होर्मुज में युद्ध के बीच रांची के मर्चेंट नेवी कैप्टन राकेश रंजन की मौत, दिल का दौरा पड़ने पर दुबई ATC ने एयरलिफ्ट से किया इनकार, समय पर इलाज न मिलने से गई जान, परिवार ने सरकार से न्याय और पार्थिव शरीर लाने की लगाई गुहार
दुबई ATC ने एयरलिफ्ट रोका, इलाज न मिलने से गई जान
Rakesh Ranjan: समुद्र की लहरों पर सवार होकर देश का झंडा ऊंचा रखने वाले एक बहादुर नाविक की जान आज उसी समुद्र में चली गई, जिसे उसने अपना कार्यक्षेत्र बनाया था। मध्य पूर्व में छिड़े युद्ध की आग में एक झारखंडी परिवार का चिराग हमेशा के लिए बुझ गया।
Rakesh Ranjan: कैप्टन राकेश रंजन सिंह कौन थे और वे कहाँ तैनात थे
रांची निवासी कैप्टन राकेश रंजन सिंह मर्चेंट नेवी में एक अनुभवी और कुशल अधिकारी थे। वे 2 फरवरी 2026 से ऑयल टैंकर जहाज अवाना पर फ्लीट मैनेजमेंट की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनका जहाज स्ट्रेट्स ऑफ होर्मुज के समुद्री मार्ग से होकर गुजर रहा था, जो इस समय अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष के कारण दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री मार्गों में से एक बन चुका है।
Rakesh Ranjan: दिल का दौरा पड़ा और मदद के लिए कोई नहीं आया
जहाज पर ड्यूटी के दौरान कैप्टन राकेश रंजन को अचानक दिल का दौरा पड़ा। जहाज के चालक दल ने तत्काल मदद के लिए दुबई एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क किया और उन्हें हवाई मार्ग से निकालने की गुजारिश की। लेकिन दुबई ATC ने क्षेत्र में जारी युद्धक परिस्थितियों का हवाला देकर एयरलिफ्ट करने से साफ मना कर दिया। इसके बाद जब तक वैकल्पिक व्यवस्था की कोशिश हुई, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और कैप्टन राकेश की जान नहीं बच सकी।
Rakesh Ranjan: स्ट्रेट्स ऑफ होर्मुज में युद्ध के हालात कितने गंभीर हैं
स्ट्रेट्स ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी और अरब सागर को जोड़ने वाला एक संकरा समुद्री मार्ग है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष के कारण इस क्षेत्र में हवाई और समुद्री आवाजाही पर गंभीर प्रतिबंध लग गए हैं। कई देशों ने अपने नागरिकों को इस क्षेत्र से दूर रहने की सलाह दी है और आपात स्थिति में भी बचाव अभियान चलाना बेहद कठिन हो गया है।
Rakesh Ranjan: परिवार किस स्थिति में है और क्या मांग कर रहा है
कैप्टन राकेश रंजन की मौत की खबर जब रांची पहुंची तो पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिजन इस बात से और भी आहत हैं कि समय पर चिकित्सा सहायता मिलती तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी। परिवार अब शासन प्रशासन से मांग कर रहा है कि कैप्टन राकेश रंजन का पार्थिव शरीर जल्द से जल्द रांची लाया जाए। परिजनों ने केंद्र सरकार और झारखंड सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है।
Rakesh Ranjan: मर्चेंट नेवी के नाविकों की सुरक्षा का सवाल क्यों उठता है
भारत दुनिया के सबसे बड़े समुद्री नाविक देशों में से एक है। हजारों भारतीय नागरिक मर्चेंट नेवी में काम करते हैं और दुनिया के विभिन्न खतरनाक समुद्री मार्गों से गुजरते हैं। समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, युद्धग्रस्त क्षेत्रों से गुजरने वाले जहाजों पर तैनात नाविकों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की गारंटी होनी चाहिए। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि युद्ध की परिस्थितियों में निर्दोष नागरिकों की जान की जिम्मेदारी कौन लेगा।
Rakesh Ranjan: इस मामले में सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए
भारतीय विदेश मंत्रालय और शिपिंग मंत्रालय इस तरह की घटनाओं को गंभीरता से लेते हैं। कूटनीतिक स्रोतों के अनुसार युद्धग्रस्त क्षेत्रों में काम करने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रोटोकॉल बनाने की जरूरत है। झारखंड सरकार को भी इस मामले में केंद्र सरकार के साथ समन्वय करके परिवार को शीघ्र राहत दिलानी चाहिए। पार्थिव शरीर को वापस लाने की प्रक्रिया में दूतावास स्तर पर तत्काल प्रयास किए जाने चाहिए।
निष्कर्ष
कैप्टन राकेश रंजन सिंह की मौत केवल एक परिवार का दुख नहीं है। यह उस खामोश त्रासदी की कहानी है जो युद्ध की आग से दूर रहने वाले निर्दोष नागरिकों की जिंदगी में उतर आती है। होर्मुज की लहरों में जहाँ दो देशों की सैन्य ताकत टकरा रही है, वहाँ एक भारतीय नाविक की जान चली गई क्योंकि उसे समय पर इलाज नहीं मिल सका। यह घटना सरकारों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि युद्ध के दौरान निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है।
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