इससे पहले असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने पवन खेड़ा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा था कि आरोप लगाने से पहले उन्हें विदेश मंत्री से पूछना चाहिए था।
हिमंता ने कहा कि खरगे जी की उम्र हो गई है फिर भी वे इस तरह बोलते हैं। उन्होंने दावा किया कि असम पुलिस ‘पाताल’ से भी लोगों को ढूंढकर ला सकती है।
हिमंता ने शक जताया कि राहुल गांधी ने ही पवन खेड़ा को ये डॉक्यूमेंट्स दिए हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यह केस राहुल गांधी तक जाएगा।
हिमंता ने कहा कि हमें डराने की कोशिश मत करो, यह असम है और हमने 17 बार इस्लामिक हमलों के खिलाफ लड़ाई लड़ी है।
देश भर में छिड़ी बहस
कांग्रेस पार्टी के कई नेताओं ने पवन खेड़ा का समर्थन किया है और इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है।
विपक्षी दलों ने केंद्र और असम सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया है। सत्ताधारी दल का कहना है कि कानून का पालन हो रहा है और किसी भी साजिश का सवाल नहीं है।
इस घटना ने राजनीतिक बहस को नया मोड़ दे दिया है। देश भर में सोशल मीडिया पर इस मामले पर तीखी चर्चा चल रही है।
दोनों पक्ष अब कानूनी और राजनीतिक मोर्चे पर आमने-सामने हैं।
Assam Election 2026: निष्कर्ष
असम पुलिस की रेड के बाद पवन खेड़ा का पहला बयान काफी आक्रामक रहा है जिसमें उन्होंने साफ कहा कि उनके खिलाफ साजिश हो रही है।
पवन खेड़ा ने खुद को राहुल गांधी का सिपाही बताते हुए डरने से इनकार कर दिया। CM हिमंता बिस्वा सरमा और अमित शाह पर साजिश का आरोप लगाते हुए उन्होंने जवाब मांगा है।
यह मामला अब तेलंगाना हाई कोर्ट में है और आगे की जांच व कानूनी प्रक्रिया तय करेगी कि सच्चाई क्या है। राजनीतिक रूप से यह घटना विपक्ष और सरकार के बीच तनाव बढ़ाने वाली साबित हो रही है।
देश की राजनीति में अभिव्यक्ति की आजादी और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर बहस जारी रहेगी। पवन खेड़ा का बयान कांग्रेस को नई ऊर्जा दे सकता है लेकिन कानूनी नतीजे अंतिम फैसला करेंगे।
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