अंबेडकर जयंती से पहले सीएम योगी ने प्रदेशवासियों को लिखी चिट्ठी, बाबासाहेब की विरासत को बताया प्रासंगिक और प्रेरक, सुदामा-ओवरकोट की मार्मिक कहानी, 35 हजार पुस्तकों का संग्रह और घरौनी योजना से महिलाओं को मालिकाना हक

अंबेडकर जयंती से पहले CM योगी ने लिखी चिट्ठी, बाबासाहेब की विरासत को प्रेरक बताया, सुदामा-ओवरकोट की कहानी, 35 हजार पुस्तकें, घरौनी योजना और 6 करोड़ लोगों को गरीबी से मुक्ति

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Yogi Adityanath: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत रत्न डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर प्रदेशवासियों के नाम एक भावपूर्ण चिट्ठी लिखी है। इस पत्र में उन्होंने बाबासाहेब के विजन, मिशन और उनकी अदम्य लगन को आज के युग में भी प्रेरणादायी बताया। साथ ही सरकार की योजनाओं को आंबेडकर के आदर्शों की व्यावहारिक अभिव्यक्ति करार दिया।

Yogi Adityanath: सीएम योगी ने अंबेडकर जयंती पर क्यों लिखी यह चिट्ठी

14 अप्रैल को पूरे देश में भारत रत्न बाबासाहेब डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर की जयंती मनाई जाती है। इस महत्वपूर्ण अवसर से एक दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम पत्र लिखकर बाबासाहेब के प्रति अपनी और राज्य सरकार की कृतज्ञता व्यक्त की। यह चिट्ठी केवल एक औपचारिक संदेश नहीं है। इसमें बाबासाहेब के जीवन के अनछुए प्रसंग, उनकी वैचारिक विरासत और उत्तर प्रदेश सरकार की जनकल्याण योजनाओं को एक सूत्र में पिरोया गया है।

Yogi Adityanath: बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर कौन थे और उनकी विरासत क्या है

डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को हुआ था। वे स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री थे और भारतीय संविधान के प्रमुख शिल्पी के रूप में सदा याद किए जाते हैं। बाबासाहेब एक असाधारण बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वे एक साथ न्यायविद, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ और संवेदनशील समाज सुधारक थे। उन्होंने न केवल संविधान की रचना की बल्कि करोड़ों वंचित लोगों को गरिमामय जीवन जीने का संवैधानिक अधिकार भी दिलाया।

Yogi Adityanath: बाबासाहेब की पढ़ाई और 35 हजार पुस्तकों का संग्रह

सीएम योगी ने अपनी चिट्ठी में बाबासाहेब की असाधारण विद्वता का उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि अपने समय में बाबासाहेब भारत के सर्वाधिक शिक्षित व्यक्तियों में से एक थे। बाबासाहेब के पास 35 हजार से अधिक पुस्तकों का व्यक्तिगत संग्रह था और वे प्रतिदिन 16 से 18 घंटे अध्ययन करते थे। यह तथ्य आज की युवा पीढ़ी के लिए एक असाधारण प्रेरणा है कि ज्ञान और परिश्रम से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है।

Yogi Adityanath: सुदामा और ओवरकोट की वह मार्मिक कहानी

सीएम योगी ने अपने पत्र में बाबासाहेब के मानवीय स्वभाव का एक दुर्लभ और मार्मिक प्रसंग साझा किया। बाबासाहेब के घर पर सहयोग के लिए सुदामा नाम का एक व्यक्ति रहता था। एक बार सुदामा देर रात फिल्म देखकर लौटे और घर के बाहर ही सो गए। सुबह जब उनकी आंख खुली तो उन्होंने देखा कि बाबासाहेब ने चुपचाप उनके ऊपर अपना ओवरकोट ओढ़ा दिया था। यह छोटी सी घटना बाबासाहेब की करुणा और मानवता के प्रति उनके गहरे सम्मान को बयान करती है।

Yogi Adityanath: बाबासाहेब की आर्थिक दूरदृष्टि और राजकोषीय संघवाद

सीएम योगी ने अपनी चिट्ठी में बाबासाहेब के आर्थिक विचारों को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने लिखा कि बाबासाहेब की आर्थिक आयाम और शिक्षा के प्रति दूरदृष्टि अमूल्य है। बाबासाहेब ने राजकोषीय संघवाद का विचार दिया जो आज भी भारत की वित्तीय व्यवस्था की नींव में शामिल है। उनका प्रसिद्ध नारा “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था।

Yogi Adityanath: उत्तर प्रदेश सरकार की योजनाएं और आंबेडकर के आदर्श

सीएम योगी ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार बाबासाहेब के विचारों को व्यावहारिक धरातल पर उतारने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि न्याय और समता के आदर्शों के अनुरूप प्रत्येक गरीब, वंचित, महिला और युवा तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। राशन, आवास, शौचालय और स्वास्थ्य सेवाओं के साथ साथ घरौनी योजना के माध्यम से महिलाओं को मालिकाना अधिकार दिया जा रहा है। इसके अलावा छात्रवृत्तियां, सामूहिक विवाह योजना और अटल आवासीय विद्यालयों में वंचित बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जा रही है।

Yogi Adityanath: 6 करोड़ लोग गरीबी से ऊपर उठे और जीरो पॉवर्टी का लक्ष्य

सीएम योगी ने अपने पत्र में एक महत्वपूर्ण आंकड़ा साझा किया। उन्होंने बताया कि नियोजित सरकारी कार्यक्रमों के माध्यम से उत्तर प्रदेश में 6 करोड़ से अधिक लोग बहुआयामी गरीबी से ऊपर आए हैं। अब सरकार बाबासाहेब के सिद्धांतों को आत्मसात करते हुए जीरो पॉवर्टी कार्यक्रम को आगे बढ़ा रही है। सामाजिक नीति विशेषज्ञों के अनुसार इस पैमाने पर गरीबी उन्मूलन की उपलब्धि बाबासाहेब के उस सपने की दिशा में एक ठोस कदम है जिसमें उन्होंने एक समतामूलक समाज की कल्पना की थी।

Yogi Adityanath: प्रदेशवासियों से क्या है सीएम योगी का आग्रह

सीएम योगी ने अपनी चिट्ठी के अंत में प्रदेशवासियों से एक व्यक्तिगत आग्रह किया। उन्होंने लिखा कि बाबासाहेब के सपने को साकार करने के लिए प्रत्येक परिवार को अपने घर में अच्छी पुस्तकें रखनी चाहिए, स्वयं पढ़ना चाहिए और बच्चों को भी पढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए। यह आग्रह बाबासाहेब के उस मूल विश्वास को प्रतिध्वनित करता है कि शिक्षा ही वह शक्ति है जो किसी भी व्यक्ति और समाज को उसकी बेड़ियों से मुक्त कर सकती है।

निष्कर्ष

सीएम योगी आदित्यनाथ की यह चिट्ठी बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर को एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि है जो उनके जीवन के व्यक्तिगत, वैचारिक और राष्ट्रीय योगदान को एक साथ सामने रखती है। सुदामा और ओवरकोट की कहानी हो या 35 हजार पुस्तकों के संग्रह का उल्लेख, ये प्रसंग बाबासाहेब को एक महान मानव के रूप में प्रस्तुत करते हैं। प्रदेशवासियों से पुस्तकें पढ़ने और बच्चों को पढ़ाने का आग्रह इस पत्र की सबसे सशक्त और व्यावहारिक सीख है।

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