इजरायल के हमले के बाद ईरान का बड़ा पलटवार, कतर, सऊदी, यूएई और कुवैत के गैस-तेल ठिकाने बने निशाना, रास लाफान को भारी नुकसान, मरम्मत में लग सकते हैं पांच साल, वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया

कतर समेत चार देशों के गैस ठिकानों पर हमला, रास लाफान को भारी नुकसान

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Iran retaliation: मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। इजरायल ने अमेरिका की सहायता से ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत के तेल और गैस ठिकानों पर जबरदस्त हमला बोल दिया। सबसे ज्यादा नुकसान कतर को हुआ है। कतरएनर्जी के CEO साद अल-काबी ने कहा कि उन्होंने अमेरिका को बार-बार चेताया था कि गैस ठिकानों को इस संघर्ष में मत घसीटो।

Iran retaliation: इजरायल के हमले के बाद ईरान का पलटवार क्या था

बुधवार की रात इजरायल ने अमेरिकी समर्थन के साथ ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड को निशाना बनाया। साउथ पार्स दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार माना जाता है जो ईरान और कतर की समुद्री सीमा पर स्थित है। इस हमले के तुरंत बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की और खाड़ी क्षेत्र के चार देशों के ऊर्जा ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। इस पलटवार में कतर, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत के तेल और गैस प्रतिष्ठान सीधे निशाने पर आए।

Iran retaliation: कतरएनर्जी CEO ने क्यों कहा कि उन्होंने अमेरिका को चेताया था

कतरएनर्जी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी साद अल-काबी ने एक बयान में कहा कि उन्होंने अमेरिका को बार-बार यह संदेश दिया था कि गैस ठिकानों को इस युद्ध की आग से दूर रखा जाए। उन्होंने कहा कि कतर को पहले से खतरे का अंदाजा था और इसी आधार पर चेतावनी दी गई थी। साद अल-काबी का कहना है कि अमेरिका ने उनकी बात नहीं सुनी और अब जो नुकसान हुआ है वह अत्यंत गंभीर है। उन्होंने ट्रंप प्रशासन पर परोक्ष रूप से नाराजगी जताई और कहा कि यह स्थिति टाली जा सकती थी।

Iran retaliation: रास लाफान को कितना नुकसान हुआ और मरम्मत में कितना समय लगेगा

ईरानी हमले में कतर का रास लाफान औद्योगिक नगर सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ है। रास लाफान दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी यानी तरलीकृत प्राकृतिक गैस निर्यात केंद्र है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। साद अल-काबी ने बताया कि रास लाफान में हुए नुकसान को ठीक करने में तीन से पांच साल तक का समय लग सकता है। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार यह नुकसान केवल कतर तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसका असर यूरोप और एशिया में गैस आपूर्ति पर भी पड़ेगा।

Iran retaliation: साउथ पार्स गैस फील्ड क्या है और यह क्यों अहम है

साउथ पार्स गैस फील्ड फारस की खाड़ी में स्थित है और इसे दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार माना जाता है। यह क्षेत्र ईरान और कतर के बीच साझा है जहां ईरानी हिस्से को साउथ पार्स और कतरी हिस्से को नॉर्थ फील्ड कहा जाता है। इस एक फील्ड से कतर अपनी कुल गैस आय का बड़ा हिस्सा अर्जित करता है। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, इस फील्ड पर हमला वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिलाने के लिए पर्याप्त है।

Iran retaliation: खाड़ी देशों पर हमले का वैश्विक ऊर्जा बाजार पर क्या असर पड़ेगा

कतर दुनिया के शीर्ष एलएनजी निर्यातकों में से एक है और यूरोप तथा एशियाई देश उसकी गैस पर बड़े पैमाने पर निर्भर हैं। रास लाफान पर हमले के बाद वैश्विक गैस की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है। सऊदी अरब और यूएई के तेल ठिकानों पर हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भी भारी उथल-पुथल मच गई है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचा तो ऊर्जा की वैश्विक आपूर्ति पर गंभीर संकट आ सकता है।

Iran retaliation: ट्रंप प्रशासन की भूमिका पर क्या उठ रहे हैं सवाल

कतरएनर्जी के CEO के बयान के बाद अमेरिकी नीति पर सवाल उठने लगे हैं। साद अल-काबी की टिप्पणी से यह स्पष्ट होता है कि कतर ने बार-बार अपनी चिंताएं वाशिंगटन तक पहुंचाई थीं लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया गया। पश्चिम एशिया मामलों के जानकारों के अनुसार, अमेरिका ने इजरायल को साउथ पार्स पर हमले की जो अनुमति या समर्थन दिया उसके दूरगामी परिणाम सामने आ रहे हैं। इस हमले ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है और अमेरिका के अरब सहयोगी देश बेहद नाराज हैं।

Iran retaliation: कतर की भूमिका और मध्य पूर्व में उसकी कूटनीतिक स्थिति

कतर एक छोटा लेकिन अत्यंत प्रभावशाली देश है जो अपनी गैस संपदा की बदौलत विश्व राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। कतर का रास लाफान औद्योगिक नगर देश की आर्थिक रीढ़ है और वहां से प्रतिवर्ष अरबों डॉलर की गैस का निर्यात किया जाता है। कतर ने इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। ऐसे में ईरान द्वारा कतर को निशाना बनाना इस क्षेत्र की कूटनीति के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

निष्कर्ष

मध्य पूर्व का यह ऊर्जा संकट अब केवल एक क्षेत्रीय युद्ध नहीं रहा, यह पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है। साउथ पार्स पर इजरायली हमले और ईरान की जवाबी कार्रवाई ने खाड़ी देशों की ऊर्जा संरचना को हिलाकर रख दिया है। कतरएनर्जी के CEO का बयान यह साफ करता है कि इस तबाही को रोका जा सकता था। अब यह देखना होगा कि अमेरिका और उसके सहयोगी इस बढ़ती आग को बुझाने के लिए कौन से कदम उठाते हैं क्योंकि हर गुजरता दिन वैश्विक ऊर्जा बाजार को और अस्थिर बना रहा है।

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