हरियाणा राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में हलचल, क्रॉस वोटिंग के डर से 33 विधायक भेजे गए शिमला; 4 विधायकों के इनकार से बढ़ी पार्टी की चिंता

क्रॉस वोटिंग के डर से कांग्रेस ने विधायकों को भेजा शिमला, 4 नेताओं के इनकार से बढ़ी टेंशन

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Haryana Rajya Sabha election: हरियाणा की राजनीति में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल एक ही है कि 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस का पत्ता कटेगा या नहीं। पार्टी को पिछली बार पूरा बहुमत होने के बावजूद हार झेलनी पड़ी थी और इस बार भी शुरुआती संकेत कुछ अच्छे नहीं दिख रहे। क्रॉस वोटिंग के डर से कांग्रेस ने अपने विधायकों को हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला भेजने का फैसला किया लेकिन पार्टी के चार विधायकों ने अलग-अलग कारण गिनाकर साफ इनकार कर दिया। यह घटनाक्रम पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ी चिंता की बात बन गया है।

Haryana Rajya Sabha election: 33 विधायक रवाना, 4 ने किया किनारा

कांग्रेस के कुल 37 में से 33 विधायक बस में सवार होकर शिमला के लिए रवाना हो गए। नेता विपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के आवास के बाहर दो मिनी बस खड़ी की गई थीं और पार्टी प्रभारी बीके हरिप्रसाद की मौजूदगी में विधायकों को भेजा गया। बस में बैठे रतिया से विधायक जरनैल सिंह ने मीडिया को बताया कि उन्हें ट्रेनिंग के लिए लेकर जाया जा रहा है। विधायक जस्सी पेटवाड ने भी यही बात दोहराई और कहा कि सभी एकजुट हैं। हालांकि इनमें से कोई भी यह नहीं बता सका कि उन्हें आखिर किस जगह ले जाया जा रहा है। लेकिन जो चार विधायक पीछे रह गए, वे पार्टी की असली परेशानी बन गए हैं।

Haryana Rajya Sabha election: कौन हैं वो चार विधायक जो नहीं गए शिमला

पहले नाम पर आते हैं विधायक मोहम्मद इलियास का। वे स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर हिमाचल जाने से मना कर गए। बैठक में वे सहारा लेकर पहुंचे और आलाकमान को अपनी तकलीफ बताकर बाहर निकल गए। दूसरे विधायक कुलदीप वत्स ने घर में पारिवारिक आयोजन का कारण बताया। उन्होंने सीनियर नेताओं से माफी मांगते हुए बैठक छोड़ दी। तीसरे विधायक चंद्र मोहन बिश्नोई का रुख सबसे रहस्यमय रहा। उन्होंने कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया और चुपचाप बैठक से निकल गए। चौथी और सबसे चर्चित नाम हैं पहलवान से नेता बनीं विनेश फोगाट। उन्होंने पारिवारिक जिम्मेदारियों और छोटे बच्चे की देखभाल का कारण बताया।

Haryana Rajya Sabha election: क्या है पूरे चुनाव का गणित

हरियाणा की 90 सदस्यीय विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 31 विधायकों के वोट की जरूरत होती है। इस बार दो सीटों पर तीन उम्मीदवार मैदान में हैं, इसलिए मतदान जरूरी हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व सांसद संजय भाटिया को अपना उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने दलित नेता कर्मवीर बौद्ध पर दांव खेला है। इसके अलावा बीजेपी के ही वरिष्ठ नेता सतीश नांदल ने निर्दलीय पर्चा भर दिया है जिससे मुकाबला तिकोना और पेचीदा हो गया है।

Haryana Rajya Sabha election: पिछली बार क्या हुआ था जो डरी हुई है कांग्रेस

कांग्रेस का यह डर बिना वजह नहीं है। पिछले राज्यसभा चुनाव में भी पार्टी के पास जरूरी बहुमत था लेकिन नतीजे में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। यानी कुछ विधायकों ने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर दूसरे उम्मीदवार को वोट दिया था। उस घटना ने पार्टी को झकझोर कर रख दिया था और नेतृत्व के प्रति अंदरूनी असंतोष भी सामने आया था। इसी सबक को ध्यान में रखते हुए इस बार पार्टी ने पहले से ही एहतियाती कदम उठाया और विधायकों को दूसरे राज्य में शिफ्ट करने की योजना बनाई।

Haryana Rajya Sabha election: हुड्डा के घर से शुरू हुई कवायद

भूपेंद्र सिंह हुड्डा हरियाणा में कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे हैं और पार्टी की पूरी रणनीति उनके इर्द-इर्द घूमती है। विधायकों को हिमाचल भेजने की यह पूरी कसरत उनके घर से शुरू हुई। लेकिन खुद पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह पहले यह कहते रहे कि कोई कहीं नहीं जा रहा, लेकिन थोड़ी देर बाद वे खुद भी बस में नजर आए। इस दोहरे बयान ने राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा बटोरी।

Haryana Rajya Sabha election: बीजेपी और निर्दलीय की रणनीति

बीजेपी के सतीश नांदल का निर्दलीय चुनाव लड़ना पार्टी की अपनी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। एक तरफ बीजेपी का आधिकारिक उम्मीदवार संजय भाटिया की जीत लगभग तय मानी जा रही है। दूसरी सीट के लिए नांदल को आगे कर कांग्रेस के असंतुष्ट विधायकों को तोड़ने की कोशिश की जा सकती है। यह फॉर्मूला पहले भी आजमाया जा चुका है और इसमें सफलता भी मिली है।

Haryana Rajya Sabha election: क्या होगा 16 मार्च को

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 16 मार्च को असली तस्वीर सामने आएगी। अगर कांग्रेस के चारों असंतुष्ट विधायक वोट के दिन पार्टी उम्मीदवार के पक्ष में खड़े रहे तो कर्मवीर बौद्ध की जीत होगी। लेकिन अगर यही चार नहीं बल्कि और भी दो-तीन विधायक भटक गए तो फिर इतिहास दोहराया जा सकता है। हरियाणा की राजनीति जहां दलबदल और घर वापसी नई बात नहीं है, वहां इस चुनाव का नतीजा कांग्रेस की अंदरूनी मजबूती की असली परीक्षा होगी। क्या इस बार पार्टी अपने घर को संभाल पाएगी या फिर शिमला की ठंड में भी विधायकों के दिल बदल जाएंगे, यह 16 मार्च की शाम ही तय होगा।

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