दिल्ली का पहला मॉल ‘अंसल प्लाजा’ कैसे बन गया भूतिया खंडहर? 1999 में था शहर की शान, आज दिन में भी पैर रखने से कतराते हैं लोग, जानें पूरी कहानी

कभी दिल्ली का सबसे लोकप्रिय शॉपिंग मॉल रहा अंसल प्लाजा आज खाली और सुनसान क्यों हो गया?

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Ansal Plaza Story: दिल्ली इतिहास और आधुनिकता का अनोखा संगम। जिस शहर में लाल किले की प्राचीन दीवारें हैं उसी शहर में आधुनिक मॉल कल्चर ने भी सबसे पहले दस्तक दी थी। 90 के दशक के आखिर में जब पूरे देश में मॉल कल्चर की शुरुआत भी नहीं हुई थी तब दक्षिण दिल्ली में एक ऐसा शॉपिंग मॉल खुला जिसने दिल्लीवासियों को मानो एक नई दुनिया से परिचित करा दिया। इस मॉल का नाम था अंसल प्लाजा। लेकिन आज यही मॉल एक वीरान खंडहर बन चुका है जिसे लोग भूतिया घर कहने लगे हैं। दिन में भी यहां जाने पर एक अजीब सी सिहरन होती है। आखिर कैसे दिल्ली की शान कहा जाने वाला यह मॉल इस हाल में पहुंचा? क्या है इसके पतन की कहानी? आइए जानते हैं।

Ansal Plaza Story: 1999 – जब अंसल प्लाजा था दिल्ली की शान

साल 1999 की बात करें तो उस दौर में दिल्ली में मॉल कल्चर बिल्कुल नई चीज थी। उस वक्त के बूमर और मिलेनियल बच्चों ने वीकेंड मॉल कल्चर को नहीं देखा था। तब दक्षिण दिल्ली में अंसल प्लाजा का उद्घाटन हुआ और यह दिल्ली का पहला बड़ा आधुनिक शॉपिंग मॉल बन गया।

उस दौर में इस मॉल की रौनक देखते ही बनती थी। यहां दिनभर इतनी भीड़ रहती थी कि अंदर पैर रखने की जगह नहीं होती थी। बेसमेंट में गाड़ी पार्क करने के लिए जगह नहीं मिलती थी। दिल्ली के सभी बड़े ब्रांड्स के शोरूम यहीं पहली बार खुले थे। यह मॉल डेटिंग के लिए एक खास ठिकाना बन गया था। फिल्मी प्रमोशन यहां होते थे। कई ऐसी सुविधाएं थीं जो उस वक्त दिल्ली में कहीं नहीं थीं। पूरे शहर के लिए यह मॉल एक पिकनिक स्पॉट की तरह था।

Ansal Plaza Story: आज का अंसल प्लाजा – सन्नाटा और अंधेरा

लेकिन आज वही अंसल प्लाजा एकदम अलग दिखता है। जहां कभी हर कोने में भीड़ होती थी आज वहां सिर्फ सन्नाटा पसरा है। जहां कभी बड़े-बड़े ब्रांड्स के शोरूम चमकते थे आज वहां बंद दुकानों की कतार है। जहां कभी रोशनी थी आज वहां अंधेरा और उदासी है।

अगर आज कोई अंसल प्लाजा जाए तो उसे शायद ही आम लोग दिखें। यहां बस शोरूम स्टाफ, डिलीवरी एग्जीक्यूटिव और गार्ड ही नजर आते हैं। मॉल की सीढ़ियों की हालत इतनी जर्जर है कि अकेले जाने में डर महसूस होता है। खराब लिफ्ट, टूटी-फूटी छत और बंद पड़े शोरूम यह सब मिलकर इस जगह को एक भुतहा अहसास देते हैं।

आज इस पूरे मॉल में बस एक-दो रेस्टोरेंट, एक स्पा सेंटर और एक गेम प्लाजा बचे हैं। बाकी पूरा मॉल सूना पड़ा है।

