Assam Chunav 2026: मतदान से ठीक पहले कांग्रेस को बड़ा झटका, उदलगुड़ी के उम्मीदवार सुरेन दैमरी ने छोड़ी पार्टी, लगाए गंभीर आरोप
मतदान से पहले उम्मीदवार ने छोड़ी कांग्रेस, जनजातीय उपेक्षा के आरोप, जानें इसका चुनाव पर क्या असर होगा
Assam Chunav 2026: असम विधानसभा चुनाव के ठीक एक दिन पहले कांग्रेस पार्टी को बड़ा झटका लगा है। उदलगुड़ी सीट से कांग्रेस उम्मीदवार सुरेन दैमरी ने पार्टी छोड़ने और चुनावी मैदान से हटने का ऐलान कर दिया है। हालांकि निर्वाचन आयोग के नियमों के कारण उनका नाम EVM पर बना रहेगा और मतदाता उनके पक्ष में वोट डाल सकेंगे।
मतदान से एक दिन पहले कांग्रेस उम्मीदवार सुरेन दैमरी ने छोड़ी पार्टी, अनुसूचित जनजाति पर भेदभाव और उपेक्षा का आरोप, पार्टी नेतृत्व ने फोन तक नहीं उठाया, जानें पूरा मामला और इसके प्रभाव सुरेन दैमरी ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी सिर्फ एक खास समुदाय के लिए काम करती है और अनुसूचित जनजाति के लोगों की उपेक्षा करती है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर फोन न उठाने और कोई सहयोग न देने का भी आरोप लगाया। यह घटना असम चुनावी माहौल को पूरी तरह गरमा देने वाली है क्योंकि मतदान 9 अप्रैल को होना है।
वोटिंग से पहले बड़ा उलटफेर
असम की उदलगुड़ी विधानसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार सुरेन दैमरी ने बुधवार को अचानक पार्टी छोड़ने और चुनाव से हटने की घोषणा कर दी। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि कांग्रेस ने उन्हें धोखा दिया है और पार्टी में रहने का कोई फायदा नहीं है।
दैमरी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सिर्फ मिया समुदाय के लिए काम करती है जबकि अनुसूचित जनजाति के लोगों के लिए कुछ नहीं करती। उम्मीदवार बनने के बाद भी पार्टी नेतृत्व ने उनका फोन तक नहीं उठाया और जिला कांग्रेस कमेटी ने भी कोई मदद नहीं की।
कांग्रेस प्रवक्ता बेदब्रत बोरा ने स्पष्ट किया कि दैमरी ने अभी तक पार्टी को औपचारिक इस्तीफा नहीं सौंपा है। निर्वाचन आयोग के अधिकारी ने बताया कि नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि बीत चुकी है इसलिए EVM में दैमरी का नाम बना रहेगा और मतदाता उन्हें वोट दे सकेंगे।
असम की 126 सीटों पर 9 अप्रैल को मतदान होगा और नतीजे 4 मई को आएंगे। इस घटना से कांग्रेस की उदलगुड़ी सीट पर स्थिति और कमजोर हो गई है।
कांग्रेस की डगमगाती चुनावी रणनीति
असम विधानसभा चुनाव 2026 काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस पार्टी पिछले चुनावों में मिली हार के बाद इस बार अपनी स्थिति सुधारने की कोशिश कर रही थी। उदलगुड़ी सीट अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्र है जहां सुरेन दैमरी को टिकट दिया गया था।
सुरेन दैमरी ने लंबे समय तक पार्टी में काम किया लेकिन उम्मीदवार घोषित होने के बाद उन्हें पर्याप्त समर्थन नहीं मिला। उन्होंने बार-बार पार्टी नेतृत्व से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
इससे पहले असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और अन्य भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर विभिन्न मुद्दों पर हमला बोल रखा था। ऐसे में दैमरी का पार्टी छोड़ना कांग्रेस के लिए दोहरी मुश्किल खड़ी कर रहा है।
