2047 तक दुनिया की टॉप-3 AI सुपरपावर बनेगा भारत, एआई समिट में पीएम मोदी ने बताया मास्टर प्लान, नौकरियों पर कही बड़ी बात

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में पीएम मोदी का विजन, संप्रभुता, समावेशिता, नवाचार, नौकरियां नहीं खत्म होंगी, नए अवसर आएंगे

0

AI Summit 2026: भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के वैश्विक मंच पर अपनी ताकत का जोरदार प्रदर्शन किया है। नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत का महत्वाकांक्षी एआई विजन पेश करते हुए घोषणा की कि 2047 तक भारत को दुनिया की शीर्ष तीन एआई सुपरपावर में शामिल होना है। यह समिट ग्लोबल साउथ में इस पैमाने पर आयोजित होने वाला पहला वैश्विक एआई सम्मेलन है, जिसमें 20 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्ष, सरकारी प्रतिनिधि, वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनियों के प्रमुख और उद्योग जगत के दिग्गज शामिल हुए।

समिट का मूल मंत्र सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय रखा गया जो भारत की सभ्यतागत सोच को दर्शाता है। पीएम मोदी ने एएनआई को दिए विशेष इंटरव्यू में कहा कि एआई आज एक सभ्यतागत मोड़ पर खड़ा है और यह इंसानी क्षमता को अभूतपूर्व ढंग से बढ़ा सकता है लेकिन अगर सही दिशा न मिले तो यह समाज की मौजूदा व्यवस्था को चुनौती भी दे सकता है।

AI Summit 2026: तीन स्तंभों पर टिका है पीएम मोदी का एआई विजन

प्रधानमंत्री ने अपने एआई विजन को तीन मुख्य स्तंभों पर खड़ा किया है। पहला स्तंभ है संप्रभुता यानी भारत सिर्फ एआई का उपभोक्ता नहीं बल्कि निर्माता बनेगा। भारत के एआई मॉडल दुनियाभर में इस्तेमाल होंगे और लोगों को उनकी अपनी भाषाओं में सेवाएं देंगे। दूसरा स्तंभ है समावेशिता जिसमें एआई का लाभ किसान, एमएसएमई, महिला उद्यमी और जमीनी स्तर के नवाचारकों तक पहुंचाया जाएगा।

तीसरा स्तंभ है नवाचार जहां भारतीय स्टार्टअप्स लाखों गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजित करेंगे और सार्वजनिक एआई प्रणालियां वैश्विक मानक बनेंगी। पीएम मोदी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का एआई में मतलब है कि भारत डिजिटल सदी के लिए अपना खुद का कोड लिखेगा। उनका लक्ष्य सिर्फ एआई अपनाना नहीं बल्कि ऐसा एआई बनाना है जो नागरिकों को सशक्त करे और विकसित भारत 2047 की यात्रा को तेज करे।

एआई से बनेंगे नए अवसर

एआई को लेकर सबसे बड़ी चिंता नौकरियों के खत्म होने की है। लेकिन पीएम मोदी ने इस डर को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि एआई नौकरियां खत्म नहीं करेगा बल्कि नए अवसर पैदा करेगा। उन्होंने कहा कि भारत के पास प्रतिभा और उद्यमशीलता की ऊर्जा है जो उसे एआई पावरहाउस बना सकती है। भारतीय स्टार्टअप्स, अनुसंधान संस्थान और टेक इकोसिस्टम ऐसे एआई समाधान बना सकते हैं जो विनिर्माण को बढ़ाएं, शासन में सुधार करें और नई नौकरियां पैदा करें।

प्रधानमंत्री ने भारत के आईटी सेक्टर को लेकर भी बड़ा बयान दिया और कहा कि एआई इस क्षेत्र को बदल रहा है, खत्म नहीं कर रहा। उन्होंने कहा कि एआई बाजार अनुमानों के अनुसार भारत का आईटी सेक्टर 2030 तक 400 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। सरकार ने युवाओं को एआई कौशल से लैस करने के लिए पांच राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए हैं और स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा तथा टिकाऊ शहरों में चार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी बनाए गए हैं।

