पश्चिम एशिया युद्ध के बीच भारत की कूटनीतिक सक्रियता तेज, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अराघची से चौथी बार की अहम बातचीत; होर्मुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा
पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारत सतर्क, जयशंकर-अराघची वार्ता में सुरक्षा और BRICS मुद्दों पर चर्चा
India Iran diplomacy: पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। इस संकट की घड़ी में भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता का परिचय देते हुए एक बेहद अहम कदम उठाया है। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ एक और महत्वपूर्ण वार्ता की है। यह दोनों नेताओं के बीच मात्र कुछ ही हफ्तों में चौथी बड़ी बातचीत है, जो इस बात का प्रमाण है कि भारत इस क्षेत्रीय संकट को लेकर कितना सतर्क और सक्रिय है।
India Iran diplomacy: जयशंकर ने खुद दी जानकारी
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इस वार्ता की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की। उन्होंने लिखा कि ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ एक और बातचीत हुई जिसमें द्विपक्षीय मामलों के साथ साथ ब्रिक्स से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इस पोस्ट ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में खासी चर्चा बटोरी क्योंकि यह वार्ता ऐसे समय हुई जब पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है।
India Iran diplomacy: चार बार हो चुकी है वार्ता
यह जानना जरूरी है कि जयशंकर और अराघची के बीच यह पहली बातचीत नहीं है। इससे पहले 28 फरवरी, 5 मार्च और 10 मार्च को भी दोनों नेताओं के बीच फोन पर उच्चस्तरीय वार्ता हो चुकी है। यानी महज दो हफ्तों में चार बार दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच सीधा संवाद हुआ है। यह कूटनीतिक गतिविधि इस बात का संकेत है कि भारत इस युद्ध के प्रभावों को लेकर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता और हर मोर्चे पर अपनी स्थिति मजबूत रखना चाहता है।
India Iran diplomacy: किन मुद्दों पर हुई चर्चा
दोनों विदेश मंत्रियों के बीच हुई वार्ता में कई अहम विषयों पर बातचीत हुई। सबसे प्रमुख मुद्दा था पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष और उसका क्षेत्रीय तथा वैश्विक असर। इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले भारतीय जहाजों और तेल टैंकरों की सुरक्षा पर भी गहन चर्चा हुई। शिपिंग मार्गों की सुरक्षा और व्यापारिक जहाजों के निर्बाध आवागमन को सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही ब्रिक्स संगठन के तहत आपसी सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ करने पर भी विचार विमर्श हुआ।
India Iran diplomacy: ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर लगाए गंभीर आरोप
वार्ता के दौरान ईरानी पक्ष ने अपना स्पष्ट रुख रखा। ईरान ने अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों को खुली आक्रामकता और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार दिया। ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने अपने देश के आत्मरक्षा के अधिकार पर जोर देते हुए कहा कि ईरान किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है। इसके साथ ही ईरान ने ब्रिक्स जैसा बहुपक्षीय मंचों से यह अपील भी की कि वे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवाज उठाएं और इस संघर्ष को रोकने में अपनी भूमिका निभाएं।
India Iran diplomacy: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर क्यों टिकी है दुनिया की नजर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त और सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल व्यापार का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। भारत जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक इसी मार्ग पर निर्भर है। अगर यह मार्ग बाधित होता है तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा असर पड़ सकता है। यही वजह है कि भारत इस संकट को लेकर इतनी तत्परता से कदम उठा रहा है।
India Iran diplomacy: भारत की संतुलित विदेश नीति की परीक्षा
पश्चिम एशिया का यह संकट भारत की संतुलित विदेश नीति के लिए एक बड़ी परीक्षा है। एक तरफ भारत के ईरान के साथ ऐतिहासिक और व्यापारिक संबंध हैं। चाबहार बंदरगाह परियोजना, ऊर्जा व्यापार और मध्य एशिया तक पहुंच के लिए ईरान भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दूसरी तरफ इजरायल के साथ भी भारत की मजबूत रक्षा और तकनीकी साझेदारी है। अमेरिका के साथ तो भारत के संबंध पिछले दो दशकों में नई ऊंचाइयों पर पहुंचे हैं। ऐसे में तीनों पक्षों के साथ संतुलन बनाए रखना भारतीय कूटनीति की सबसे बड़ी चुनौती है।
India Iran diplomacy: भारत ईरान संबंधों की मजबूत बुनियाद
भारत और ईरान के बीच संबंध केवल तेल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। चाबहार बंदरगाह इस रिश्ते की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है जो भारत को पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचने का रास्ता देता है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंध भी गहरे हैं। इसीलिए भारत इस संकट में ईरान के साथ संवाद की डोर टूटने नहीं देना चाहता।
India Iran diplomacy: वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा असर
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर केवल उस क्षेत्र तक सीमित नहीं है। पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था इससे प्रभावित हो रही है। कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। शिपिंग कंपनियां वैकल्पिक मार्ग अपनाने पर मजबूर हो रही हैं जिससे माल ढुलाई महंगी हो गई है। भारत जैसे देश जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं, उन्हें इस संकट की सबसे ज्यादा मार झेलनी पड़ रही है। ऐसे में जयशंकर की यह कूटनीतिक सक्रियता देश के आर्थिक हितों की रक्षा के लिहाज से भी बेहद जरूरी है।
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