यह घटना चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में आई है जब पार्टियां अंतिम जोर लगा रही हैं। दैमरी के आरोपों ने जनजातीय मतदाताओं के बीच कांग्रेस की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जनजातीय वोट बैंक पर असर
सुरेन दैमरी के पार्टी छोड़ने से कांग्रेस की उदलगुड़ी सीट पर स्थिति कमजोर हो गई है। हालांकि EVM पर नाम बने रहने से कुछ vote उन्हें मिल सकते हैं लेकिन पार्टी का आधिकारिक उम्मीदवार न होने से संगठनात्मक नुकसान होगा।
अनुसूचित जनजाति समुदाय में कांग्रेस की छवि पर असर पड़ सकता है क्योंकि दैमरी ने पार्टी पर भेदभाव का आरोप लगाया है। भाजपा और उसके सहयोगी दल इस घटना का फायदा उठाते हुए कांग्रेस पर हमला बोल रहे हैं।
कांग्रेस को अब इस सीट पर अतिरिक्त प्रयास करने पड़ सकते हैं। पूरे असम चुनाव में यह घटना विपक्षी एकता और पार्टी अनुशासन पर सवाल उठा रही है। चुनाव नतीजों पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है।
संगठनात्मक कमजोरी हुई उजागर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदान से एक दिन पहले उम्मीदवार का पार्टी छोड़ना किसी भी पार्टी के लिए बड़ा झटका होता है।
“सुरेन दैमरी का बयान कांग्रेस की आंतरिक कमजोरियों को उजागर करता है। अनुसूचित जनजाति क्षेत्र में भेदभाव का आरोप गंभीर है और पार्टी को इस पर तुरंत स्पष्टीकरण देना चाहिए।”
यह टिप्पणी उन वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषकों की है जो असम की राजनीति पर लंबे समय से नजर रख रहे हैं। दैमरी के आरोप कि पार्टी नेतृत्व ने फोन तक नहीं उठाया, संगठनात्मक ढीलापन दिखाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि EVM में नाम बने रहने से वोट बिखर सकते हैं जो कांग्रेस के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। यह घटना असम कांग्रेस की रणनीति और जनजातीय समुदाय से जुड़ाव पर सवाल उठा रही है।
अगर कांग्रेस इस मामले को अच्छे से हैंडल नहीं करती तो अन्य सीटों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
9 अप्रैल को अंतिम फैसला
अब असम कांग्रेस को इस घटना से उबरने के लिए तुरंत कदम उठाने होंगे। पार्टी नेतृत्व उदलगुड़ी सीट पर अन्य उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
निर्वाचन आयोग ने साफ कर दिया है कि दैमरी का नाम EVM से नहीं हटाया जा सकता। मतदान 9 अप्रैल को होगा इसलिए दोनों पक्ष अंतिम 24 घंटे में जोरदार प्रचार करेंगे।
कांग्रेस को जनजातीय मतदाताओं को विश्वास में लेने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ सकते हैं। भाजपा इस घटना को कांग्रेस की आंतरिक कलह के रूप में पेश कर रही है।
चुनाव नतीजे 4 मई को आएंगे जब इस सीट का भी फैसला होगा।
भेदभाव और उपेक्षा का दावा
सुरेन दैमरी ने कहा कि कांग्रेस सिर्फ मिया समुदाय के लिए काम करती है और अनुसूचित जनजातियों की उपेक्षा करती है।
उन्होंने बताया कि उम्मीदवार बनने के बाद उन्हें पार्टी से कोई सहयोग नहीं मिला। दैमरी ने आरोप लगाया कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व को बार-बार फोन किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
जिला कांग्रेस कमेटी ने भी उनकी मदद नहीं की। उन्होंने कहा कि लंबे इंतजार के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया।
