IPL 2026 से पहले श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड का बड़ा फैसला, NOC से पहले फिटनेस टेस्ट पास करना अनिवार्य, चोट से जूझ रहे वानिंदु हसरंगा और मथीशा पथिराना समेत कई खिलाड़ियों की भागीदारी पर सस्पेंस, अब प्रदर्शन नहीं बल्कि फिटनेस होगी सबसे बड़ी कसौटी
हसरंगा-पथिराना की IPL एंट्री फिटनेस टेस्ट पर निर्भर, SLC का बड़ा फैसला
NOC rule: क्रिकेट की दुनिया में IPL सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं बल्कि खिलाड़ियों के करियर का सबसे बड़ा वित्तीय और पेशेवर मंच है। लेकिन इस बार श्रीलंका के खिलाड़ियों के लिए IPL 2026 का टिकट पाना उतना आसान नहीं होगा जितना पहले था। श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने साफ कर दिया है कि बिना फिटनेस टेस्ट पास किए NOC नहीं मिलेगी और NOC के बिना IPL में उतरना संभव नहीं है।
NOC rule: श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड का यह नया नियम क्या है
श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने घोषणा की है कि राष्ट्रीय अनुबंध वाले सभी खिलाड़ियों को किसी भी फ्रैंचाइजी लीग में भाग लेने से पहले फिजिकल परफॉर्मेंस टेस्ट पास करना होगा। यह टेस्ट पास करने के बाद ही उन्हें अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी NOC दिया जाएगा।
बोर्ड ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि यह कोई नई या एकमुश्त प्रक्रिया नहीं है बल्कि खिलाड़ियों की फिटनेस जांचने के लिए अपनाई जाने वाली एक नियमित प्रक्रिया है जिसे अब और अधिक कड़ाई से लागू किया जाएगा।
NOC rule: फिजिकल परफॉर्मेंस टेस्ट में क्या-क्या होता है
सूत्रों के अनुसार इस फिजिकल परफॉर्मेंस टेस्ट में कई प्रकार के शारीरिक मानकों की जांच होती है। इसमें दो किलोमीटर की दौड़ सहित ताकत, सहनशक्ति और चपलता से जुड़े विभिन्न परीक्षण शामिल हैं।
खेल विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार के बहुस्तरीय फिटनेस टेस्ट यह सुनिश्चित करते हैं कि खिलाड़ी मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने की स्थिति में हैं और चोट के बाद पूरी तरह से रिकवर हो चुके हैं। यह प्रक्रिया खिलाड़ी और टीम दोनों के लिए फायदेमंद है।
NOC rule: किन श्रीलंकाई खिलाड़ियों पर इस फैसले का असर पड़ेगा
IPL 2026 में कई श्रीलंकाई खिलाड़ी अलग-अलग फ्रैंचाइजी के साथ जुड़े हुए हैं। वानिंदु हसरंगा लखनऊ सुपर जायंट्स, नुवान तुषारा रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, मथीशा पथिराना कोलकाता नाइट राइडर्स और ईशान मलिंगा सनराइजर्स हैदराबाद से जुड़े हैं।
इनमें से हसरंगा, तुषारा और पथिराना अभी चोट से उबरने की प्रक्रिया में हैं और उन्हें अभी फिटनेस टेस्ट देना बाकी है। वहीं दुष्मंथा चमीरा, पथुम निसांका और कामिंदु मेंडिस यह टेस्ट पास कर चुके हैं और उन्हें IPL में खेलने की मंजूरी मिल चुकी है।
NOC rule: वानिंदु हसरंगा कौन हैं और उनकी फिटनेस क्यों है अहम
वानिंदु हसरंगा श्रीलंका के सबसे प्रतिभाशाली ऑलराउंडरों में से एक हैं जो लेग स्पिन गेंदबाजी और निचले क्रम की बल्लेबाजी दोनों में माहिर हैं। वे ICC T20 रैंकिंग में लंबे समय तक शीर्ष गेंदबाजों में शामिल रहे हैं।
हसरंगा को T20 विश्व कप के दौरान चोट लगी थी जिसके बाद वे रिहैबिलिटेशन प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए उनकी उपलब्धता फ्रैंचाइजी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि वे टीम की गेंदबाजी की रणनीति का केंद्र हैं।
NOC rule: मथीशा पथिराना IPL की शुरुआत में क्यों नहीं खेल पाएंगे
मथीशा पथिराना कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए अहम तेज गेंदबाज हैं लेकिन वे IPL 2026 के शुरुआती मैचों में उपलब्ध नहीं होंगे। उन्हें भी T20 विश्व कप के आसपास चोट लगी थी और उनका रिहैबिलिटेशन अभी पूरा नहीं हुआ है।
अनुमान है कि पथिराना अप्रैल के मध्य से ही मैदान पर उतर सकेंगे। IPL 28 मार्च से शुरू हो रहा है इसलिए वे टूर्नामेंट के शुरुआती मुकाबलों से चूक जाएंगे। उनकी फ्रैंचाइजी को अब रणनीति में बदलाव करना होगा।
NOC rule: यह फैसला किसकी पहल पर लिया गया है
यह नई नीति श्रीलंका की नई राष्ट्रीय पुरुष चयन समिति और देश के खेल मंत्रालय की संयुक्त पहल का परिणाम बताई जा रही है। चयन समिति का नेतृत्व प्रमोदया विक्रमसिंघे कर रहे हैं।
क्रिकेट प्रशासन विशेषज्ञों के अनुसार इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खिलाड़ी फ्रैंचाइजी लीग की चमक-धमक में राष्ट्रीय टीम की तैयारी से समझौता न करें। श्रीलंका को मई के अंत तक कोई अंतरराष्ट्रीय पुरुष मैच नहीं खेलना है इसलिए इस अवधि को प्रशिक्षण और फिटनेस सुधार के लिए खास तरीके से उपयोग किया जा रहा है।
NOC rule: आठ हफ्ते का विशेष फिटनेस कार्यक्रम क्या है
श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने राष्ट्रीय अनुबंध वाले सभी खिलाड़ियों के लिए आठ हफ्ते का एक विशेष फिजिकल ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किया है। बोर्ड का कहना है कि इस कार्यक्रम का मकसद आने वाले अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की तैयारी के लिए खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता को ऊंचे स्तर पर ले जाना है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के साथ-साथ फिजिकल परफॉर्मेंस टेस्ट भी चल रहे हैं। केवल वही खिलाड़ी जो तय मानकों को पूरा करेंगे उन्हें घरेलू टूर्नामेंट और IPL जैसी विदेशी लीग में खेलने की अनुमति दी जाएगी।
निष्कर्ष
श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड का यह फैसला एक दूरदर्शी और खिलाड़ी हित में लिया गया कदम है। एक तरफ जहां यह खिलाड़ियों को पूरी तरह फिट होने के बाद ही मैदान पर उतरने के लिए प्रेरित करता है वहीं दूसरी ओर यह राष्ट्रीय टीम की दीर्घकालिक तैयारी को भी सुरक्षित रखता है।
IPL जैसे बड़े मंच पर चोटिल खिलाड़ी का उतरना न केवल उसके करियर के लिए खतरनाक है बल्कि फ्रैंचाइजी के लिए भी नुकसानदेह होता है। अब देखना यह होगा कि हसरंगा और पथिराना जैसे स्टार खिलाड़ी IPL शुरू होने से पहले यह जरूरी परीक्षा पास कर पाते हैं या नहीं।
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