आमलकी एकादशी 2026,- आंवला वृक्ष पूजा से मिलेगा मोक्ष का मार्ग, समझिए पूरी विधि और महत्व
28 फरवरी को भगवान नरसिंह और आंवला वृक्ष पूजा, व्रत से पाप नाश, सुख-समृद्धि और मोक्ष प्राप्ति
Amalaki Ekadashi 2026 Puja Vidhi: हिंदू पंचांग के अनुसार, Phalgun Shukla Ekadashi के रूप में मनाई जाने वाली आमलकी एकादशी 27 फरवरी 2026 को शुक्रवार को देशभर के भक्त भगवान विष्णु और पवित्र आंवला वृक्ष की पूजा करेंगे। आध्यात्मिक दृष्टिकोण से यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह त्योहार होली से ठीक पहले आता है, जो भक्तों को आध्यात्मिक रूप से तैयार करता है। इस बार यह एकादशी विशेष योग बना रही है जो भक्तों को बड़े पुण्य का अवसर देगी।
Amalaki Ekadashi 2026 Puja Vidhi: दिव्य महत्व की कहानी
शास्त्रों के अनुसार, इस एकादशी का विशेष महत्व है क्योंकि भगवान विष्णु ने आनंद के अवस्था में जो दिव्य बिन्द गिरे थे, उनसे आंवला का वृक्ष उत्पन्न हुआ।
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पद्म पुराण का वर्णन: पद्म पुराण में वर्णित है कि इस वृक्ष के विभिन्न भागों में अलग-अलग देवता निवास करते हैं:
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जड़ों में: भगवान विष्णु का वास है।
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शीर्ष पर: भगवान ब्रह्मा विराजमान रहते हैं।
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तने में: भगवान शिव का निवास माना गया है।
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पत्तियों में: वसु एवं मरत निवास करते हैं।
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निष्कर्ष: इसलिए, एक साधारण सा दिखने वाला आंवला वृक्ष पूरे दिव्य जगत का प्रतिनिधित्व करता है।
पूजा विधि: पूर्ण अनुष्ठान
भक्तों के लिए सुबह का समय विशेष महत्व रखता है। पूजा की संपूर्ण विधि इस प्रकार है:
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प्रात:काल की शुरुआत: ब्रह्म मुहूर्त में जागने के बाद भक्त स्नान करके साफ कपड़े पहनते हैं और माथे पर तिलक लगाते हैं।
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संकल्प: संकल्प लेने के बाद मुख्य पूजा शुरू होती है।
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वृक्ष पूजन: सबसे पहले आंवला वृक्ष की पूजा की जाती है, जिसका क्षेत्र साफ करके कुमकुम और हल्दी का लेप लगाया जाता है और मौली (कलवा) बांधा जाता है।
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भगवान विष्णु की पूजा: भगवान विष्णु की पूजा 16 उपचारों के साथ की जाती है, जिसमें तुलसी के पत्ते अनिवार्य रूप से अर्पित किए जाते हैं।
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विकल्प: यदि आंवला का वृक्ष उपलब्ध न हो, तो भगवान परशुराम की मूर्ति या विष्णु जी की मूर्ति के पास आंवला फल रखकर पूजा की जा सकती है।
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भक्ति भाव: रात भर जाग्रत रहकर भजन गाना और विष्णु सहस्रनाम या हरे कृष्ण महामंत्र का जाप करना इस व्रत का मुख्य हिस्सा है।
Amalaki Ekadashi 2026 Puja Vidhi: व्रत के विभिन्न प्रकार और नियम
भक्त अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत का प्रकार चुनते हैं:
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पूर्ण व्रत (निर्जला): इसमें पूरा दिन और रात अन्न-जल का त्याग करना होता है, जो अनुभवी भक्तों के लिए है।
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फलहार व्रत: इसमें केवल फल, दूध, दही और साबुदाना का सेवन किया जाता है, जिसमें पानी की अनुमति होती है।
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आंशिक व्रत: इसमें एक समय सात्विक भोजन किया जाता है।
खान-पान के विशेष निर्देश:
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वर्जित आहार: भक्तों को व्रत के दौरान अनाज, चावल, गेहूं, दालें, प्याज, लहसुन, बैंगन और मांस का सेवन वर्जित रखना चाहिए।
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अनुमत आहार: अनुमत आहार में सभी प्रकार के फल, अरबी, कच्चा केला, शकरकंद, दूध, दही, घी, पनीर और सेंधा नमक शामिल हैं।
Amalaki Ekadashi 2026 Puja Vidhi: आध्यात्मिक और शारीरिक लाभ
धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ आधुनिक विज्ञान भी इस व्रत के फायदों को स्वीकार करता है:
| लाभ का प्रकार | मुख्य विवरण |
| आध्यात्मिक लाभ | संचित पापों का विनाश, वैकुंठ धाम में निवास और हजारों अश्वमेध यज्ञों के बराबर पुण्य की प्राप्ति। |
| शारीरिक लाभ | ऑटोफैगी प्रक्रिया (कैंसर की रोकथाम), हार्मोनल संतुलन, मानसिक स्पष्टता और पाचन तंत्र को विश्राम। |
Amalaki Ekadashi 2026 Puja Vidhi: परिवार, समाज और आधुनिक समय का प्रभाव
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पारिवारिक प्रभाव: पारिवारिक सुख-शांति के लिए भी इस व्रत को महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे परिवार में शांति और प्रेम बढ़ता है, सदस्यों के बीच आपसी समझ बनती है और दांपत्य जीवन में मधुरता आती है। यह व्रत करियर और आर्थिक तंगी में भी लाभकारी सिद्ध होता है।
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आधुनिक समय में अनुकूलन: आज के समय में लोग अपने स्वास्थ्य के अनुसार व्रत को अनुकूलित कर रहे हैं। युवा पीढ़ी सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के माध्यम से पूजा के नए तरीके सीख रही है। ऑनलाइन लाइव पूजा और डिजिटल भजन से भी लोग जुड़ रहे हैं।
Amalaki Ekadashi 2026 Puja Vidhi: पारण का महत्व
28 फरवरी को सही समय पर व्रत खोलना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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पारण का शुभ समय: सुबह 6:59 बजे से 9:20 बजे तक है।
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विधि: पारण के समय पहले तुलसी जल पिएं और भगवान विष्णु को धन्यवाद दें, फिर सात्विक भोजन करें।
निष्कर्ष: आमलकी एकादशी 2026 केवल एक पारंपरिक त्योहार नहीं है, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा है। यह त्योहार हमें प्रकृति के साथ जुड़ने, शरीर को शुद्ध करने और मन को शांत करने का अवसर देता है। इस बार का यह व्रत भक्तों के लिए विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध हो सकता है।
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