ईरान युद्ध के बीच राहत की खबर: भारत का LPG जहाज ‘ग्रीन आशा’ ने होर्मुज स्ट्रेट पार किया, अब सिर्फ ‘जग विक्रम’ की वापसी का इंतजार, भारतीय नौसेना की निगरानी में सुरक्षित निकासी
ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच भारतीय LPG जहाज ग्रीन आशा ने होर्मुज स्ट्रेट सफलतापूर्वक पार कर लिया, अब सिर्फ जग विक्रम की सुरक्षित वापसी का इंतजार, नौसेना की सक्रिय भूमिका
LPG Cylinder Crisis: ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे भारतीय जहाजों को एक-एक कर सुरक्षित निकाला जा रहा है। अच्छी खबर है कि भारत के एलपीजी कैरियर जहाज ‘ग्रीन आशा’ ने खतरनाक होर्मुज स्ट्रेट को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। भारतीय नौसेना की निगरानी में यह जहाज अब भारत की ओर लौट रहा है। शिपिंग मंत्रालय और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग की रिपोर्ट के अनुसार, अब होर्मुज क्षेत्र में केवल एक भारतीय LPG जहाज ‘जग विक्रम’ बचा है, जिसकी सुरक्षित वापसी का इंतजार किया जा रहा है।
LPG Cylinder Crisis: ग्रीन आशा ने पार किया खतरनाक रास्ता
रविवार को ‘ग्रीन आशा’ ने होर्मुज स्ट्रेट को क्रॉस किया। इससे पहले 3 अप्रैल को LPG कैरियर ‘ग्रीन सान्वी’ ने भी इसी खतरनाक रास्ते को पार किया था। दोनों जहाज भारतीय नौसेना के सहयोग से सुरक्षित निकले हैं। ‘ग्रीन सान्वी’ 46,655 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर गुजरात के भरूच (दहेज) बंदरगाह पहुंचने वाला है। इसकी अनुमानित पहुंच 7 अप्रैल को है। वहीं, ‘ग्रीन आशा’ के निकलने के बाद होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिमी हिस्से में सिर्फ ‘जग विक्रम’ बचा है, जो भारतीय नौसेना से आगे के निर्देशों का इंतजार कर रहा है।
LPG Cylinder Crisis: अन्य LPG जहाजों की स्थिति
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BW TYR: मुंबई के बाहरी बंदरगाह पर ‘शिप-टू-शिप’ ट्रांसफर ऑपरेशन के जरिए अपना माल उतार रहा है।
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BW ELM: 4 अप्रैल को चेन्नई के एन्नोर बंदरगाह की ओर मोड़ दिया गया था।
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जग वसंत: पिछले हफ्ते 47,612 मीट्रिक टन LPG लेकर गुजरात के कांडला बंदरगाह पहुंच चुका है।
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पाइन गैस: 45,000 मीट्रिक टन LPG लेकर न्यू मैंगलोर पहुंच चुका है।
ये सभी जहाज ईरान पर हुए हमलों और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद फंस गए थे। राजनयिक प्रयासों और भारतीय नौसेना की सतर्क निगरानी के बाद अब ज्यादातर जहाज सुरक्षित निकल रहे हैं।
LPG Cylinder Crisis: खाड़ी क्षेत्र में भारतीय जहाजों और नाविकों की स्थिति
शिपिंग मंत्रालय की नवीनतम रिपोर्ट के मुताबिक:
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फारसी खाड़ी (होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम): 16 भारतीय जहाज
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ओमान की खाड़ी (होर्मुज स्ट्रेट के पूर्व): 4 जहाज
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अदन की खाड़ी: 1 जहाज
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लाल सागर: 2 जहाज
इनमें से पांच जहाज शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) के हैं। खाड़ी क्षेत्र में कुल लगभग 20,000 भारतीय नाविक मौजूद हैं, जिनमें से 528 भारतीय झंडे वाले जहाजों पर सवार हैं। 5 अप्रैल तक विभिन्न शिपिंग कंपनियों ने 1,479 भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकाल लिया है।
LPG Cylinder Crisis: ईरान युद्ध का प्रभाव और भारत की तैयारियां
28 फरवरी को ईरान पर हुए हमलों के बाद होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ गया था। ईरान ने कई जहाजों पर हमले भी किए, जिससे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई। भारत, जो खाड़ी क्षेत्र से बड़ी मात्रा में तेल और एलपीजी आयात करता है, इस स्थिति पर करीब से नजर रखे हुए है। विदेश मंत्रालय और शिपिंग मंत्रालय ने सभी भारतीय जहाजों को सतर्क रहने और जरूरी निर्देश जारी किए हैं। भारतीय नौसेना की जहाजों की सुरक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभा रही है।
LPG Cylinder Crisis: भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर असर
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग है, जिससे वैश्विक तेल का करीब 20 प्रतिशत गुजरता है। भारत जैसे देशों के लिए यह रूट बेहद अहम है। अगर यह रूट लंबे समय तक प्रभावित रहा तो तेल और एलपीजी की कीमतें बढ़ सकती हैं। सरकार पहले से ही वैकल्पिक रूट्स और अन्य देशों से आयात बढ़ाने की तैयारी कर रही है। ‘ग्रीन आशा’ और ‘ग्रीन सान्वी’ जैसे जहाजों का सुरक्षित निकलना भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिए राहत की खबर है।
आगे क्या?
अब सिर्फ ‘जग विक्रम’ की सुरक्षित वापसी का इंतजार है। भारतीय नौसेना और शिपिंग मंत्रालय इस जहाज की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठा रहे हैं। उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में यह जहाज भी सुरक्षित भारत पहुंच जाएगा। ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच मध्यस्थ देश 45 दिन के सीजफायर प्लान पर काम कर रहे हैं। अगर बातचीत सफल हुई तो खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है और जहाजों की आवाजाही सामान्य हो सकती है।
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