दैमरी ने जोर देकर कहा कि विश्वासघात पार्टी ने उनके साथ किया है, उन्होंने पार्टी के साथ नहीं।
औपचारिक इस्तीफे का इंतजार
कांग्रेस प्रवक्ता बेदब्रत बोरा ने कहा कि दैमरी ने मीडिया में घोषणा की है लेकिन पार्टी को अभी तक औपचारिक इस्तीफा नहीं मिला है।
पार्टी इस घटना को गंभीरता से ले रही है और उदलगुड़ी सीट पर स्थिति संभालने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे पार्टी की एकता बनाए रखें।
पार्टी का कहना है कि ऐसे वक्त में उम्मीदवार का जाना नुकसानदायक है लेकिन वे चुनाव लड़ते रहेंगे। अन्य कांग्रेस उम्मीदवारों को इस घटना से प्रेरणा लेकर और मेहनत करने की सलाह दी गई है।
पार्टी इस मामले में आंतरिक जांच भी कर सकती है।
उदलगुड़ी सीट: EVM पर बना रहेगा नाम
उदलगुड़ी सीट अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्र है जहां चार उम्मीदवार मैदान में हैं। दैमरी के अलावा बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीजेपी सहयोगी) के रिहोन दैमरी, यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल के दिपेन बोरो और वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के उनीके बसुमतारी चुनाव लड़ रहे हैं।
दैमरी के नाम EVM पर बने रहने से वोट बिखरने की संभावना है। यह सीट भाजपा गठबंधन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कांग्रेस को अब अन्य तीन उम्मीदवारों के खिलाफ मजबूत रणनीति बनानी होगी।
स्थानीय जनजातीय मतदाताओं का रुझान इस सीट के नतीजे तय करेगा।
126 सीटों पर कल मतदान
असम की 126 सीटों पर 9 अप्रैल को एक चरण में मतदान होगा। यह चुनाव सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है।
जनजातीय और अल्पसंख्यक वोट बैंक दोनों पार्टियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। पवन खेड़ा मामले और इस घटना से राजनीतिक तापमान बढ़ गया है।
MATRIZE जैसे ओपिनियन पोल में भाजपा गठबंधन की स्थिति मजबूत बताई जा रही है। चुनाव नतीजे 4 मई को घोषित होंगे।
नतीजों पर पड़ेगा बड़ा असर
विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे झटके चुनाव के अंतिम चरण में पार्टी की रणनीति बिगाड़ सकते हैं। जनजातीय समुदाय में कांग्रेस की छवि पर असर पड़ सकता है। भाजपा इस घटना को कांग्रेस की विफलता के रूप में प्रचारित कर रही है।
कांग्रेस को तुरंत क्षति नियंत्रण करना होगा। उदलगुड़ी सीट पर नतीजे पूरे असम चुनाव की दिशा प्रभावित कर सकते हैं। यह घटना आने वाले दिनों में और राजनीतिक बहस पैदा करेगी।
Assam Chunav 2026: निष्कर्ष
असम विधानसभा चुनाव 2026 में मतदान से महज एक दिन पहले कांग्रेस को सुरेन दैमरी के पार्टी छोड़ने से बड़ा झटका लगा है। दैमरी ने पार्टी पर भेदभाव, उपेक्षा और विश्वासघात के गंभीर आरोप लगाए हैं।
हालांकि EVM पर उनका नाम बना रहेगा लेकिन यह घटना कांग्रेस की उदलगुड़ी सीट पर स्थिति कमजोर कर रही है।
पार्टी को अब जनजातीय मतदाताओं को विश्वास में लेने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने होंगे। यह घटना असम राजनीति में नया मोड़ ला सकती है और चुनाव नतीजों पर असर डाल सकती है।
दोनों पक्ष अब अंतिम 24 घंटे में जोरदार प्रचार करेंगे। अंतिम फैसला 4 मई को मतगणना के बाद सामने आएगा जब असम की जनता अपना फैसला सुनाएगी।
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