मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच भारतीय तेल आपूर्ति को बड़ी राहत, कैप्टन की सूझबूझ से होर्मुज स्ट्रेट पार कर मुंबई पहुंचा 1.35 लाख टन कच्चे तेल से भरा टैंकर; सिग्नल बंद कर बचाया जहाज
सिग्नल बंद कर कैप्टन ने टैंकर को खतरे से निकाला, 1.35 लाख टन तेल लेकर मुंबई पहुंचा जहाज
India crude oil supply: मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग का आज 13वां दिन है। हर गुजरते दिन के साथ यह संघर्ष और भयावह होता जा रहा है। इस युद्ध के बीच ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में तेल के टैंकरों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है, जिससे पूरी दुनिया में कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने का खतरा मंडराने लगा है। भारत जैसे देश जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयातित तेल पर बहुत अधिक निर्भर हैं, उनके लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक बन गई थी। लेकिन इस तनावपूर्ण माहौल में एक राहत भरी खबर आई है। सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर निकला एक टैंकर होर्मुज स्ट्रेट को सफलतापूर्वक पार करते हुए मुंबई के तट पर पहुंच गया है।
India crude oil supply: कौन सा टैंकर था और कितना तेल लेकर आया?
लाइबेरिया के झंडे तले चलने वाला यह तेल टैंकर शेनलॉन्ग नाम का सुएजमैक्स श्रेणी का जहाज है। यह टैंकर अपने साथ 1,35,335 मीट्रिक टन सऊदी अरब का कच्चा तेल लेकर मुंबई पहुंचा है। इस जहाज का संचालन एथेंस स्थित डायनाकोम टैंकर मैनेजमेंट कंपनी करती है। तेल की यह खेप भारत के लिए इसलिए भी बेहद अहम है क्योंकि यह हाल के क्षेत्रीय तनाव के बाद होर्मुज स्ट्रेट से सफलतापूर्वक निकलकर भारत पहुंचने वाला पहला बड़ा कच्चे तेल का शिपमेंट है।
India crude oil supply: कैप्टन ने कैसे पूरा किया यह खतरनाक मिशन?
यह पूरा मिशन किसी बॉलीवुड फिल्म की कहानी से कम नहीं है। जब जहाज होर्मुज स्ट्रेट के उस खतरनाक इलाके के करीब पहुंचा जहां ईरान की नजरें हर आने जाने वाले जहाज पर टिकी हुई थीं, तब कैप्टन ने एक बेहद चतुर और साहसी फैसला लिया। उन्होंने जहाज का AIS यानी ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम अस्थायी रूप से बंद कर दिया। यह वही ट्रैकिंग सिस्टम होता है जिससे किसी भी जहाज की लाइव लोकेशन दुनिया में कहीं से भी देखी जा सकती है। सिग्नल बंद करने के बाद यह जहाज रडार से गायब हो गया और ईरान की नजरों से बच निकला। इसके बाद 11 मार्च को यह टैंकर सुरक्षित रूप से मुंबई पहुंच गया।
India crude oil supply: मुंबई में कहां जाएगा यह तेल?
मुंबई बंदरगाह पर डॉक होने के बाद इस टैंकर से कच्चे तेल की आपूर्ति पूर्वी मुंबई के माहुल इलाके में स्थित रिफाइनरियों को की जाएगी। इन रिफाइनरियों में कच्चे तेल को परिष्कृत करके पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पाद तैयार किए जाते हैं जो देश के विभिन्न हिस्सों में भेजे जाते हैं। इस शिपमेंट के पहुंचने से भारत में ईंधन आपूर्ति को लेकर जो चिंता बनी हुई थी उसमें काफी राहत मिली है।
India crude oil supply: होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना अहम?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे व्यस्त और सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग माना जाता है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। यह संकरा जलमार्ग ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी को जोड़ता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों से निकलने वाला अधिकांश तेल इसी रास्ते से होकर दुनिया के बाकी हिस्सों तक पहुंचता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का करीब 85 प्रतिशत आयात के जरिए पूरा करता है।
India crude oil supply: ईरान क्यों बना रहा है टैंकरों को निशाना?
ईरान की रणनीति यह है कि अगर उस पर अमेरिका और इजरायल की ओर से दबाव बढ़ाया जाता है तो वह इस अहम जलमार्ग को बाधित करके पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। यह उसका सबसे बड़ा हथियार है जिसे वह समय समय पर इस्तेमाल करने की धमकी देता रहा है। इससे पहले भी खबर आई थी कि ईरान ने अमेरिका के एक तेल टैंकर पर हमला किया था जिसमें एक भारतीय नागरिक की जान चली गई थी। इस हमले ने भारत की चिंता और बढ़ा दी थी क्योंकि इस जलमार्ग से बड़ी संख्या में भारतीय नाविक भी गुजरते हैं।
India crude oil supply: भारत सरकार की कूटनीति भी आई काम
इस पूरे संकट में भारत सरकार की कूटनीति भी अहम भूमिका निभा रही है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के साथ बातचीत की और भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की इजाजत दिलाई। यह भारतीय कूटनीति की एक बड़ी सफलता मानी जा रही है क्योंकि एक तरफ भारत अमेरिका और इजरायल के साथ अपने संबंध बनाए रखता है तो दूसरी तरफ ईरान के साथ भी संवाद का रास्ता खुला रखता है।
आगे क्या होगा?
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के जल्द खत्म होने के कोई संकेत नहीं हैं। ऐसे में भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए हर संभव उपाय करने होंगे। सरकार वैकल्पिक समुद्री मार्गों की तलाश भी कर रही है ताकि अगर होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद हो जाए तो भी तेल की आपूर्ति बाधित न हो। फिलहाल शेनलॉन्ग टैंकर की सुरक्षित वापसी ने यह साबित कर दिया है कि सही रणनीति और साहस के साथ इस चुनौती से निपटा जा सकता है। कैप्टन की इस सूझबूझ ने न केवल 1,35,335 मीट्रिक टन कीमती तेल को सुरक्षित भारत पहुंचाया बल्कि यह भी दिखाया कि संकट के समय में अनुभव और समझदारी किसी भी हथियार से ज्यादा कारगर होती है।
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