क्यों बन गया भूतिया – असली कारण

अंसल प्लाजा के इस हाल के पीछे कोई भूत-प्रेत की कहानी नहीं है। इसकी असली वजह बेहद सांसारिक है प्रतिस्पर्धा, उपेक्षा और बदलते वक्त के साथ न चल पाना।

नए मॉल्स का आगमन: जब अंसल प्लाजा खुला था तब दिल्ली में इस स्तर का कोई दूसरा मॉल नहीं था। लेकिन 2000 के दशक में दिल्ली-NCR में एक के बाद एक नए और भव्य मॉल खुलने लगे। DLF Mall of India, Select Citywalk, Ambience Mall, Pacific Mall इन सबने बाजार में आकर अंसल प्लाजा की हिस्सेदारी छीन ली।

रखरखाव की अनदेखी: जो मॉल वक्त के साथ खुद को अपग्रेड करते रहे और जिनका रखरखाव सही से होता रहा वे आज भी चमक रहे हैं। लेकिन अंसल प्लाजा में न तो नवीनीकरण हुआ और न ही रखरखाव पर ध्यान दिया गया। धीरे-धीरे बड़े ब्रांड्स ने इस मॉल को छोड़कर नए और बेहतर मॉल्स में जगह ली।

ग्राहकों का पलायन: जब ब्रांड्स गए तो ग्राहक भी गए। और जब ग्राहक कम हुए तो और ब्रांड्स ने मॉल छोड़ा। यह एक दुष्चक्र बन गया जो मॉल को धीरे-धीरे वीरान करता चला गया।

Ansal Plaza Story: 2016 में रीलॉन्च – लेकिन कोई फायदा नहीं

मॉल की बिगड़ती हालत को देखते हुए साल 2016 में इसे रीलॉन्च करने की कोशिश की गई। नए सिरे से इसे पेश किया गया लेकिन यह प्रयास भी कारगर नहीं हुआ। तब तक दिल्ली-NCR में इतने नए और आधुनिक मॉल आ चुके थे कि अंसल प्लाजा की ओर लोगों को खींचना लगभग असंभव हो गया था।

अंसल प्लाजा का सबक – बदलाव न करने की कीमत

अंसल प्लाजा की कहानी व्यापार की दुनिया में एक बड़ा सबक है। जो संस्था या व्यापार वक्त के साथ खुद को नहीं बदलता, प्रतिस्पर्धा में अपग्रेड नहीं होता और ग्राहकों की बदलती जरूरतों को नहीं समझता — उसका यही हश्र होता है।

1999 में जब अंसल प्लाजा खुला था तब यह अपने आप में क्रांतिकारी था। लेकिन जो बात उसे उस वक्त खास बनाती थी बड़े ब्रांड्स, आधुनिक सुविधाएं, विशाल जगह वह सब बाद में आने वाले मॉल्स ने उससे बेहतर तरीके से पेश किया।

Ansal Plaza Story: क्या होगा अंसल प्लाजा का भविष्य?

दिल्ली के रियल एस्टेट बाजार में इतनी प्राइम लोकेशन पर स्थित यह मॉल लंबे समय तक ऐसे ही नहीं रह सकता। संभव है कि आने वाले वर्षों में इस जगह का पुनर्विकास हो और यहां कोई नया प्रोजेक्ट आए। लेकिन फिलहाल यह मॉल अपने गौरवशाली अतीत की याद दिलाता हुआ एक वीरान इमारत की तरह खड़ा है।

दिल्ली की नई पीढ़ी शायद अंसल प्लाजा का नाम भी न जानती हो। लेकिन जो लोग 90 के दशक और 2000 के शुरुआती सालों में यहां आए थे उनके लिए यह मॉल एक यादगार जगह है एक ऐसा दौर जब दिल्ली में मॉल जाना एक खास अनुभव हुआ करता था।

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