AI Summit 2026: एआई बदल रहा भारत की तस्वीर

पीएम मोदी ने बताया कि एआई पहले से ही भारत में स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि में ठोस बदलाव ला रहा है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में एआई आधारित समाधान प्राथमिक और जिला स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी, डायबिटिक रेटिनोपैथी और मिर्गी जैसी बीमारियों की शुरुआती पहचान में मदद कर रहे हैं। शिक्षा में एआई संचालित व्यक्तिगत शिक्षण मंच भारतीय भाषाओं में ग्रामीण और सरकारी स्कूलों के छात्रों को अनुकूलित शैक्षणिक सहायता दे रहे हैं।

कृषि क्षेत्र में डेयरी किसानों की मदद से लेकर फसल पूर्वानुमान तक एआई का उपयोग बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आधार और यूपीआई जैसे डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर एआई की परत चढ़ाकर कल्याणकारी लक्ष्यीकरण, धोखाधड़ी पहचान और सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधार किया जा रहा है। यहां तक कि विरासत संरक्षण में भी एआई प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और व्याख्या में मदद कर रहा है।

डीपफेक पर सरकार की चिंता

पीएम मोदी ने एआई के खतरों को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे एआई अपनाने की रफ्तार बढ़ रही है, जोखिम भी बढ़ रहे हैं। एआई प्रणालियां अनजाने में लिंग, भाषा और सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से जुड़े पूर्वाग्रहों को बढ़ावा दे सकती हैं। भारत की भाषाई, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय विविधता के कारण एआई पूर्वाग्रह यहां ऐसे रूपों में सामने आ सकता है जो पश्चिमी संदर्भ में स्पष्ट नहीं होता।

अंग्रेजी डेटा या शहरी संदर्भ पर प्रशिक्षित एआई प्रणाली ग्रामीण उपयोगकर्ताओं या क्षेत्रीय भाषाओं के वक्ताओं के लिए ठीक से काम नहीं कर सकती। सरकार इसे व्यवस्थित रूप से संबोधित कर रही है और विविध डेटासेट बनाने, क्षेत्रीय भाषाओं में एआई विकास और भारतीय शैक्षणिक संस्थानों में निष्पक्षता अनुसंधान पर जोर दिया जा रहा है। डीपफेक रोकथाम और डेटा सुरक्षा पर भी समानांतर काम हो रहा है।

AI Summit 2026: भारत का एआई इंफ्रास्ट्रक्चर

एआई इम्पैक्ट समिट में 200 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की उम्मीद है जिसमें 90 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता पहले से हो चुकी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत को 200 अरब डॉलर का इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और 17 अरब डॉलर की वेंचर कैपिटल फंडिंग प्रतिबद्धताएं मिली हैं। इंडियाएआई मिशन के तहत भारत में 20,000 अतिरिक्त जीपीयू जोड़े जाने की उम्मीद है जिससे कुल संख्या 38,000 से अधिक हो जाएगी।

इन हाई-एंड जीपीयू की लागत लगभग 65 रुपये प्रति घंटा है जो वैश्विक औसत लागत का एक तिहाई है। बजट 2026-27 में डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर विनिर्माण के लिए अतिरिक्त सहायता दी गई है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत का एआई मॉडल खुली वास्तुकला, बड़े पैमाने पर समावेशन और मजबूत गोपनीयता सुरक्षा पर बना है। यह मॉडल न सिर्फ भारत बल्कि पूरे ग्लोबल साउथ के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि जब दुनिया चिंतित है कि एआई विभाजन बढ़ाएगा, भारत इसका उपयोग विभाजनों को मिटाने में कर रहा है।

Read More Here

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.