फौज ने निभाया बाप का फर्ज, बेटी ने सैनिकों के हाथों पर चलकर थामा दूल्हे का हाथ
शहीद हवलदार हरेंद्र की बेटी प्राची की शादी में 21 जाट रेजीमेंट के जवान आए, हाथों पर चलकर स्टेज तक पहुंचाई दुल्हन, साढ़े छह लाख का कन्यादान दिया
Army daughter wedding: कुछ रिश्ते खून से नहीं, कंधे से कंधा मिलाकर लड़ने से बनते हैं। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के काठा गांव में ऐसा ही एक दृश्य सामने आया, जिसने देखने वाले हर शख्स की आंखें नम कर दीं। जब एक शहीद जवान की बेटी की शादी थी और पिता नहीं थे, तो पूरी 21 जाट रेजीमेंट उसके परिवार की जगह आकर खड़ी हो गई। यह कहानी है हवलदार हरेंद्र की, जो वर्ष 2001 में सेना में भर्ती हुए और 21 जाट रेजीमेंट में देश की सेवा करते रहे। साल 2020 में अरुणाचल प्रदेश में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने उन्हें उनके परिवार से छीन लिया। उनके जाने के बाद पत्नी अमृता देवी और तीन बच्चों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। लेकिन हरेंद्र के साथी सैनिकों ने कभी इस परिवार को अकेला नहीं छोड़ा।
Army daughter wedding: जब बेटी की शादी तय हुई, साथियों ने ठाना कि पूरा करेंगे दोस्त का फर्ज
समय बीतता रहा। हवलदार हरेंद्र की बड़ी बेटी प्राची की शादी तय हुई तो उनके साथी सैनिकों ने आपस में मिलकर फैसला किया कि अपने दोस्त की याद में वे इस पूरे आयोजन की जिम्मेदारी उठाएंगे। इसके लिए सभी ने एक साथ अपनी ड्यूटी से छुट्टी मांगी और अनुमति मिलते ही देश के अलग अलग कोनों से काठा गांव की ओर निकल पड़े। दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और मेरठ से सैनिक पहुंचे। रिटायर्ड कैप्टन राजेश गुलिया, कैप्टन यशपाल सिंह, सूबेदार धर्मवीर सिंह, सूबेदार रामरतन, सूबेदार धर्मेंद्र और हवलदार किरनपाल समेत दर्जनों जवान शादी में शामिल हुए। दिल्ली से सूबेदार अमित कुमार और सूबेदार सागर मलिक, राजस्थान से हवलदार अनुज कुमार, हरियाणा से सूबेदार जितेंद्र सिंह और मेरठ से सेवानिवृत्त कैप्टन रविंद्र समेत करीब 10 से 12 सैनिकों ने इस समारोह में परिवार के सदस्य की तरह भाग लिया।
Army daughter wedding: बारात के स्वागत से लेकर मंडप तक, सैनिकों ने संभाला सब कुछ
सोमवार की सुबह से ही ये जवान शादी की हर जिम्मेदारी संभालने में जुट गए। बारात का स्वागत हो, रस्मों की तैयारी हो या मंडप में बेटी के साथ खड़े होने की बात, सैनिकों ने हर काम उस तरह किया जैसे वे इस परिवार के अपने हों। मंडप में जब प्राची के साथ खड़े होने का वक्त आया तो ये जवान उसके पिता की जगह डटकर खड़े रहे और एक पल के लिए भी हरेंद्र की कमी महसूस नहीं होने दी। सैनिकों ने मिलकर करीब साढ़े छह लाख रुपये का कन्यादान भी दिया। यह रकम किसी के लिए मायने नहीं रखती, लेकिन उस भावना का कोई मोल नहीं जो इस कन्यादान के पीछे छिपी थी। एक दोस्त की बेटी को उसका हक दिलाना था और उन जवानों ने वह जिम्मेदारी पूरे दिल से निभाई।
Army daughter wedding: सैनिकों के हाथों पर चलकर दुल्हन पहुंची स्टेज तक
शादी का सबसे भावुक और अविस्मरणीय दृश्य तब सामने आया जब दुल्हन प्राची को स्टेज तक पहुंचाने का समय आया। सभी सैनिक जमीन पर बैठ गए और उन्होंने अपने हाथ आगे की ओर फैला दिए। प्राची ने इन हाथों को सहारा बनाया और धीरे धीरे आगे बढ़ते हुए स्टेज तक पहुंची। मानो पिता की जगह पूरी फौज बेटी के कदमों के नीचे आ गई हो। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर एक इंसान की आंखें भर आईं। गांव के बुजुर्गों ने कहा कि उन्होंने जिंदगी में ऐसा नजारा पहले कभी नहीं देखा था। फौज में बनने वाले रिश्ते सिर्फ वर्दी तक सीमित नहीं होते, यह बात उस दिन पूरे काठा गांव ने अपनी आंखों से देखी।
Army daughter wedding: विदाई में सैनिकों की आंखें हुईं नम
शादी की रस्में पूरी हुईं। फेरे हुए। और फिर वह वक्त आया जब प्राची की डोली उठनी थी। जैसे ही विदाई का वक्त आया, माहौल पूरी तरह भावुक हो गया। मां अमृता देवी की आंखों से आंसू रुक नहीं रहे थे। और उन सैनिकों की आंखें भी नम हो गईं जो इतनी दूर से आए थे। उन्होंने अपने दोस्त की बेटी को जिस तरह विदा किया, वह सेना के भाईचारे की सबसे सच्ची तस्वीर थी।
Army daughter wedding: कौन है दुल्हन प्राची और दूल्हा शुभम
दुल्हन प्राची परिवार में सबसे बड़ी संतान है। उसने ग्रेजुएशन पूरी कर ली है और बैंकिंग सेक्टर की प्री परीक्षा भी पास कर चुकी है, जबकि मुख्य परीक्षा आगे होनी है। दूल्हा शुभम नोएडा में एचडीएफसी बैंक में सहायक शाखा प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं। दोनों की यह जोड़ी देखकर गांव वालों ने कहा कि हरेंद्र अगर आज होते तो सबसे खुश वही होते। प्राची के छोटे भाई हर्षित ने 2025 में अग्निवीर भर्ती के तहत सेना में जगह बनाई है और इस वक्त सिक्किम में तैनात हैं। पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए उसने भी देश की सेवा का रास्ता चुना। वहीं सबसे छोटा भाई अक्षित बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स की पढ़ाई कर रहा है।
Army daughter wedding: फौजी रिश्ते जिंदगी भर के होते हैं
काठा गांव के लोगों ने एक बात महसूस की जो शायद वे पहले कभी इतनी गहराई से नहीं समझे थे। सेना में बनने वाले रिश्ते सिर्फ ड्यूटी तक नहीं होते। वे जिंदगी भर का वादा होते हैं। जब हरेंद्र इस दुनिया में नहीं रहे, तब भी उनके साथी उनकी बेटी की शादी में बाप की जगह आकर खड़े हो गए। इससे बड़ी दोस्ती और इससे बड़ा फर्ज क्या होगा। यह घटना सिर्फ एक शादी की कहानी नहीं है। यह उस जज्बे की कहानी है जो हमारे जवानों को बाकी सबसे अलग बनाता है। सरहद पर एक साथ खड़े होने वाले ये जवान जिंदगी की हर जंग में भी एक दूसरे के साथ खड़े रहते हैं।
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