असम विधानसभा चुनाव 2026,- हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा दावा, NDA को 90-100 सीटें, कांग्रेस को सिर्फ 16-17, ऊपरी असम और चाय जनजाति वोट बैंक में NDA की मजबूत पकड़

असम विधानसभा चुनाव 2026 में हिमंत बिस्वा सरमा ने NDA को 90-100 सीटें और कांग्रेस को सिर्फ 16-17 सीटें मिलने का दावा किया, चाय जनजाति वोट बैंक पर जोर

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Assam Election 2026: सरमा ने कहा कि कांग्रेस को महज 16-17 सीटें मिल सकती हैं, जबकि ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) को 5-6 सीटें और रायजोर दल को सिर्फ एक सीट मिलने की संभावना है। असम जतिया परिषद (AJYCP) को कोई सीट नहीं मिलेगी। यह भविष्यवाणी असम की सियासी हलचल को और तेज कर गई है।

हिमंत सरमा की विस्तृत भविष्यवाणी: सीटों का गणित

मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों और सीटों को लेकर स्पष्ट अनुमान लगाया। उन्होंने कहा कि तिहू और नलबाड़ी सीट पर NDA को अच्छे अंतर से जीत हासिल होगी। अखिल गोगोई की रायजोर दल को केवल डिहिंग सीट पर एक सीट मिल सकती है। शिवसागर में हालांकि कड़ी टक्कर होगी, लेकिन अंत में NDA उम्मीदवार ही बाजी मारेगा। धुबरी और गोलागंज सीटें भी NDA के खाते में जाएंगी। गुवाहाटी की सभी सीटों पर NDA बड़े अंतर से जीत दर्ज करेगा। डिब्रूगढ़, लखीमपुर और काजीरंगा लोकसभा क्षेत्र की विधानसभा सीटों पर भी NDA की आसानी से जीत होने की बात कही गई है।

Assam Election 2026: ऊपरी असम में वोट बैंक का बदलता समीकरण

सरमा ने खासतौर पर ऊपरी असम पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऊपरी असम पहले कांग्रेस का गढ़ माना जाता था, लेकिन 2016 के चुनाव में BJP ने वहां से कांग्रेस की जड़ें हिला दी थीं। अब चाय बागान क्षेत्रों में चाय जनजाति समुदाय BJP की ओर पूरी तरह शिफ्ट हो चुका है, जो NDA के लिए बड़ा वोट बैंक साबित हो रहा है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पिछले कई चुनावों में अपनी भविष्यवाणियों को सही साबित किया है, इसलिए उनकी इस घोषणा को राजनीतिक गलियारों में काफी गंभीरता से लिया जा रहा है।

Assam Election 2026: NDA की मजबूती के पीछे क्या कारण हैं?

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि हिमंत बिस्वा सरमा की लोकप्रियता और विकास कार्यों का असर असम की जनता पर साफ दिख रहा है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार ने चाय बागान मजदूरों, आदिवासी समुदायों और युवाओं के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। चाय जनजाति समुदाय, जो असम की आबादी का बड़ा हिस्सा है, पहले कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक था। लेकिन 2016 के बाद यह समुदाय BJP की ओर आकर्षित हुआ। इसके अलावा, राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार, सीमा सुरक्षा और आर्थिक विकास के मुद्दों पर NDA की छवि मजबूत है।

Assam Election 2026: कांग्रेस का पलटवार और विपक्ष की रणनीति

कांग्रेस ने हिमंत बिस्वा सरमा के दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। कांग्रेस प्रवक्ता बरनाली फुकन ने कहा कि मुख्यमंत्री ख्वाब देख रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि असम की जनता NDA के मिसरूल से तंग आ चुकी है और इस बार बदलाव की बयार चलेगी। कांग्रेस का कहना है कि महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की समस्याओं के कारण जनता में सरकार के खिलाफ गुस्सा है। पार्टी ने युवाओं, महिलाओं और अल्पसंख्यक समुदायों को लक्ष्य करके चुनावी रणनीति बनाई है।

Assam Election 2026: छोटे दलों की भूमिका और प्रभाव

रायजोर दल और असम जतिया परिषद जैसे छोटे दलों का प्रभाव सीमित क्षेत्रों तक है। हिमंत सरमा ने साफ कहा कि रायजोर दल को सिर्फ एक सीट मिल सकती है और असम जतिया परिषद को शून्य सीटें मिलने का अनुमान है। ये छोटे दल मुख्य रूप से स्थानीय मुद्दों पर वोट मांग रहे हैं, लेकिन बड़े स्तर पर चुनावी समीकरण बदलने की क्षमता इनमें नहीं दिख रही है। NDA की मजबूत संगठनात्मक ताकत और विकास के एजेंडे के सामने इन दलों का प्रभाव सीमित रहने की संभावना है।

Assam Election 2026: असम चुनाव 2026 का रणनीतिक महत्व

असम विधानसभा चुनाव 2026 पूरे पूर्वोत्तर भारत की सियासत पर असर डालने वाला है। अगर NDA 90-100 सीटों के करीब पहुंचती है तो हिमंत बिस्वा सरमा की नेतृत्व क्षमता एक बार फिर साबित हो जाएगी। यह चुनाव NDA के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि असम में BJP की सरकार पिछले 10 साल से सत्ता में है। लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का लक्ष्य रखते हुए पार्टी पूरे जोर-शोर से चुनावी मैदान में है। विपक्ष की कोशिश है कि जाति, धर्म और क्षेत्रीय मुद्दों को उठाकर NDA को घेरा जाए।

Assam Election 2026: चुनाव की तैयारियां और सुरक्षा व्यवस्था

चुनाव आयोग ने असम विधानसभा चुनाव के लिए एकल चरण में मतदान की घोषणा की है। 9 अप्रैल 2026 को पूरे राज्य में वोट डाले जाएंगे। सुरक्षा के मद्देनजर केंद्रीय बलों की तैनाती की जा रही है। राज्य में पिछले चुनावों में कुछ हिंसा की घटनाएं हुई थीं, इसलिए इस बार सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। नामांकन प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है और सभी पार्टियां अपने उम्मीदवारों की लिस्ट तैयार करने में लगी हुई हैं।

निष्कर्ष: असम की जनता क्या फैसला करेगी?

9 अप्रैल 2026 को असम की जनता अपना फैसला सुनाएगी। हिमंत बिस्वा सरमा का दावा है कि NDA 90-100 सीटें जीतेगी और राज्य में फिर से स्थिर सरकार बनेगी। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल बदलाव की बात कर रहे हैं। अब देखना यह है कि असम की जनता विकास और स्थिरता को तरजीह देगी या बदलाव का रास्ता चुनेगी। चुनावी नतीजे न सिर्फ असम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर की राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं।

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